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देसी सीमेंट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में सेंध

Last Updated- December 07, 2022 | 8:08 PM IST

पड़ोसी देश पाकिस्तान से होने वाले सीमेंट का आयात देसी सीमेंट कंपनियों पर भारी पड़ने लगा है।


आयातित सीमेंट देसी बाजार में उपलब्ध सीमेंट से सस्ता होने के कारण देसी कंपनियां अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवाने लगे हैं। बड़ी सीमेंट कंपनियां मसलन एसीसी, अंबुजा सीमेंट और ग्रासिम इसी आयातित सीमेंट के कारण अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवा रहे हैं।

अकेले पंजाब में प्रति माह करीब 5.6 लाख टन सीमेंट की खपत होती है और इसका 10 फीसदी आयातित सीमेंट पूरा कर रहा है। मुख्य रूप से अमृतसर, जालंधर और लुधियाना आयातित सीमेंट से पट सा गया है और यही बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

पाकिस्तान से नजदीक होने की वजह से पंजाब में आयातित सीमेंट की बहुतायत हो गई है। पाकिस्तान रेल और सड़क मार्ग से वाघा बॉर्डर के जरिए पंजाब को सीमेंट का निर्यात कर रहा है। पंजाब की कुल जरूरतों के 70 फीसदी की सप्लाई यही तीनों कंपनियां करती हैं। पंजाब में आयातित सीमेंट 200 रुपये (प्रति 50 किलोग्राम) पड़ता है जबकि देसी कंपनियों के सीमेंट की कीमत 235 रुपये है।

35 रुपये का ये फासला मूल रूप से कस्टम डयूटी और काउंटरवेलिंग डयूटी में छूट की वजह से है। पिछले साल सरकार ने इस पर छूट दी थी। जनवरी 2007 में सरकार ने सीमेंट आयात पर डयूटी घटाकर जीरो कर दिया था और अप्रैल में 16 फीसदी की काउंटरवेलिंग डयूटी भी समाप्त कर दी गई थी ताकि सीमेंट का आयात बढ़े और घरेलू बाजार में सीमेंट की उपलब्धता सुनिश्चित हो।

इसके अलावा सरकार ने 4 फीसदी की स्पेशल कस्टम डयूटी भी समाप्त कर दी थी। सितंबर 2007 से लेकर अब तक पाकिस्तान कुल 10 लाख टन सीमेंट का निर्यात कर चुका है। रीयल एस्टेट की अग्रणी कंपनी एम्मार एमजीएफ बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए पाकिस्तानी सीमेंट का इस्तेमाल काफी मात्रा में कर रही है।

अंबुजा सीमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर ए. एल. कपूर ने कहा – सीमेंट का आयात लगातार बढ़ रहा है। हम प्रतियोगिता के लिए तैयार हैं, पर हमें समान अवसर दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि पंजाब राज्य में अंबुजा सीमेंट की बाजार हिस्सेदारी करीब  25 फीसदी है।

पाकिस्तान कम कीमत पर सीमेंट की सप्लाई इसलिए कर पा रहा है क्योंकि यह डयूटी फ्री है जबकि भारतीय सीमेंट पर 12 फीसदी का उत्पाद कर और 4 फीसदी का वैट लगता है। एसीसी सीमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का मकसद बढ़ती कीमतों को काबू में करने का है, लेकिन यह मुमकिन नहीं हो पा रहा।

उत्तर भारत में सीमेंट की कीमतों में आई नरमी मुख्य रूप से बारिश की वजह से मांग में आई कमी के कारण और कपैसिटी विस्तार से आई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सीमेंट के आयात की वजह से राज्य सरकार को करीब 120 रुपये प्रति टन का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

First Published - September 8, 2008 | 11:31 PM IST

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