facebookmetapixel
Advertisement
Dividend Stocks: अगले हफ्ते खुलेगा कमाई का पिटारा, टाटा-महिंद्रा-बजाज समेत 46 कंपनियां बांटेगी डिविडेंडAIF Market: पश्चिम एशिया संकट थमने से वैकल्पिक निवेश फंडों में लौटी रौनक, HNIs का बढ़ा भरोसाभारतीय फिनटेक कंपनियों की नजर अब ग्लोबल मार्केट पर, स्ट्राइप-पेपाल की तर्ज पर दुनिया भर में लाइसेंस लेने की होड़इनवेस्को सहित कई फंड कंपनियों ने नए निवेश पर लगाई रोक, पर निवेशक गोल्ड ETF खरीदें, बेचें या होल्ड करें?EMI नहीं चुका पाने के चलते बैंक वाले उठा ले गए बाइक? जानिए क्या हैं आपके पास कानूनी अधिकारSME IPO में करने जा हैं निवेश? सिर्फ GMP देखकर न फंसें, नुकसान से बचने के लिए इन फैक्टर्स का भी रखें ध्यानग्रीन यूरिया को प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी, लागत का अंतर दूर करने के लिए सब्सिडी देगी सरकारराज्यों के पूंजीगत व्यय में आई सुस्ती, 20 राज्य ने दो महीने में खर्च किया बजट का सिर्फ 5.86% हिस्साCredit Card Market: नए कार्ड जारी करने में SBI Card रहा नंबर-1, मई में जोड़े रिकॉर्ड 1.81 लाख ग्राहकरिकॉर्ड स्तर पर पहुंची गेहूं की सरकारी खरीद, 357 लाख टन के पार पहुंचा आंकड़ा; पंजाब-एमपी अव्वल

काली मिर्च की कीमत में कटौती की संभावना

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 6:59 PM IST

दुनिया में मसाले का सबसे बड़ा उत्पादक वियतनाम काली मिर्च की कीमतों को कम कर सकता है। काली मिर्च की मांग में कमी के कारण इस गिरावट  की गुंजाइश हो रही है।


गौरतलब है कि पिछले 8-10 हफ्तों के दौरान वियतनाम में काली मिर्च व मसाले की कीमत काफी ऊंचे स्तर पर देखा गया।3975 डॉलर प्रतिटन के स्तर पर मौजूद एएसटीए ग्रेड की काली मिर्च की कीमत में 300-350डॉलर प्रतिटन तक की कटौती का अनुमान है। काली मिर्च की बिक्री बढ़ाने के लिए मूल्य में कटौती की रणनीति को उसकी बिक्री रणनीति में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।


जानकारों का मानना है कि देश में काली मिर्च का बड़ा भंडार होना, किसानों व व्यापारियों पर अपने स्टॉक की बिक्री के लिए दबाव डाल र हा है। जनवरी से मार्च के दौरान वियतनाम ने 15,000 टन काली मिर्च का निर्यात किया है जबकि उसके पास 60,000 से 65,000 टन काली मिर्च के भंडार होने का अनुमान है।


इस साल अब तक 80-85 फीसदी तक की पैदावार हो पाई है और जनवरी से मार्च के दौरान अपेक्षाकृत निर्यात के कम रहने से इस महीने के अंत तक इसके स्टॉक में थोड़ी  कमी आ सकती है। बिक्री की रणनीति में बदलाव लाये जाने की यह सबसे बड़ी वजह बताई जा  रही है। फिलहाल वहां महंगाई दर 12.5 फीसदी तक पहुंच चुकी है। जबकि बैंकों के ब्याज दरों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।


इस कारण वियतनाम के किसानों व व्यापारियों पर अपने भंडार को बेचने का भारी दबाव है। हालांकि पिछले वर्ष काली मिर्च की कीमत में बढ़ोतरी की गई थी। अप्रैल में वहां के अधिकतर लोन बैंकों को या तो लौटाना पड़ता है या उसका नवीनीकरण कराना होता है। अपने कर्जों को चुकाने के लिए वहां के व्यापारी व किसान अपने भंडारों को बेच देते हैं।


यह भी देखा गया है कि पिछले कुछ महीनों में कॉफी के व्यापारियों व निर्यातकों को निर्यात में 12.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो गया है। इसके चलते भी काली मिर्च के कारोबार से जुड़े लोगों पर भारी दबाव है।


दूसरी ओर अमेरिकी मंदी व यूरोपीय संघ के खरीदारों की इंतजार करो की रणनीति भी काली मिर्च की मांग में उल्लेखनीय कमी लाने में योगदान दे रही है। ब्राजील व इंडोनेशिया जैसे देश भी कम स्टॉक होने के बावजूद इसके कारोबार में निष्क्रिय रहे। एक अनुमान के मुताबिक अगले तीन महीनों में काली मिर्च की वैश्विक मांग 40,000 टन तक  पहुंच जाएगी।

Advertisement
First Published - April 2, 2008 | 11:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement