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Dhanteras 2025: रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद धनतेरस सोने की सबसे बड़ी खरीदारी का दिन क्यों बना हुआ है?

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जब सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, तब भी भारतीय परिवार धनतेरस पर बड़ी खरीदारी कर रहे हैं, जो दिखाता है कि आस्था और आर्थिक समझ मिलकर त्योहारी खरीदारी को आकार दे रहे हैं

Last Updated- October 18, 2025 | 1:33 PM IST
Gold and Silver rate Today
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

धनतेरस भारतीय घरों के लिए एक खास रिवाज और आर्थिक संकेत दोनों है। हर त्योहारी सीजन में, जब घरों में दीये जलते हैं और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए सफाई होती है, कई परिवार एक जरूरी खरीदारी भी करते हैं। इसमें सोना या कोई दूसरी धातु शामिल है, जो घर में बरकत लाए और साथ ही आसानी से बेची जा सकने वाली संपत्ति के रूप में भी काम आए। भक्ति और निवेश का ये अनोखा मेल धनतेरस को ज्वैलर्स, सोना-चांदी के व्यापारियों और उपभोक्ता मांग पर नजर रखने वाले अर्थशास्त्रियों के लिए सबसे अहम दिन बनाता है।

पिछले साल धनतेरस पर कितना सोना खरीदा गया?

धनतेरस की खरीदारी हमें ये समझने का शानदार मौका देता है कि कीमत, आदत और आसान बिक्री कैसे एक-दूसरे से जुड़े हैं। ट्रेड संगठनों के मुताबिक, पिछले साल धनतेरस पर सोने की खरीदारी करीब 20,000 करोड़ रुपये की हुई। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने अनुमान लगाया कि त्योहारी सीजन में कुल रिटेल कारोबार करीब 60,000 करोड़ रुपये का था, जिसमें से 20,000 करोड़ रुपये की खरीदारी सोने से जुड़ी थी। कुछ इंडस्ट्री ट्रैकर्स और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धनतेरस के दिन सोने की बिक्री की मात्रा 20-35 टन के बीच रही।

2022 के बाद जबरदस्त तेजी

पिछले साल की तुलना में 2022 से अब तक की तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2024 में भारत में सोने के गहनों की मांग करीब 563.4 टन रही, जो वजन के हिसाब से थोड़ी कम थी, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से रुपये में इसकी वैल्यू काफी बढ़ गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 2024 की पूरी साल की रिपोर्ट में ये बात सामने आई कि वैश्विक स्तर पर भी यही ट्रेंड रहा, ऊंची कीमतों ने गहनों की मांग को वजन के हिसाब से कम किया, लेकिन हर ग्राम की कीमत बढ़ने से कुल खर्च बढ़ गया।

भारत में, निवेश और अन्य मांगों को मिलाकर 2024 में सोने की कुल मांग करीब 802.8 टन रही।

Also Read: Dhanteras 2025: सोने-चांदी के सिक्कों और बार की मांग में उछाल, धनतेरस पर बाजार में ग्राहकों की भीड़

सस्ते विकल्प की ओर बढ़ता रुझान

इन आंकड़ों के पीछे की कहानी साफ है। 2024 में जब सोने की कीमतें आसमान छू रही थीं, धनतेरस पर खरीदारों ने अपनी पसंद बदली। रिटेल रिपोर्ट्स और ज्वैलर्स के इंटरव्यू से पता चला कि वजन के हिसाब से बिक्री में 10-20 फीसदी की कमी आई, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से रुपये में कारोबार कुछ मौकों पर बढ़ गया। खरीदारों ने भारी और बड़े गहनों की जगह छोटे सिक्के और हल्के डिजाइन चुने। ज्वैलर्स ने भी ग्राहकों को लुभाने के लिए मेकिंग चार्ज पर छूट और EMI स्कीम जैसे ऑफर दिए।

इस दौरान चांदी की मांग भी बढ़ी, क्योंकि ये सोने के मुकाबले सस्ता विकल्प था।

धनतेरस पर सोना खरीदना क्यों जरूरी है?

ऊंची कीमतों के बावजूद लोग धनतेरस पर सोना क्यों खरीदते हैं? इसका जवाब है संस्कृति और जरूरत का मेल।

संस्कृति के हिसाब से, धनतेरस पर कीमती धातु खरीदना सदियों पुरानी परंपरा है, जो शुभता, शादी, तोहफे और पारिवारिक संपत्ति से जुड़ी है। वहीं, प्रैक्टिकल तौर पर, सोना एक ऐसी संपत्ति है जिसे आसानी से बेचा या गिरवी रखा जा सकता है। कई भारतीय परिवारों के लिए, धनतेरस पर खरीदा गया एक छोटा सा सोने का सिक्का मुश्किल वक्त में काम आ सकता है, खासकर जब वित्तीय बाजार अनिश्चित हों। इंडस्ट्री डेटा बार-बार दिखाता है कि शादी और त्योहार भारत में गहनों की मांग के सबसे बड़े कारण हैं, भले ही खरीदारी का तरीका बदल रहा हो।

हाल के सालों में धनतेरस की खरीदारी का रुझान

2022 के बाद दो बड़े रुझान देखने को मिले हैं: वजन में कमी और रुपये में स्थिरता। परिवार अब प्रति खरीदारी कम ग्राम सोना खरीद रहे हैं, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से कुल खर्च बढ़ रहा है। साथ ही, लोग सिक्कों, बार्स और हल्के गहनों की ओर बढ़ रहे हैं। इसका असर ज्वैलर्स (जो इन्वेंट्री, मेकिंग चार्ज और डिजाइन का बैलेंस बनाते हैं), आयात और व्यापार नीतियों (जो सप्लाई और प्रीमियम को प्रभावित करती हैं), और नीति-निर्माताओं (जो मौसमी मांग को घरेलू मूड का संकेतक मानते हैं) पर पड़ता है।

इस साल का अनुमान

इस साल, जब सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं और 1,27,000 रुपये को पार कर चुकी हैं, धनतेरस पर खरीदारी का जोश बरकरार रहने की उम्मीद है। फिर भी, जैसे-जैसे ये त्योहार अपनी सांस्कृतिक अहमियत बनाए रखता है, मांग का रुझान कम कैरेट वाले सोने या छोटी मात्रा की खरीदारी की ओर बढ़ सकता है।

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First Published - October 18, 2025 | 1:32 PM IST

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