facebookmetapixel
Market Outlook: इस हफ्ते बाजार में रुझान तय करेंगे मैक्रो डेटा और FII ट्रेडिंगUS Venezuela Attack: कौन हैं Nicolás Maduro? जिनके पकड़े जाने का दावा अमेरिका ने कियाWeather Update Today: उत्तर भारत में ठंड और घने कोहरे का कहर, IMD ने जारी की चेतावनीUP: लखनऊ में बनेगी AI सिटी, उत्तर प्रदेश को मिलेगा ग्लोबल टेक पहचानHealth Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?Credit Card Tips: बिल टाइम पर चुकाया, फिर भी गिरा CIBIL? ये है चुपचाप स्कोर घटाने वाला नंबर!आस्था का महासैलाब: पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ माघ मेला, 19 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी2026 में हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, एक झटका बदल देगा सब कुछ…रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर चेताया

मसूर का शीर्ष उत्पादक बनने की राह पर भारत

अधिकारियों ने बताया कि मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अधिक इजाफा किया गया है। वर्ष 2020-21 में मसूर का समर्थन मूल्य 5100 रुपये प्रति क्विंटल था।

Last Updated- January 12, 2024 | 11:47 PM IST
Dal

उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने आज कहा कि भारत विश्व में मसूर दाल का सबसे बड़ा उत्पादक बनने की राह पर है। फसल वर्ष 2023-24 में मसूर का उत्पादन बढ़कर करीब 16 लाख टन होने का अनुमान है।

अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो 2023-24 में भारत का मसूर उत्पादन 2017-18 के बाद सर्वाधिक होगा। वर्ष 2017-18 में मसूर का घरेलू उत्पादन करीब 16.2 लाख टन था।

सिंह ने कहा, ‘विश्वास है कि हमारा इस साल विश्व में मसूर उत्पादन सर्वाधिक होगा।’ सिंह ने फरवरी में भारत में आयोजित की जाने वाले वैश्विक दाल संगोष्ठी (जीपीसी) के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

अधिकारियों ने बताया कि मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अधिक इजाफा किया गया है। वर्ष 2020-21 में मसूर का समर्थन मूल्य 5100 रुपये प्रति क्विंटल था। इसे 2024-25 (विपणन वर्ष) के लिए 26 प्रतिशत बढ़ाकर 6425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया।

इससे किसानों की रुचि मसूर की खेती में फिर से बढ़ी। अभी मसूर का मार्केट मूल्य करीब 6100 से 6125 रुपये प्रति क्विंटल है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम है। हालांकि कुछ महीने पहले मसूर का मूल्य 7500-8000 रुपये प्रति क्विंटल था। इससे भी किसान मसूर की फसल लगाने के लिए प्रेरित हुए होंगे।

5 जनवरी तक मसूर की फसल 19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई थी। यह बीते साल की तुलना में 4.40 प्रतिशत अधिक थी। कारोबार के सूत्रों के अनुसार कनाडा ने शुरुआती दौर में करीब 16.7 लाख टन उत्पादन का अनुमान जताया था। लिहाजा कनाडा ने भारत से अधिक उत्पादन का अनुमान जताया था।

लेकिन बाद में कनाडा ने अनुमान 30 प्रतिशत घटा दिया था। इससे भारत पहले स्थान पर आ गया। वैश्विक बाजार में ऑस्ट्रेलिया भी प्रमुख उत्पादक देश है। वर्ष 2023-24 में ऑस्ट्रेलिया का मसूर उत्पादन 14 लाख टन होने का अनुमान है। कनाडा से हाल में राजनयिक विवाद के दौरान भारत के लिए मसूर प्रमुख दाल बनकर उभरी।

First Published - January 12, 2024 | 11:38 PM IST

संबंधित पोस्ट