facebookmetapixel
टॉप-एंड गाड़ियों ने संभाला मर्सिडीज-बेंज इंडिया का प्रदर्शन, बिक्री घटने के बावजूद मुनाफा बढ़ा18 हजार से ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें खाली, नीट पीजी की कट-ऑफ में कटौतीटैरिफ से भारतीय ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट पर ब्रेक, नए ऑर्डर से हिचक रहीं अमेरिकी कंपनियांStock Market Holiday: शेयर बाजार में 15 जनवरी को नहीं होगा कारोबार, इस वजह से बंद रहेंगे BSE और NSEएक भारत, श्रेष्ठ भारत का जीवंत प्रतीक है काशी-तमिल संगममसरकारी दखल के बाद भी ‘10 मिनट डिलिवरी’ का दबाव बरकरार, गिग वर्कर्स बोले- जमीनी हकीकत नहीं बदलीभारतीय सिनेमा बनी कमाई में ‘धुरंधर’; बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ₹13,397 करोड़, गुजराती और हिंदी फिल्मों ने मचाया धमालInfosys ने बढ़ाया रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान, डील पाइपलाइन मजबूत; मुनाफा नई श्रम संहिता से दबाव मेंस्मार्टफोन निर्यात में भारत का नया रिकॉर्ड, 2025 में 30 अरब डॉलर के पार; iPhone की 75% हिस्सेदारीQ3 Results: Groww का मुनाफा 28% घटा, लेकिन आय बढ़ी; HDFC AMC का लाभ 20% उछला

एक बार फिर कच्चे तेल में फिसलन

Last Updated- December 07, 2022 | 10:04 PM IST

वित्तीय संस्थानों को मंदी से उबारने के अमेरिकी प्रयासों पर उभरे संदेह के बादल के चलते कच्चे तेल में मंगलवार को तीन डॉलर से ज्यादा की कमी हुई और यह 107 डॉलर प्रति बैरल से नीचे जाकर बंद हुआ।

उल्लेखनीय है कि सोमवार को इस अनुमान के बाद कि सरकार के आर्थिक कदमों से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और कच्चे तेल की खपत में वृद्धि होगी, कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा गया।

मंगलवार को संदेह पैदा होने के बाद पूरा माहौल ही बदल गया और निवेशकों ने अपने हाथ खींचने शुरू कर दिए। एक दलाल ने बताया कि कच्चे तेल में तेजी सकारात्मक माहौल के चलते रही जबकि कमी वास्तविकताआ से पाला पड़ने से हुई।

अमेरिकी क्रूड ऑयल के नवंबर डिलिवरी का भाव 3.01 डॉलर की कमी से 106.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ जबकि ब्रेंट क्रूड ऑयल में 3.12 डॉलर की कमी के बाद भाव 102.92 डॉलर पर बंद हुआ।

गौरतलब है कि सोमवार को यूएस क्रूड ऑयल के नवंबर डिलिवरी में करीब 7 डॉलर की तेजी दर्ज की गई थी।

अक्टूबर डिलिवरी में तो कल 15.7 फीसदी की तेजी देखी गई जो एक दिन में होने वाली सबसे जबरदस्त बढ़ोतरी रही है। इस तेजी के बाद तेल के भाव 25 डॉलर की मजबूती से 120.92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे।

एक जानकार ने बताया कि मंगलवार की नरमी असल में कल अक्टूबर और नवंबर अनुबंध में हुई रेकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते हुई है।

उनके अनुसार, अमेरिकी वित्तीय संस्थानों को खतरे से बचाने के लिए सरकार के 700 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता को लेकर तमाम तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं जबकि अभी और सवाल पैदा होने का अनुमान है।

जानकारों के मुताबिक, सोमवार को कच्चे तेल में आए उछाल के पीछे डॉलर की मजबूती का समर्थन रहा है।

First Published - September 23, 2008 | 10:59 PM IST

संबंधित पोस्ट