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2025 में डर और लालच ने निवेशकों को क्या सिखाया और 2026 में इसमें क्या बदलाव कर सकते हैं?

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2025 में बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के फैसलों को भावनाओं से प्रभावित होते देखा गया, जहां SIP अनुशासन बना रहा लेकिन चांदी और हाई-बीटा शेयरों में जोखिम भी उठाया गया

Last Updated- December 29, 2025 | 3:33 PM IST
Rupee
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

2025 का साल दुनिया भर में बड़े बदलावों और अलग-अलग एसेट क्लास में तेज उतार-चढ़ाव से भरा रहा। लेकिन इस साल की असली कहानी सिर्फ बाजार की चाल नहीं थी, बल्कि यह थी कि निवेशकों ने कैसे फैसले लिए। SIP में लगातार निवेश जारी रखने से लेकर चांदी और हाई-रिस्क थीम्स पर जोश में लगाए गए दांव तक, रिटेल निवेशकों ने दिखाया कि आज भी निवेश में भावनाओं की बड़ी भूमिका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कम शोर और ज्यादा अनुशासन का व्यवहार 2026 के लिए अहम सबक है।

निवेशक अनुशासित भी रहे, लेकिन भीड़ के पीछे भी भागे

इस साल की एक बड़ी खास बात SIP की मजबूती रही। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के डायरेक्टर और हेड-प्रेफर्ड थॉमस स्टीफन के मुताबिक, हर महीने SIP में आने वाला पैसा ‘लगातार मजबूत बना रहा’, जो निवेशकों की बढ़ती समझदारी को दिखाता है।

स्क्रिपबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि साल भर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों ने अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान को लंबे समय तक और नियमित रूप से जारी रखा।

लेकिन इस अनुशासन के साथ-साथ भीड़ की मानसिकता भी दिखी। स्टीफन बताते हैं कि कीमती धातुओं, खासकर चांदी की तरफ लोगों का बड़े पैमाने पर रुझान रहा। वहीं जैन का कहना है कि 2024 के आखिर में बनी तेजी की उम्मीदों ने हाई-बीटा सेक्टर में जबरदस्त जोश भर दिया। डिफेंस, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों में खूब खरीदारी हुई, लेकिन बाद में इन सेक्टरों के कई शेयरों की मार्केट वैल्यू 60 से 70 फीसदी तक गिर गई।

चांदी और F&O में दिखीं भावनाओं की ताकत

चांदी इस साल भावनाओं के दम पर निवेश का सबसे बड़ा उदाहरण बनी। स्टीफन के मुताबिक, चांदी ने करीब 100 फीसदी का रिटर्न दिया। इससे पेपर सिल्वर में रिकॉर्ड निवेश आया और कुछ AMC को कुछ समय के लिए नई सब्सक्रिप्शन रोकनी पड़ी। सितंबर तक चांदी का आयात करीब 4,000 टन तक पहुंच गया, लेकिन मांग फिर भी सप्लाई से ज्यादा रही, जिससे कीमतें और चढ़ती चली गईं।

इसी दौरान जैन SEBI की एक स्टडी का जिक्र करते हैं, जिसमें सामने आया कि 91 फीसदी रिटेल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ और औसतन घाटा एक लाख रुपये से ज्यादा रहा। उनके मुताबिक यह लालच और डर से लिए गए फैसलों का क्लासिक उदाहरण है, जहां लोग जल्दी मुनाफे की उम्मीद में कूद पड़े, जबकि नुकसान की संभावना बहुत ज्यादा थी।

Also Read: शेयर बाजार में निफ्टी के उच्च स्तर और पोर्टफोलियो रिटर्न में अंतर ने निवेशकों को चौंकाया

2025 में हुईं ये महंगी व्यवहारिक गलतियां

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस साल निवेशकों ने तीन ऐसी गलतियां कीं, जिनसे पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंचा:

मौका छूट जाने का डर (FOMO): स्टीफन बताते हैं कि चारों तरफ बने माहौल को देखकर अनुभवी निवेशक भी चांदी खरीदने से खुद को रोक नहीं पाए।

कमजोर शेयरों को पकड़े रहना: कई निवेशक भावनात्मक लगाव या पुराने अच्छे रिटर्न की वजह से कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों को पकड़े बैठे रहे। स्टीफन का कहना है कि इससे लंबे समय के ‘फाइनेंशियल गोल’ खतरे में पड़ सकते हैं।

हाई-बीटा थीम्स के पीछे भागना: जैन के मुताबिक, जिन सेक्टरों में सिर्फ हाइप के दम पर तेजी आई थी, उत्साह खत्म होते ही वे बुरी तरह टूट गए। यह 2025 की सबसे बड़ी व्यवहारिक गलती रही।

वैश्विक उथल-पुथल ने बढ़ाई निवेशकों की बेचैनी

अमेरिका के चुनाव नतीजों से लेकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव तक, वैश्विक घटनाओं ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ाया।

जैन कहते हैं कि 2025 सच में एक ड्रामेटिक साल रहा। कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे बाजार गिर सकता था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके बावजूद कई निवेशक अनजाने डर की वजह से बाजार से बाहर निकल गए और दोबारा लौट नहीं पाए। जो लोग टिके रहे, उन्हें बाजार की मजबूती का फायदा मिला।

स्टीफन बताते हैं कि ट्रंप दौर के टैरिफ, वैश्विक विकास की सुस्ती और लगातार FII का पैसा निकलना घरेलू निवेशकों के मूड पर पड़ा। दोनों एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ग्लोबल संकेतों पर नजर रखें, लेकिन फैसला हमेशा लंबी अवधि के फंडामेंटल्स और सही एसेट एलोकेशन के आधार पर लें।

2026 में इन मानसिक जालों से रहें सावधान

आने वाले साल को लेकर दोनों विशेषज्ञ कुछ व्यवहारिक जोखिमों की चेतावनी देते हैं:

जल्दबाजी में फैसले लेना: स्टीफन का कहना है कि मुश्किल साल के बाद अगर पोर्टफोलियो में हड़बड़ी में बदलाव किए गए, तो फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।

भीड़ के साथ भागना: जैन मानते हैं कि धातुओं या नई-नई थीम्स में फिर से भीड़ दौड़ सकती है।

हाल की घटनाओं को ज्यादा तवज्जो देना: जैन के मुताबिक, अगर इक्विटी से कुछ समय तक कम रिटर्न मिले, तो निवेशक शेयर बाजार पर शक करने लगते हैं, जबकि असली फर्क अनुशासन से पड़ता है, न कि छोटी अवधि के प्रदर्शन से।

दोनों एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि शोर से दूर रहें, निवेश में अनुशासन बनाए रखें, पोर्टफोलियो में विविधता रखें और लंबे समय तक निवेशित बने रहें।

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First Published - December 29, 2025 | 3:33 PM IST

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