महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की हवाई दुर्घटना में मृत्यु के बाद भारत में निजी स्वामित्व वाली विमानन सेवाओं के नए सिरे से निरीक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है। निजी सेवाओं के दायरे में चार्टर हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर और हॉटएयर बैलून आते हैं। राकांपा अध्यक्ष अजित पवार को लेकर जा रहा वीएसआर वेंचर्स के स्वामित्व और संचालन वाला लीयरजेट 45 बिजनेस जेट 28 जनवरी को बारामती हवाई अड्डे के पास हादसे का शिकार हो गया था।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के अनुसार 2014 से अब तक देश में 90 दुर्घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2014-20 के दौरान हुई 56 दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा 39.3 प्रतिशत गैर-अनुसूचित विमानों के साथ हुईं, जबकि प्रशिक्षण संस्थानों के विमानों की हिस्सेदारी 28.6 प्रतिशत और शेड्यूल्ड ऑपरेटरों का हिस्सा 23.2 प्रतिशत था। वर्ष 2021 और 2024 के बीच 34 दुर्घटनाओं में 32.3 प्रतिशत गैर-अनुसूचित विमानों के साथ हुईं। इसमें डीजीसीए ने ‘दुर्घटना’ को मृत्यु, गंभीर चोट, विमान को भारी नुकसान या उसके लापता होने से जुड़ी घटनाओं के रूप में परिभाषित किया है।
डीजीसीए के रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में देश में इस तरह के 445 विमान सेवा में हैं। इनमें से 214 फिक्स्ड-विंग, 220 रोटरी-विंग और 11 हॉट एयर बैलून हैं। फिक्स्ड-विंग ऑपरेटर बिजनेस जेट और छोटे यात्री या कार्गो विमान प्रदान करते हैं, जबकि रोटरी-विंग ऑपरेटरों को हेलीकॉप्टर संचालित करने के लिए अधिकृत किया गया है। कुल बेड़े में से तीन कार्गो सेवाएं देते हैं और 24 का उपयोग भूमि सर्वेक्षण जैसे हवाई कार्यों के लिए किया जाता है।
इस बीच, ऑपरेटरों की संख्या 133 हो गई है, जो 2015 की तुलना में सात अधिक है। लेकिन, विमानों और हेलीकॉप्टरों की कुल संख्या में 41 की वृद्धि हुई है। हालांकि ऑपरेटरों की संख्या 2022 में घटकर 91 रह गई थी। ये विमान विमान नियम, 1937 के नियम 134ए के उप-नियम (2) के तहत नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट के तहत उड़ान भरते हैं, जिसमें प्रावधान है कि शेड्यूल्ड सेवा को छोड़कर कोई भी हवाई परिवहन सेवा केंद्र सरकार की अनुमति के बिना संचालित नहीं की जा सकती।
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परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति ने ‘नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा की समग्र समीक्षा’ शीर्षक से अगस्त 2025 की अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि भारत में विमानों की संख्या हवाई अड्डे के विकास के अनुपात में ज्यादा है। इससे प्रमुख हवाईअड्डों पर क्षमता असंतुलन पैदा हो रहा है। नॉन-शेड्यूल्ड विमानों में हालिया वृद्धि को देखते हुए इस असंतुलन को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है। समिति ने हेलीकॉप्टर संचालन पर भी प्रकाश डाला है। यह भी नॉन-शेड्यूल्ड खंड का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
इसमें कहा गया है कि हाल की दुर्घटनाओं में नियामकीय खामियां सामने आई हैं जहां उच्च जोखिम वाले कार्यों को राज्य-स्तरीय एजेंसियों द्वारा प्रबंधित किया गया है और इनमें केंद्रीय निरीक्षण की कमी दिखती है। इस समिति ने पहाड़ी क्षेत्रों में काम करने वाले पायलटों के लिए अनिवार्य इलाका-विशिष्ट प्रशिक्षण की कमी की ओर भी संकेत किया है।
शेड्यूल्ड एयरलाइंस और नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर दोनों को डीजीसीए द्वारा निर्धारित समान बुनियादी पायलट लाइसेंसिंग नियमों का पालन करना होगा। इसमें न्यूनतम उड़ान घंटे, टाइप रेटिंग और समय-समय पर जांच शामिल है। इन न्यूनतम आवश्यकताओं के अलावा, हर तरह के विमान के लिए डीजीसीए से अनुमोदित प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी जरूरत होती है। यदि कोई नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर भारत में किसी भी तरह का नया विमान लाता है, तो उसे उड़ान भरने से पहले एक नई प्रशिक्षण योजना बनानी और उसे स्वीकृत करानी होगी।
नॉन-शेड्यूल्ड सेवाओं में चार्टर्ड यात्री और कार्गो उड़ानें, आपातकालीन चिकित्सा निकासी और भूमि सर्वेक्षण जैसे एरियल वर्क आते हैं। दशकों से ऐसी सेवाएं मुख्य रूप से अमीरों को सेवा प्रदान करती आ रही हैं, लेकिन अब अन्य लोग और एजेंसियां भी इन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।