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विश्व प्रसिद्ध काला नमक चावल की खेती अब पूर्वी यूपी के अलावा अन्य राज्यों में भी होगी

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उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के 11 जिलों में काला नमक की खेती की जाती है। सबसे ज्यादा काला नमक धान बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, बलरामपुर, गोंडा जिलों में पैदा किया जाता

Last Updated- June 16, 2023 | 1:10 PM IST
Kalanamak rice

देश और दुनिया में अपनी खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर पूर्वी उत्तर प्रदेश का काला नमक चावल अब अन्य राज्यों में भी पैदा किया जाएगा। योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल किए जाने और भौगोलिक सूचकांक (जीआई) मिलने के बाद काला नमक चावल के बीजों की मांग देश के कई राज्यों से होने लगी है।

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ से सबसे ज्यादा मांग काला नमक के बीजों की आई है तो बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के किसान भी इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से के 11 जिलों में काला नमक की खेती की जाती है। सबसे ज्यादा काला नमक धान बस्ती, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, बलरामपुर, गोंडा जिलों में पैदा किया जाता है। इन जिलों में बीज विक्रेताओं का कहना है कि सबसे ज्यादा मांग छत्तीसगढ़ से मिल रही है। अगर मांग को पैमाना मान लें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश के बराबर काला नमक की खेती इस बार अकेले छत्तीसगढ़ में ही की जाएगी।

ओडीओपी में आने और जीआई टैग मिलने के बाद बड़े पैमाने पर काला नमक चावल की और इसके बीजों की ऑनलाइन बिक्री होने लगी है। कई स्वयंसेवी संस्थाएं और कृषि उत्पादक संघ इसकी बिक्री करने लगे हैं। न केवल बाहरी राज्यों बल्कि उत्तर प्रदेश के भी कई जिलों में काला नमक बीज की मांग हो रही है। इनमें बलिया, आजमगढ़, प्रयागराज, उन्नाव, प्रतापगढ, जौनपुर और सुल्तानपुर शामिल हैं। केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश के ही 11 जिलों में इस बार काला नमक का रकबा पहले के मुकाबले तीन गुना बढ़ने की उम्मीद है।

बलरामपुर जिले में खाद एवं बीज का भंडार चलाने वाले कर्ण सिंह बताते हैं कि काला नमक की मांग पहले के मुकाबले तीन गुना बढ़ी है और इसके खरीददार बाहरी राज्यों से संपर्क कर रहे हैं। काला नमक चावल की कीमत आनलाइन प्लेटफार्मों पर 100 से 120 रुपये के बीच चल रही है वहीं बीज के दान 200 रुपये तक चल रहे हैं।

बस्ती जिले में काला नमक की खेती करने वाले किसान ललित सिंह का कहना है कि इसकी पैदावार के लिए पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। आम धान की वैरायटी के मुकाबले इसकी पौध लगाने से लेकर पकने तक लगातार पानी की जरुरत होती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिन 11 जिलों में इसकी खेती होती है वहां पानी की बहुतायत है लिहाजा फसल भी अच्छी होती है। उनका कहना है कि हाल के कुछ वर्षों में काला नमक का क्रेज लोगों में बढ़ा और इसके स्वाद व खुशबू के बारे में लोगों को पता चला है।

गौरतलब है कि अभी कुछ साल पहले तक कम पैदावार और प्रोत्साहन की कमी के चलते काला नमक की खेती सिमटने लगी थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बस्ती, सिद्धार्थनगर और बलरामपुर जिले के कुछ हिस्सों को छोड़कर इसकी खेती से किसान परहेज करने लगे थे।

सरकारी प्रोत्साहन, ओडीओपी और जीआई के बाद एक बार फिर से इसका चलन बढ़ने लगा। बीते सात सालो में इसके रकबे में 300 गुना बढ़ोतरी हुयी है। जहां 2016 में केवल 220 हेक्टेयर में इसकी खेती होती थी वहीं पिछले साल यह 70000 हेक्टेयर में बोया गया था। इस बार रकबा और भी बढ़ेगा। प्रदेश सरकार ने इसके प्रोत्साहन के लिए दो साल के कुशीनगर जिले में काला नमक महोत्सव का आयोजन शुरु किया है। पिछले साल मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर में काला नमक का कॉमन फैसिलिटी सेंटर का लोकार्पण भी किया था। इससे काला नमक के ग्रेडिंग, पैकिंग से लेकर हर चीज की अत्याधुनिक सुविधा एक ही छत के नीचे मिल जाएगी।

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First Published - June 16, 2023 | 1:10 PM IST

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