उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) उद्योग को सीमेंट निर्माण में इस्तेमाल नहीं हुए जिप्सम की मात्रा को कम करने और इसके निर्बाध परिवहन को बढ़ावा देने में मदद कर रहा है। विभाग ने उर्वरक इकाइयों और ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले जिप्सम के महत्तम इस्तेमाल के लिए एक रिपोर्ट तैयार की है।
इसमें इसके लिए एक समयबद्ध कार्रवाई योजना तय की गई है। जिप्सम के संदर्भ में महत्तम इस्तेमाल का आशय ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देना है जो जिप्सम सामग्री का पूरे जीवन चक्र में सतत, पुन: इस्तेमाल और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देते हैं।
वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत में उर्वरक इकाइयों से फॉस्फो-जिप्सम उत्पादन 91.6 लाख टन रहने का अनुमान है। फॉस्फोरिक एसिड संयंत्रों के पास विभिन्न स्थानों पर रखे गए फॉस्फो-जिप्सम का कुल पुराना भंडार सात करोड़ टन है। इनमें से 96.5 प्रतिशत देश के पूर्वी तट पर भंडारित है।
भारतीय सीमेंट उद्योग जिप्सम का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। जिप्सम की उसकी सालाना जरूरत 1.95 करोड़ टन की है। खेती में जिप्सम का इस्तेमाल उर्वरक के रूप में किया जाता है। जिप्सम के महत्तम इस्तेमाल पर डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव संजीव की अध्यक्षता में 29 मई को बैठक हुई थी जिसमें इस बारे में प्रगति की समीक्षा की गई।