facebookmetapixel
Advertisement
व्यापार समझौतों से खुलेगा ‘विकसित भारत’ का रास्ता, ट्रंप टैरिफ के बीच अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूतीEditorial: 2070 तक नेट जीरो के लिए नीति आयोग का महाप्लानAmazon का नया कीर्तिमान: 2025 में प्राइम मेंबर्स को मिली सुपरफास्ट डिलिवरी, 55 करोड़ पैकेट पहुंचे घरIndia-US Trade डील पर बड़ा अपडेट: $500 अरब की खरीद योजना पर अमेरिका के बदले सुरकैंसर के इलाज में जाइडस को बड़ी राहत: SC ने ‘निवोलुमैब’ दवा की बिक्री पर रोक लगाने से किया इनकारभारत में दौड़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार: जनवरी में पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 54% उछलीSME IPO में धांधली पर SEBI सख्त: चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बाजार हेरफेर और गबन पर जताई चिंताशेयर बाजार पर भारी पड़ा सोना-चांदी, कीमती धातुओं के ETF में निवेश ने तोड़ा रिकॉर्ड; खुले 28 लाख खातेगेटवे टर्मिनल्स को बंबई हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ₹170 करोड़ की GST वसूली कार्रवाई पर लगी रोकदुनिया भर में बढ़ा भारतीय कंपनियों का दबदबा, जनवरी में विदेश में प्रत्यक्ष निवेश $3.42 अरब के पार

₹27,000 करोड़ के IPOs से विदेशी निवेश की उम्मीद, रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला

Advertisement

टाटा कैपिटल और LG इलेक्ट्रॉनिक्स के बड़े IPOs से शेयर बाजार में हलचल, रुपया बढ़त में खुला, डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर

Last Updated- October 06, 2025 | 10:03 AM IST
Rupee

सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि शेयर बाजार में विदेशी निवेश आने से रुपया मजबूत रहेगा। ब्लूमबर्ग के अनुसार, रुपया सोमवार को तीन पैसे की बढ़त के साथ 88.75 प्रति डॉलर पर खुला। हालांकि, इस साल अब तक रुपया 3.70% गिर चुका है, और पिछले सप्ताह यह इतिहास में सबसे कमजोर स्तर 88.80 तक पहुंच गया था।

IPO बाजार में हलचल:

टाटा कैपिटल सोमवार से अपने IPO के लिए ऑर्डर लेना शुरू करने वाला है, जिससे लगभग ₹15,512 करोड़ जुटाए जा सकते हैं। यह इस साल गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा IPO है। इसके बाद LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का IPO अगले दिन लॉन्च होगा, जिससे ₹11,600 करोड़ जुटेंगे। इस तरह, इस हफ्ते प्राइमरी मार्केट में कुल ₹27,000 करोड़ से अधिक के IPOs होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण:

Finrex Treasury Advisors LLP के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, पिछले एक साल में रुपया 5% से अधिक कमजोर हुआ है, जिसका कारण अमेरिकी नीतियों, व्यापार तनाव और वैश्विक अनिश्चितताएं हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर के लिए रुझान मजबूत है और RBI को जल्द ही 88.80 स्तर छोड़ना पड़ सकता है, जिससे मुद्रा आगे बढ़ सकती है। US-India व्यापार तनाव भी रुपया पर दबाव डाल रहा है और तब तक यह जारी रहेगा जब तक समाधान नहीं आता।

RBI की भूमिका:

हाल ही में हुई RBI की बैठक में भविष्य में दर कटौती को लेकर ‘dovish ’ रुख बनाए रखा गया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को स्थिर रखा और नीति को ‘न्यूट्रल’ बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि RBI रुपये के किसी खास स्तर को तय नहीं करता, बल्कि रुपया अचानक बहुत ज्यादा गिरने या बढ़ने से बचाने पर ध्यान देता है।

डॉलर और कमोडिटी की स्थिति:

डॉलर इंडेक्स अमेरिकी सरकार के संभावित शटडाउन की वजह से बढ़ गया। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 0.30% बढ़कर 98.01 हो गया। कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ीं। मिस्र में इजरायल और हमास के बीच इजरायली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों के आदान-प्रदान की चर्चा से ब्रेंट क्रूड 1.36% बढ़कर $65.41 प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.43% बढ़कर $61.75 प्रति बैरल हो गया।

Advertisement
First Published - October 6, 2025 | 10:03 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement