facebookmetapixel
Advertisement
IT डिपार्टमेंट ने ‘स्वैपिंग प्रोविजन्स’ के लिए 20,000 ITRs को किया फ्लैग: जानें अब आपके पास क्या है रास्ताEPFO की EDLI स्कीम: कर्मचारियों को मिलता है ₹7 लाख तक का फ्री लाइफ इंश्योरेंस, ऐसे कर सकते हैं क्लेमअगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी जानकारीनिवेशक दें ध्यान! अगले हफ्ते कजारिया सेरामिक्स समेत ये 3 कंपनियां करेंगी शेयर बायबैक, जानें पूरी डिटेलDividend Stocks: अगले हफ्ते खुलेगा कमाई का पिटारा, टाटा-महिंद्रा-बजाज समेत 46 कंपनियां बांटेगी डिविडेंडAIF Market: पश्चिम एशिया संकट थमने से वैकल्पिक निवेश फंडों में लौटी रौनक, HNIs का बढ़ा भरोसाभारतीय फिनटेक कंपनियों की नजर अब ग्लोबल मार्केट पर, स्ट्राइप-पेपाल की तर्ज पर दुनिया भर में लाइसेंस लेने की होड़इनवेस्को सहित कई फंड कंपनियों ने नए निवेश पर लगाई रोक, पर निवेशक गोल्ड ETF खरीदें, बेचें या होल्ड करें?EMI नहीं चुका पाने के चलते बैंक वाले उठा ले गए बाइक? जानिए क्या हैं आपके पास कानूनी अधिकारSME IPO में करने जा हैं निवेश? सिर्फ GMP देखकर न फंसें, नुकसान से बचने के लिए इन फैक्टर्स का भी रखें ध्यान

पूर्व वित्त आयुक्त, रेलवे

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:20 PM IST


इस साल रेल मंत्री ने रेलवे बजट की एक स्वस्थ तस्वीर पेश की है। उन्होंने इस बजट में जहां एक ओर उम्मीद से ज्यादा बचत की बात की वहीं दूसरी ओर बेहतर परिचालन अनुपात को भी सामने रखा। साथ ही उन्होंने इस बजट में ज्यादा माल ढुलाई की भी परियोजना को प्रस्तुत किया। ठीक इसी समय उन्होंने रेल यात्रियों के किराये में कटौती व नरमी लाने को भी कहा है। इसके अलावा, वह इस रेल बजट में कुलियों के लिए भी खुशियों की सौगात लाए हैं। रेल मंत्री ने अपने बजट में कुलियों की ग्रुप-डी कर्मचारी के रुप में नियुक्ति की बात कही है।
हालांकि इस साल के लोकलुभावन बजट के बावजूद इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है कि रेलवे में आम कामकाज पर खर्च होने वाली रकम 42,000 करोड़ से बढ़ कर लगभग 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस बात की भी पूरी संभावना है कि छठे वेतन आयोग के आ जाने के बाद अतिरिक्त सात से आठ करोड़ रुपये का खर्च बढ़ जाएगा। यहां तक परिचालन अनुपात 76 फीसदी से बढ़कर 81 फीसदी हो गया है। यह भारी बढ़ोतरी है और इससे रेलवे की ढुलाई क्षमता पर काफी सवाल खड़े होते हैं। इसके  अलावा बुनियादी ढांचे में कारगर निवेश पर भी सवालिया निशान लगते हैं।
आइये, यात्रियों को दी गई रियायतों पर फिर से बात करें। रेल मंत्री को यह स्पष्ट बताना चाहिए था कि इन रियायतों का क्या मतलब है। उदाहरण के लिए कोच सेवाओं पर कितना घाटा हो रहा है और रेलवे का समूचा वित्त क्या है? यूं कहिए की घाटा 6700-7000 करोड़ रुपये के करीब होगा और बजट अनुमान बढ़ गया है तो वैसे में क्रास सब्सिडी शुरू हो जाएंगे।
तो फिर इन सब रियायतों का बोझ उठाने की रेलवे की कितनी क्षमता है और बुनियादी ढांचे पर वह जो खर्च करेगा, उसका कितना असर होगा। उदाहरण के लिए जर्जर मौजूदा पटरियों पर डिब्बों का अधिकतम इस्तेमाल हो रहा है। अब इसमें और सुधार तभी हो पाएगा, जब पटरियों पर और पैसा झोंका जाए। उम्मीद की जानी चाहिए कि पूर्व और पश्चिम के बीच का माल गलियारा जल्दी ही लाभ देने लगेगा। लेकिन इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपये निवेश की दरकार है। बजट में यह नहीं बताया गया है कि पैसा आएगा कहां से। रेलवे में पेंशन की मदमय खर्चा लगातार बढ़ रहा है और यह बढ़ता जाएगा। इस बारे में क्या किसी ने कुछ सोचा है।
दो साल पहले इन्हीं रेल मंत्री अपने भाषण में रेलवे की लेखा परिपाटी को आधुनिक बनाने की बात की थी। पर अभी तक इस दिशा में कुछ नहीं किया गया है। रेलवे में जिस बात से सबसे बड़ा फर्क आएगा, वह है गैर-इंजीनियरिंग का आधुनिकीकरण। बहरहाल, फिर भी सब कुछ ठीक-ठाक। चुनावी साल का रेल बजट मुबारक।

Advertisement
First Published - February 26, 2008 | 8:50 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement