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Gold Price: सोने में आ सकती है 8-10% गिरावट, बढ़ती कीमतों के बीच एक्सपर्ट ने किया आगाह

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Gold Price: सोने ने रिकॉर्ड स्तर को छुआ, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं: अगले दौर में 8-10% गिरावट संभव

Last Updated- September 24, 2025 | 3:27 PM IST
Gold all time high
Representative Image

Gold Price: इस सप्ताह लगातार दो दिन रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद आज (24 सितंबर) तीसरे दिन सोना और चांदी के भाव में गिरावट देखने को मिली। बुधवार सुबह घरेलू बाजार में सोने का भाव 1,13,500 रुपये, जबकि चांदी का भाव 1,34,600 रुपये के करीब था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी के वायदा भाव कमजोर रहे।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 336 रुपये की गिरावट के साथ 1,13,500 रुपये पर खुला। पिछला बंद भाव 1,13,836 रुपये था। खबर लिखे जाने के समय यह कॉन्ट्रैक्ट 366 रुपये की गिरावट के साथ 1,13,470 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन का उच्च स्तर 1,13,838 रुपये और निचला 1,13,253 रुपये रहा। इस सप्ताह सोने ने 1,14,179 रुपये का सर्वोच्च स्तर भी छुआ।

Also Read:  Gold-Silver Price Today: ऑल टाइम हाई के बाद सोना-चांदी की चमक फीकी; अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट

विशेषज्ञ की सलाह: निवेशक रहें सतर्क, 8-10% गिरावट संभव

अजय केडिया, डायरेक्टर, केडिया एडवाइजरी के अनुसार, सोने को मजबूत मैक्रो और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद ने सोने की मांग बढ़ाई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व गवर्नर स्टीफन मिरान ने चेतावनी दी है कि मौजूदा नीतियां बहुत कड़ी हैं और इससे रोजगार पर असर पड़ सकता है। CME FedWatch टूल के मुताबिक, अक्टूबर में 90% और दिसंबर में 73% संभावना है कि अमेरिका ब्याज दर घटाएगा।

भू-राजनीतिक तनावों ने भी सोने को सपोर्ट किया। NATO ने रूस द्वारा एस्टोनिया की हवाई सीमा का उल्लंघन करने पर कार्रवाई का वादा किया। इसके अलावा, ETF में निवेश पिछले तीन साल में सबसे अधिक हुआ, जिससे संस्थागत मांग भी बढ़ी। केंद्रीय बैंकों ने भी सोना खरीदना फिर से शुरू किया है और इस साल अब तक 63 टन सोना जोड़ा गया।

ब्रिटेन में मौसमी कमजोर मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, वहीं भारत में त्योहारों के दौरान मांग है लेकिन बढ़ी हुई कीमतों के कारण सीमित है। चीन में अगस्त महीने में सोने का आयात 3.4% घटकर 97.58 मीट्रिक टन रह गया, जिससे फिजिकल डिमांड थोड़ी नरम दिख रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती, ETF निवेश, केंद्रीय बैंक की खरीद और भू-राजनीतिक तनावों ने सोने को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया है। पिछले एक साल में सोने की कीमत में लगभग 50% की तेजी रही। रुपये की कमजोरी ने भी सोने को मजबूती दी।

हालांकि, आगे जोखिम भरे माहौल और तकनीकी सुधार को देखते हुए, सोने में 8-10% की गिरावट या समय आधारित सुधार हो सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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First Published - September 24, 2025 | 3:27 PM IST

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