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लेखक : टी टी राम मोहन

आज का अखबार, लेख

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन और फैकल्टी की खामोशी

अमेरिकी विश्वविद्यालयों (US Universities) में विरोध प्रदर्शनों के बीच वहां के अकादमिक जगत के लोग खामोश क्यों हैं? बता रहे हैं टीटी राम मोहन अमेरिकी विश्वविद्यालयों (US Universities) के परिसर पिछले महीने गाजा में छिड़ी लड़ाई के विरोध प्रदर्शन से उबल पड़े। फिलिस्तीन के समर्थन में हो रहे ये प्रदर्शन अभी जारी हैं और अब […]

आज का अखबार, लेख

नब्बे वर्ष के केंद्रीय बैंक का प्रदर्शन सराहनीय, RBI के बीते चार-पांच साल खासा उल्लेखनीय

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 90 वर्ष की अवस्था में भी न केवल सुस्थिर बल्कि चपल और फुर्तीला नजर आ रहा है। ऐसे में उसे इस अवसर पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से उचित ही सराहना मिली। आर्थिक उदारीकरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान उसका प्रदर्शन शानदार रहा है। बीते चार-पांच वर्षों में उसका प्रदर्शन खासा […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: ‘बड़े सुधारों’ के बिना हासिल होती वृद्धि

वर्ष 2020-21 में कोविड के झटके के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भला किसने सोचा होगा कि कोविड के बाद लगातार तीन सालों तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी सात फीसदी से ऊपर के स्तर पर रहेगा? अब यह भी संभव है कि 2024-25 में हम सात फीसदी से भी […]

आज का अखबार, लेख

हूतियों की चाल और लाल सागर से उठते सवाल

वर्ष 2023 में कई तरह के आश्चर्यजनक घटनाक्रम देखने को मिले जिनमें से ज्यादातर सुखद ही रहे। यूक्रेन में संघर्ष के बावजूद इस जंग ने रूस और नाटो (अमेरिका तथा यूरोपीय देशों का सैन्य गठबंधन) के बीच सीधे टकराव का रूप नहीं लिया। इसके अलावा अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी मंदी की चपेट में नहीं आई। […]

आज का अखबार, लेख

OpenAI: बोर्ड में खामी या सीईओ की सितारा हैसियत!

ओपनएआई के सीईओ को निकाले जाने और उनकी बहाली यह दर्शाती है कि व्यापक सामाजिक चिंताओं को हल करने के मामले में निजी क्षेत्र के बोर्ड की अपनी सीमाएं हैं। बता रहे हैं टीटी राममोहन कंपनी का बोर्ड एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को निकाल देता है। प्रमुख निवेशक उसे बहाल करता है और फिर […]

आज का अखबार, लेख

यूक्रेन से गाजा तक भूराजनीतिक चुनौती

यूक्रेन संकट से लेकर गाजा में छिड़ी लड़ाई तक भूराजनीतिक जोखिमों का जिक्र बार-बार सुनने को मिलता है। अनुभव बताते हैं कि दुनिया ने इन जोखिमों के साथ रहना सीख लिया है। बता रहे हैं टी टी राम मोहन फरवरी 2022 में यूक्रेन संकट की शुरुआत के बाद से ही ‘भूराजनीतिक जोखिम’ जैसा जुमला लगातार […]

आज का अखबार, लेख

Basel III rules: बेसल-3 पूंजी मानक….क्या कभी सबक लेंगे बैंकर?

बैंकर बेसल-3 पूंजी मानकों (Basel III rules) का विरोध कर रहे हैं लेकिन वास्तव में ये मानक न केवल बैंकों के लिए बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक हैं। बता रहे हैं टीटी राम मोहन जेपी मॉर्गन चेज के मुख्य कार्याधिकारी जेमी डिमॉन उन गिनेचुने बैंकरों में से एक हैं जो नियामकों और कानून […]

आज का अखबार, लेख

Economy: भारत के समक्ष है धीमी वैश्विक वृद्धि का माहौल

बदलते वैश्विक परिदृश्य में जहां वृद्धि की संभावना धीमी पड़ी है, भारत के लिए सात फीसदी की अधिक की दर से वृद्धि हासिल करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। बता रहे हैं टीटी राम मोहन महामारी के बाद भारत के वृद्धि संबंधी परिदृश्य में सुधार हुआ है। देश में और विदेशों में भी यह भावना […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: वंचित लोगों को अवसर देने का नायाब उदाहरण

जाति आधारित नामांकन पर अमेरिका के शीर्ष न्यायालय के आदेश के परिप्रेक्ष्य में नौकरी एवं शिक्षा दोनों में आरक्षण की भारतीय व्यवस्था महत्त्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है। बता रहे हैं टी टी राम मोहन अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने जून में बहुमत से निर्णय सुनाया कि विद्यालय जातिगत आधार पर दाखिला नहीं ले सकते हैं। […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: एक अर्थशास्त्री की नजर से आर्थिक काल खंड

आरबीआई (RBI) के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन की पुस्तक इसका उदाहरण है कि अर्थशास्त्री जन नीतियों को बनाने और लोगों के जीवन को आकार देने में कितनी अहम भूमिका निभा सकते हैं। बता रहे हैं टी टी राम मोहन क्या अर्थशास्त्री मायने रखते हैं? क्या वे सार्वजनिक नीतियों में अंतर पैदा कर सकते हैं? अर्थशास्त्री […]

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