वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की, जो जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत है। ऑपरेशन सिंदूर के कुछ ही महीनों के भीतर और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को जारी रखने के उद्देश्य से सरकार ने रक्षा खर्च में वृद्धि की है। हालांकि वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान (7.33 लाख करोड़ रुपये) की तुलना में वृद्धि लगभग 7 प्रतिशत है, वहीं वित्त वर्ष 2027 का बजट अनुमान (बीई) वित्त वर्ष 26 के बीई की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
पिछले वर्ष रक्षा बजट का कुल आवंटन 6.81 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में लगभग 6.22 लाख करोड़ रुपये और उससे पिछले वर्ष 5.94 लाख करोड़ रुपये था। 2025-26 के बजट में रक्षा व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 1.9 प्रतिशत के आसपास रहा। 2020-21 में यह 2.4 प्रतिशत था, जो 2024-25 में घटकर 1.9 प्रतिशत हो गया।
सीतारमण की घोषणाओं के बाद रक्षा मंत्रालय ने एक मीडिया विज्ञप्ति में कहा कि सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण इस बजट का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत के लिए आधुनिकीकरण बजट में भारी वृद्धि एक रणनीतिक अनिवार्यता है।
पूंजीगत परिव्यय के तहत लगभग 2.19 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 1.85 लाख करोड़ रुपये केवल खरीद के लिए रखे गए हैं जो 2025-26 के पूंजीगत खरीद बजट (बीई के अनुसार) से 24 प्रतिशत अधिक है। खरीद में अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, स्मार्ट और घातक हथियार, जहाज और पनडुब्बियां, तथा मानवरहित हवाई वाहन और ड्रोन शामिल हैं। 1.39 लाख करोड़ रुपये, जो आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत है, घरेलू उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किए गए हैं। रक्षा मंत्रालय ने 2021 में निर्णय लिया था कि आधुनिकीकरण बजट का एक बड़ा हिस्सा घरेलू स्रोतों से पूंजीगत खरीद के लिए अलग रखा जाएगा, और इस हिस्से का एक भाग भारतीय निजी कंपनियों से अधिग्रहण के लिए भी रखा जाएगा।
वित्त वर्ष 2026 के बजट में भी, आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत यानी 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रारंभिक चरण में घरेलू स्रोतों से खरीद के लिए निर्धारित की गई थी। वित्त वर्ष 2027 के लिए यह आवंटन वित्त वर्ष 2026 के प्रारंभिक चरण की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।
वित्त वर्ष 2027 के पूंजीगत परिव्यय के विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे अधिक आवंटन ‘अन्य उपकरण’ के अंतर्गत 82,217.82 करोड़ रुपये का किया गया, इसके बाद ‘विमान और एरोइंजन’ के अंतर्गत 63,733.94 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ। यह वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमानों के आवंटन के विपरीत है, जिसमें विमान और एरोइंजन 72,780.15 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर थे, जो कि 48,614.06 करोड़ रुपये से 49 प्रतिशत अधिक है। लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन (सेवानिवृत्त) ने कहा, ‘अगर पूंजीगत व्यय को देखें तो यह रक्षा बजट अच्छा है, लेकिन हमें देखना होगा कि क्या सरकार 2027-28 में रक्षा खर्च को 2 प्रतिशत या उससे अधिक बनाए रख पाएगी।’
अपने भाषण में, सीतारमण ने कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) अनुप्रयोगों सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां प्रशासन को कई गुना बेहतर कर सकती है। भारत इस महीने के मध्य में एक अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। लेकिन इस बजट में रक्षा क्षेत्र में एआई पर अलग से खर्च का कोई जिक्र नहीं है। जबकि अमेरिका और चीन रक्षा क्षेत्र में एआई पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं। नरसिम्हन ने कहा कि एआई को नागरिक-सैन्य विलय के माध्यम से लागू किया जाएगा, और सशस्त्र बल इसके अनुकूल हो जाएंगे।
सीतारमण ने रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा आयातित कुछ महत्त्वपूर्ण खनिजों और विमान के पुर्जों के निर्माण या विमान के पुर्जों या इंजनों के रखरखाव, मरम्मत या ओवरहालिंग के लिए उपयोग होने वाले कच्चे माल पर सीमा शुल्क में कमी और उसे हटाने की भी घोषणा की। इससे इनपुट लागत कम होगी, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। नरसिम्हन ने कहा कि इन उपायों का रक्षा क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के लिए बजट आवंटन वित्त वर्ष 2026 में 26,816.82 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के विशेष केंद्र में पढ़ाने वाले लक्ष्मण कुमार बेहड़ा ने कहा, ‘केंद्रीय बजट में जीडीपी के 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका मतलब है कि रक्षा बजट में वृद्धि (15 प्रतिशत) अच्छी बात है।’ उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का असर हुआ है, लेकिन रक्षा बजट से पता चलता है कि सरकार सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को गंभीरता से ले रही है।