facebookmetapixel
छत्तीसगढ़ के हर जिले में निवेश बढ़ा, रायपुर से परे औद्योगिक विकास का नया चेहरा: सायWEF में भारत को सराहा गया, टेक महिंद्रा सहित भारतीय कंपनियों का AI में वैश्विक स्तर पर जोरदार प्रदर्शनIndia Manufacturing Index 2026: भारत छठे पायदान पर, बुनियादी ढांचे और कर नीति में सुधार की जरूरतभारत-यूएई रिश्तों में नई छलांग, दोनों देशों ने 2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्यचांदी ने तोड़ा सारे रिकॉर्ड: MCX पर 5% उछाल के साथ ₹3 लाख प्रति किलो के पार, आगे और तेजी के संकेतदिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा रनवे 16 फरवरी से पांच महीने बंद रहेगाQ3 नतीजों में सुस्ती: मुनाफा वृद्धि 17 तिमाहियों के निचले स्तर पर, आईटी और बैंकिंग सेक्टर दबाव में‘महंगे सौदों से दूरी, वैल्यू पर फोकस’, ITC के कार्यकारी निदेशक ने FMCG रणनीति पर खोले अपने पत्तेसबसे कम उम्र में BJP अध्यक्ष का पद संभालेंगे नितिन नवीन, पार्टी के शीर्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवारJIO का IPO आने के बाद महंगे होंगे रिचार्ज, जुलाई से टेलीकॉम यूजर्स पर बढ़ने वाला है बोझ

सोया उद्योग की करों में छूट की गुहार

Last Updated- January 02, 2009 | 10:21 PM IST

मध्य प्रदेश का सोया प्रसंस्करण उद्योग इन दिनों कर की ऊंची दरों से परेशान है, लिहाजा इसने प्रवेश कर समाप्त करने की मांग की है। उद्योग को प्रवेश कर, मंडी कर और आयात कर चुकाना पड़ता है।


सूत्रों ने बताया कि सोया की बढ़ती कीमत ने भी उन्हें काफी परेशान कर रखा है और इस वजह से कई यूनिट बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं।

राज्य में सोया की क्रशिंग और प्रोसेसिंग यूनिट क्षमता से ज्यादा हैं यानी यहां इसकी काफी यूनिट हैं। पिछले साल राज्य सरकार ने सोया को नकारात्मक सूची से बाहर कर दिया था।

राज्य की सोया प्रोसेसिंग यूनिट ने तत्काल प्रभाव से प्रवेश कर समाप्त करने की मांग की है, जो फिलहाल एक फीसदी की दर से वसूला जाता है। उनकी मांग है कि मंडी-कर से छुटकारा दिलाई जाए और केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले आयात करों का युक्तिकरण किया जाए।

एक सोया प्रोसेसर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘इस साल कीमतें 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के आस पास रहने से सोया प्रोसेसर्स परेशान हैं। ऊपर से राज्य और केंद्र सरकार के करों की वजह से उद्योग दबाव में आ गया है।

कई प्रोसेसिंग इकाइयों का भविष्य अंधकारमय हो चला है। राज्य सरकार ने कपास का प्रवेश कर घटा दिया है लेकिन सोये को नजरंदाज कर दिया गया।

केंद्र सरकार ने निर्यातकों के लिए पैकेज की पेशकश की लेकिन सोया उद्योग को इसमें शामिल नहीं किया गया। 5,000 करोड़ रुपये का यह निर्यात उद्योग इस प्रकार अपना अस्तित्व नहीं बनाए रख सकता है।’

इंदौर सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने यह भी कहा कि वे उद्योग और वाणिज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जलदी ही मिलेंगे और उनके सामने अपनी मांग रखेंगे।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने कहा, ‘हम सोया के प्रवेश कर को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। हम इस संदर्भ में जल्द ही राज्य सरकार के अधिकारियों से मिलेंगे।

पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र और राजस्थान में सोया पर कोई प्रवेश कर नहीं लगाया जाता है। मध्य प्रदेश में मंडी-कर भी सबसे अधिक 2.2 प्रतिशत है जबकि अन्य राज्यों में यह एक प्रतिशत है।’

First Published - January 2, 2009 | 10:21 PM IST

संबंधित पोस्ट