facebookmetapixel
Advertisement
Neysa जुटा रही 1.2 अरब डॉलर, एआई क्रांति को मिलेगा नया जोरStock Market Today: गिफ्ट निफ्टी से सपाट संकेत, हफ्ते के पहले दिन कैसी रहेगी बाजार की चाल?को-वर्क एआई ने बढ़ाई उत्पादकता, लेकिन सेवा कंपनियों का काम बरकरारAI Impact Summit 2026: भारत बनेगा भरोसेमंद एआई पार्टनरकिसानों और स्टॉक को देखते हुए सरकार ने निर्यात में ढील दीStocks To Watch Today: IPO से लेकर फाइनेंशियल्स तक, इन कंपनियों के शेयर रहेंगे निवेशकों की रडार परबांग्लादेश में नई सरकार का आगाज: तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे ओम बिरलाBudget 2026 पर PM का भरोसा: ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ वाली मजबूरी खत्म, यह ‘हम तैयार हैं’ वाला क्षण9 मार्च को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी चर्चाIndia AI Impact Summit 2026: दिल्ली में जुटेगा दुनिया का दिग्गज टेक नेतृत्व, $100 अरब के निवेश की उम्मीद

Budget 2023: रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए इंसेंटिव चाहता है फार्मा सेक्टर

Advertisement
Last Updated- January 19, 2023 | 4:31 PM IST
Empagliflozin

फार्मा उद्योग के विभिन्न संगठनों ने उम्मीद जताई है कि आगामी आम बजट में सरकार नवोन्मेषण के साथ शोध एवं विकास पर ध्यान देते हुए क्षेत्र के लिए नियमनों के सरलीकरण के लिए कदम उठाएगी।

आगामी बजट में उद्योग की अपेक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए भारतीय फार्मास्युटिकल गठबंधन (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि घरलू फार्मा उद्योग का आकार फिलहाल 50 अरब डॉलर का है और इसके 2030 तक 130 अरब डॉलर, जबकि 2047 तक 450 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘इस लक्ष्य को पाने के लिए आम बजट 2023-24 नवाचार और शोध एवं विकास को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए, जिससे फार्मा उद्योग को आगे बढ़ने के लिए गति मिल सके।” आईपीए सनफार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब, अरविंदो फार्मा, सिप्ला, ल्यूपिन और ग्लेनमार्क समेत 24 घरेलू फार्मा कंपनियों का गठबंधन है।

भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पादक संगठन (ओपीपीआई) के महानिदेशक विवेक सहगल ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ में वास्तविक योगदान के लिए जीवन-विज्ञान क्षेत्र को सक्षम बनाने के लिए सरकार को राजकोषीय प्रोत्साहन और अनुकूल नीतियां बनाने की जरूरत है।

ओपीपीआई शोध आधारित फार्मा कंपनियों… एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन और मर्क और अन्य का प्रतिनिधित्व करता है। नोवार्टिस इंडिया के भारत में अध्यक्ष अमिताभ दुबे ने कहा कि सरकार को अनुसंधान आधारित प्रोत्साहन योजनाओं पर बल देने की जरूरत है क्योंकि इससे जीवनरक्षक दवाइयों की उलब्धता बेहतर होती है। फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशुतोष रघुवंशी ने कहा,‘‘पेशेवर चिकित्सा कर्मियों की कमी की समस्या को सुलझाने की जरूरत है। इसके लिए दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में काम करने के इच्छुक डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मियों को चिह्नित करने की जरूरत है।’’

Advertisement
First Published - January 19, 2023 | 4:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement