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पाम तेल की पतली धार से सोया तेल हुआ ‘बीमार’

Last Updated- December 08, 2022 | 10:06 AM IST

अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है कि पाम ऑयल की हालत गंभीर होने से सोयाबीन तेल भी बीमार हो चला है। इसके इलाज के लिए सोयाबीन मिल मालिक सरकार पर दबाव बनाने के लिए लामबंद हो चुके हैं।


शुक्रवार देर शाम सोयाबीन प्रोसेसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के सदस्य वाणिज्य मंत्री कमलनाथ से मुलाकात भी कर रहे हैं। हालांकि सरकार ने हाल में सोयाबीन के कच्चे तेल पर 20 फीसदी तक आयात शुल्क लगाकर उसके इलाज की कोशिश की थी, लेकिन यह इलाज बीमारी की गंभीरता को देखते हुए कम नजर आ रही है।

सोपा ने क्रूड पाम ऑयल (सीपीओ) के आयात पर पर तत्काल प्रभाव से कम से कम 20 फीसदी तक शुल्क लगाने की मांग की है। सोयाबीन तेल उत्पादकों के मुताबिक पाम ऑयल व सोयाबीन तेल के दाम में काफी अधिक अंतर होने के कारण उनकी मांग नहीं निकल पा रही है।

पिछले दस दिनों से सीपीओ की कीमत 245-250 रुपये प्रति 10 किलोग्राम (कांडला पोर्ट पर) के स्तर पर है। जबकि रिफाइंड सोयाबीन तेल की कीमत 460-465 रुपये प्रति 10 किलोग्राम (इंदौर में) के स्तर पर है।

सोपा के सचिव गिरीश मतलानी कहते हैं, ‘पाम व सोया तेल में 5 रुपये तक का अंतर हो तो सोया तेल पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन फिलहाल यह अंतर 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। ऐसे में सोयाबीन तेल का बाजार बिल्कुल नहीं उठ पा रहा है।’

सोपा का यह भी कहना है कि सरकार को आयात शुल्क लगाने के मामले में पाम व सोयाबीन में कोई फर्क नहीं करना चाहिए।पिछले दिनों सोयाबीन के कच्चे तेल पर 20 फीसदी का शुल्क लगा दिया गया, जबकि सीपीओ का आयात शुल्क मुक्त रहा।

हालांकि सरकार के इस फैसले से सोयाबीन तेल व सोयाबीन की कीमत में थोड़ी तेजी जरूर आई है। तेल में यह तेजी प्रति किलोग्राम 4-5 रुपये तक दर्ज की गयी है तो सोयाबीन की कीमत 1700 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गई है। शुल्क लगने के पहले सोयाबीन की कीमत 1550-1600 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर थी।

बाजार सूत्रों के मुताबिक नवंबर में सोयाबीन तेल का कोई आयात भी नहीं हुआ है फिर भी इसकी घरेलू मांग में तेजी नहीं आ रही है। इस समय सोयाबीन की नई फसल की आवक होती है और तेल पेराई का काम तेजी पर होता है। पर पाम तेल में आई रिकार्ड गिरावट के कारण सोयाबीन मिल की हालत खराब हो चुकी है।

तेल कारोबारी हेमंत गुप्ता कहते हैं, ‘डॉलर के मुकाबले रुपये में आई मजबूती के कारण पाम तेल के भाव में फिलहाल कोई तेजी भी नहीं आने वाली है। दूसरी तरफ कच्चे तेल में लगातार हो रही गिरावट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोयाबीन तेल की कीमत में कोई उछाल नहीं होने वाला है।’

कारोबारियों के मुताबिक हालत ऐसी है कि आयातित सोयाबीन तेल की कीमत घरेलू कीमत के मुकाबले 3-4 रुपये प्रति किलोग्राम कम है। ऐसे में सोयाबीन तेल का बाजार इन दिनों नकारात्मक दबाव में है।

सोपा ने सरकार से विशेष कृषि उपज योजना के तहत मिलने वाले लाभ को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी तक भी करने की मांग की है। साथ ही सोयबीन तेल के निर्यात पर 4 फीसदी का अतिरिक्त लाभ देने की गुजारिश की है।

First Published - December 19, 2008 | 10:56 PM IST

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