facebookmetapixel
Advertisement
शेयर बाजार की तरह फिल्मों में लगेगा पैसा! ₹22,000 करोड़ के सिनेमा बिजनेस में नए फंड्स की होगी एंट्रीदवाओं का आयात होगा आसान! सरकार बदलेगी 1945 का पुराना नियम, टेस्टिंग नियमों में ढील देने की तैयारीभारत में ‘मक्का क्रांति’ बहुत फायदेमंद, धान की जगह मक्के की खेती से पर्यावरण भी बचेगा व मुनाफा भी बढ़ेगाबॉन्ड मार्केट में फंड मैनेजर्स के अलग-अलग दांव: गिल्ट और डायनेमिक फंड्स में ड्यूरेशन को लेकर छिड़ी जंगरिकॉर्ड FII निकासी और ईरान संकट ने बढ़ाई टेंशन, चालू खाते का घाटा बढ़ने से रुपये पर भारी दबावEditorial: मॉनसून की सुस्त चाल ने बढ़ाई टेंशन, खेती और अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतराअयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, UP पुलिस ने 8 लोगों को किया गिरफ्तारAI पर दुनिया का महा-समझौता: भारत समेत 35 देशों ने मिलाया हाथ, अमेरिका की बड़ी पहल को मिला साथ‘विकसित भारत 2047 के लिए जिम्मेदारी से AI अपनाना जरूरी’, ICAI के मंच से PM मोदी का संदेशबंगाल सरकार का बड़ा फैसला: खत्म होगा शहरी भूमि सीमा अधिनियम, बड़े निवेश का रास्ता साफ

मंदी की मार से कमजोर हुई तेल की धार

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 7:02 PM IST

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका में कच्चे तेल के पर्याप्त भंडार की खबरों के चलते तेल की कीमतों में कमी का दौर जारी है।


इसका असर एशियाई बाजारों में भी देखने को मिला है। न्यू यॉर्क के प्रमुख ऑयल कान्ट्रैक्टर ने कच्चे तेल के लिए मई में जो सौदा किया है, उसके तहत कच्चे तेल कच्चे तेल की कीमतों में 3 सेंट से लेकर 0.62 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है। एक वक्त कच्चे तेल की कीमतें 102.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गई थीं। लंदन के ब्रेंट नॉर्थ में भी मई में तेल के वायदा कारोबार में 6 सेंट की कमी के चलते कीमत 99.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।


अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (एनर्जी इनफोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन, ईआईए) ने बताया कि 28 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 740 लाख बैरल बढ़कर 3192 लाख बैरल हो गया है। इसने विश्लेषकों के उस अनुमान को भी पीछे छोड़ दिया, जिसमें इसके 22.5 लाख बैरल तक बढ़ने का अंदाजा लगाया गया था।


ईआईए ने यह भी जानकारी दी कि अमेरिका में पेट्रोल या गैसोलीन के स्टॉक में भी पिछले सप्ताह 45 लाख बैरल की कमी आई है। जबकि बाजार के जानकार इसमें केवल 25 लाख बैरल की कमी का अंदाजा लगाए हुए थे। सकडेन के विश्लेषक रॉबर्ट मांटेफ्यूस्को ने इस बाबत कहा, ‘कच्चे तेल के स्टॉक को बढ़ाने में हम कामयाब रहे हैं, लेकिन हमें गैसोलीन के गिरते स्टॉक की ओर भी देखना होगा।’


गौरतलब है कि अमेरिका की गैसोलीन वाली रिपोर्ट के चलते ही एशियाई बाजारों में तेल की कीमतें आसमान की ओर ताकने लगी थीं। अब जाकर इसमें कुछ राहत मिली है। इस मामले में सिंगापुर के पुरविन एंड गेर्ट्ज के प्रमुख विक्टर शूम का कहना है कि पिछले दिन कीमतों में अभूतपूर्व बदलाव बाजार की अतिप्रतिक्रिया के चलते ही आए हैं।


वैसे अमेरिकी फे डरल रिजर्व के चेयरमैन बेन बर्नान्के कारोबारियों को चेता चुके हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को साल की पहली छमाही में मंदी की मार झेलनी पड़ सकती है।

Advertisement
First Published - April 4, 2008 | 12:06 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement