facebookmetapixel
Advertisement
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के अगले चरण की तैयारी, 10,000 सर्किट किमी ट्रांसमिशन नेटवर्क बनेगापश्चिम एशिया संकट से सबक, भारत को मजबूत करने होंगे तेल भंडार और घरेलू उत्पादनकैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ की गोबरधन योजना को दी मंजूरी, CBG उत्पादन बढ़ाने पर जोरविकसित भारत के लिए 21 साल तक 9.25% विकास दर जरूरी: अशोक लाहिड़ी भारत के ई20 लक्ष्य पर ब्राजील का भरोसा, जैव ईंधन को बताया पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए जरूरीउदारीकरण के 35 साल: भारत ने चीन से पहले दवा बनानी शुरू की लेकिन अब चीन वर्षों आगेतकनीक के सहारे बाजार सुधार पर जोर, सेबी लाएगा सेतु पोर्टल और सिंगल विंडो सिस्टमनजारा टेक्नॉलजीज ने तरजीही इश्यू से 733.5 करोड़ रुपये जुटाए, नए CEO रेमंड स्टॉफर करेंगे सबसे बड़ा निवेशम्युचुअल फंड कंपनियों की नई रणनीति, अलग-अलग थीम पर फोकस करेंगी नई स्कीमेंरक्षा शेयरों का जलवा: जून तिमाही में 2.5 लाख करोड़ रुपये बढ़ा मार्केट कैप, लंबी अवधि में ग्रोथ की उम्मीद

आह आलू बोलिए !

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:51 PM IST

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुमान को गलत ठहराते हुए आलू क्षेत्र के नाम से मशहूर आगरा के किसानों ने आलू की इतनी पैदावार कर दी है कि  उनके उत्पाद को कोल्ड स्टोरेज तक मयस्सर नहीं हो रहे।


अभी ज्यादा वक्त नहीं गुजरे, तीन हफ्ते पहले की ही तो बात है राज्य के बागवानी मंत्री नारायण सिंह सुमन ने विधानसभा में कहा कि वसंत के देर होने से आलू के उत्पादन में 8 से 12 फीसदी तक की गिरावट आने का अंदेशा है। पर महज कुछ ही दिनों बाद जब आलू की फसल उखाड़ी जाने लगी तो उत्पादन में कमी के कयास सिरे से गलत साबित हो गए।


जहां राज्य सरकार का अनुमान था कि इस साल आगरा क्षेत्र में 8.35 लाख मीट्रिक टन आलू उपजेगा, वहीं पूरी फसल उखड़ने से पहले ही उपज का आंकड़ा 11 लाख मीट्रिक टन को पार कर चुका है। अब आलू के इस बंपर उत्पादन से हालत यह बन रहे हैं कि किसानों को उसे कोल्ड स्टोरेज की बजाय खेतों में ही रखने को मजबूर होना पड़ रहा है। आगरा के सभी 160 स्टोरेज ने आलू को रखने से मना कर हाउसफुल का बोर्ड अपने दरवाजे पर टांग दिया है।


आगरा आलू उत्पादन के लिहाज से उत्तरी भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र रहा है। इसके चलते इसे आलू बेल्ट के नाम से भी जाना जाता है। यहां देश के कुल आलू का 8 प्रतिशत आलू उपजाया जाता है।


 यहां के किसान भी दूसरे किसी फसल के बजाय आलू उपजाना ज्यादा पसंद करते हैं। पर इस सीजन की इस अजीबोगरीब स्थिति पर बात करते हुए फतेहाबाद के एक आलू उत्पादक रामप्रकाश ने दावा किया कि आलू के 250 बोरे से भरे उनके ट्रैक्टर को इलाके के सभी कोल्ड स्टोरेज ने रखने से मना कर दिया है।


उनका अनुरोध सभी जगह खारिज कर दिया गया। उनके अनुसार, आलू के लगभग 1,000 बोरे खेतों में ही पड़े हुए हैं पर इस गर्मी में इन्हें शायद ही कोल्ड स्टोरेज मिल पाए। यदि यही हाल रहा और राज्य सरकार ने आलू को दूसरे राज्यों में भेजने के कोई इंतजाम नहीं किए तो आलू उपजाने वाले किसान बर्बाद हो जाएंगे।

Advertisement
First Published - March 21, 2008 | 12:52 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement