facebookmetapixel
Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?Credit Card Tips: बिल टाइम पर चुकाया, फिर भी गिरा CIBIL? ये है चुपचाप स्कोर घटाने वाला नंबर!आस्था का महासैलाब: पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ माघ मेला, 19 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी2026 में हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, एक झटका बदल देगा सब कुछ…रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर चेतायाKotak Mahindra Bank का निवेशकों को जबरदस्त तोहफा: 1:5 में होगा स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सकनाडा ने एयर इंडिया को दी कड़ी चेतावनी, नियम तोड़ने पर उड़ान दस्तावेज रद्द हो सकते हैंट्रंप का दावा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी गिरफ्त में; हवाई हमलों की भी पुष्टि कीHome Loan: होम लोन लेने से पहले ये गलतियां न करें, वरना एप्लीकेशन हो सकती है रिजेक्ट

तेल की बढ़ रही कीमतों से महंगे होंगे कपड़े!

Last Updated- December 07, 2022 | 12:42 PM IST

तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ गाड़ियों पर ही नहीं पड़ रहा है। आए दिनों पॉलिएस्टर की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। मालूम हो कि पॉलिएस्टर कच्चे तेल का बाय-प्रोडक्ट होता है।


जाहिर सी बात है कि कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं और इसका असर पॉलिएस्टर से बने कपड़ों पर पड़ना स्वाभाविक है। पॉलिएस्टर और कपास की कीमतों में इन कुछ महीने में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। सुशांत थ्रेड मिल, नई दिल्ली के प्रबंधक आशुतोष चोपड़ा ने कहा कि मार्च के शुरूआती महीने में जिस पॉलिएस्टर के  कपड़े की कीमत 63 रुपये किलो था, उसके दाम अब बढ़कर 84 रुपये प्रति किलो हो गया है।

इसी तरह की बढ़ोतरी कपास में भी हुई है। मार्च में कपास की कीमत 65 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 74 रुपये पर पहुंच गया है। जाहिर सी बात है कि इस तरह अगर इन धागों के कच्चे माल की कीमतें बढ़ती गई, तो कब तक कंपनियां इन बोझों को झेलती रहेगी। हालांकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर कम करने के लिए सरकार ने जून महीने से पॉलिएस्टर पर से आयात शुल्क पूरी तरह से हटा दिया था, लेकिन इसके बावजूद पॉलिएस्टर पर आज भी आबकारी शुल्क लगती है। पूरे वस्त्र उद्योग का एक चौथाई हिस्सा पॉलिएस्टर पर निर्भर है।

श्रमन जी फैब्रिक्स प्राइवेट लि. के मुख्य कार्यकारी प्रेम सागर जैन ने कहा कि आजकल माल ढुलाई खर्च भी महंगी हो गई है। अगर कीमतों में ऐसी बढाेतरी होती रही, तो वस्त्र उद्योग रेडिमेड कपड़ों की कीमतें बढा सकती है। इस तरह से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अब कपड़े भी महंगे हो जाएंगे। वस्त्र उद्योग ने सरकार से यह मांग की है कि पॉलिएस्टर आयात पर लगने वाली 8 फीसदी आबकारी शुल्क को घटाकर 4 फीसदी किया जाए। इसके अलावा उनकी मांग है कि इस पर लग रहे सीमा शुल्क को भी हटा लिया जाए।

पॉलिएस्टर धागे बनाने वाली मिल पशुपति स्पीनिंग एंड वीविंग मिल्स प्राइवेट लि., दिल्ली के प्रबंधक राकेश आहूजा ने बताया कि हालांकि लोग सूती कपड़ों को ज्यादा तरजीह देते हैं, लेकिन पॉलिएस्टर का बाजार भी कम बडा नहीं है। लगभग 100 से ज्यादा छोटे और मझोले उपक्रम पॉलिएस्टर फाइबर और पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न बनाती है। लेकिन इस बाजार में भी चीनी पॉलिएस्टर की आजकल भरमार हो गई है। चीनी पॉलिएस्टर की कीमत भी सस्ती होती है और जाहिर सी बात है कि इससे भारतीय पॉलिएस्टर बाजार को कड़ी प्रतिस्पर्धा से गुजरना होता है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ तो पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ रही है, ढुलाई खर्च बढ रही है और दूसरी तरफ चीनी पॉलिएस्टर का बाजार भी यहां पैर पसार रहा है। इसलिए यहां के वस्त्र उद्योगों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें पिछले सप्ताह 147 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। आगे भी अनुमान लगाया जा रहा है।

First Published - July 21, 2008 | 10:29 PM IST

संबंधित पोस्ट