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चीनी शेयरों में आई मिठास! बजाज हिंदुस्तान, द्वारिकेश और रेणुका शुगर में 14% तक उछाल; जानिए वजहभारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने बदला कमिटमेंट रूल्स, गूगल और इंडिगो के प्रस्तावों पर फैसले का इंतजारमिल्की मिस्ट के निवेशकों की बल्ले-बल्ले! पहले 18% प्रीमियम पर लिस्टिंग, फिर लगातार 2 दिनों से लग रहा 10-10% का अपर सर्किटबैंकों में जमा की रफ्तार 10 साल के हाई पर, डिपॉजिट ग्रोथ 15.4%; कर्ज की मांग भी तेजशिपरॉकेट की दमदार लिस्टिंग, निवेशकों को 35% का फायदा; मुनाफा काट लें या होल्ड करें?आखिरी समय में बनी बात: अमेरिका-कनाडा समझौते के बाद ट्रंप ने हटाया 50% टैरिफबुकमायशो में KKR का बड़ा दांव, कंपनी में खरीदेगी हिस्सेदारी; जानिए क्या है पूरा प्लानNifty Outlook: 24,050 के नीचे टूटा बाजार तो बढ़ेगी गिरावट! HDFC Securities के विनय राजानी ने बताए आज के 2 दमदार शेयरसोना-चांदी हुए सस्ते: वैश्विक दबाव में सोने में ₹362 और चांदी में ₹2,418 की बड़ी गिरावटStock Market Update: बाजार में दबाव! सेंसेक्स 200 अंक फिसला; Zaggle Prepaid शेयर में 26% की जोरदार वापसी

लेखक : टी टी राम मोहन

आज का अखबार, लेख

उचित है जमा वृद्धि पर रिजर्व बैंक की चिंता, ऋण और जमा के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने बैंकों से जमा में वृद्धि की गति बढ़ाने को कहा है। उनके इस आह्वान की आलोचना हुई है और कुछ लोगों ने तो इसका मखौल तक उड़ाया है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि जमा की दिक्कत पूरी तरह काल्पनिक है और ऋण देते समय बैंकों के पास जमा […]

आज का अखबार, लेख

बैंकिंग क्षेत्र ने जारी रखा है हमें चौंकाना

देश का बैंकिंग क्षेत्र लगातार चौंका रहा है। जून 2024 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) के अनुसार 2023-24 में उसका प्रदर्शन उतना ही सुखद है जितना कि बीते वर्षों में उसमें आया बदलाव। कोविड-19 महामारी के पहले वर्ष में यानी 2020-21 में प्रवेश करते समय इस क्षेत्र का फंसा हुआ कर्ज यानी गैर निष्पादित संपत्तियां […]

आज का अखबार, लेख

प्रतिस्पर्धी राजनीति और उसके परिणाम

देश में काम कर रहे फंड प्रबंधकों और बाजार विश्लेषकों को ‘बड़े सुधारों’ के बारे में चिंता करना बंद कर देना चाहिए। विस्तार से बता रहे हैं टी टी राम मोहन हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में केवल एक्जिट पोल और स्वयंभू चुनाव विशेषज्ञों के पूर्वानुमान ही बुरी तरह गलत नहीं साबित हुए, […]

आज का अखबार, लेख

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन और फैकल्टी की खामोशी

अमेरिकी विश्वविद्यालयों (US Universities) में विरोध प्रदर्शनों के बीच वहां के अकादमिक जगत के लोग खामोश क्यों हैं? बता रहे हैं टीटी राम मोहन अमेरिकी विश्वविद्यालयों (US Universities) के परिसर पिछले महीने गाजा में छिड़ी लड़ाई के विरोध प्रदर्शन से उबल पड़े। फिलिस्तीन के समर्थन में हो रहे ये प्रदर्शन अभी जारी हैं और अब […]

आज का अखबार, लेख

नब्बे वर्ष के केंद्रीय बैंक का प्रदर्शन सराहनीय, RBI के बीते चार-पांच साल खासा उल्लेखनीय

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 90 वर्ष की अवस्था में भी न केवल सुस्थिर बल्कि चपल और फुर्तीला नजर आ रहा है। ऐसे में उसे इस अवसर पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से उचित ही सराहना मिली। आर्थिक उदारीकरण की पूरी प्रक्रिया के दौरान उसका प्रदर्शन शानदार रहा है। बीते चार-पांच वर्षों में उसका प्रदर्शन खासा […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: ‘बड़े सुधारों’ के बिना हासिल होती वृद्धि

वर्ष 2020-21 में कोविड के झटके के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। भला किसने सोचा होगा कि कोविड के बाद लगातार तीन सालों तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी सात फीसदी से ऊपर के स्तर पर रहेगा? अब यह भी संभव है कि 2024-25 में हम सात फीसदी से भी […]

आज का अखबार, लेख

हूतियों की चाल और लाल सागर से उठते सवाल

वर्ष 2023 में कई तरह के आश्चर्यजनक घटनाक्रम देखने को मिले जिनमें से ज्यादातर सुखद ही रहे। यूक्रेन में संघर्ष के बावजूद इस जंग ने रूस और नाटो (अमेरिका तथा यूरोपीय देशों का सैन्य गठबंधन) के बीच सीधे टकराव का रूप नहीं लिया। इसके अलावा अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी मंदी की चपेट में नहीं आई। […]

आज का अखबार, लेख

OpenAI: बोर्ड में खामी या सीईओ की सितारा हैसियत!

ओपनएआई के सीईओ को निकाले जाने और उनकी बहाली यह दर्शाती है कि व्यापक सामाजिक चिंताओं को हल करने के मामले में निजी क्षेत्र के बोर्ड की अपनी सीमाएं हैं। बता रहे हैं टीटी राममोहन कंपनी का बोर्ड एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को निकाल देता है। प्रमुख निवेशक उसे बहाल करता है और फिर […]

आज का अखबार, लेख

यूक्रेन से गाजा तक भूराजनीतिक चुनौती

यूक्रेन संकट से लेकर गाजा में छिड़ी लड़ाई तक भूराजनीतिक जोखिमों का जिक्र बार-बार सुनने को मिलता है। अनुभव बताते हैं कि दुनिया ने इन जोखिमों के साथ रहना सीख लिया है। बता रहे हैं टी टी राम मोहन फरवरी 2022 में यूक्रेन संकट की शुरुआत के बाद से ही ‘भूराजनीतिक जोखिम’ जैसा जुमला लगातार […]

आज का अखबार, लेख

Basel III rules: बेसल-3 पूंजी मानक….क्या कभी सबक लेंगे बैंकर?

बैंकर बेसल-3 पूंजी मानकों (Basel III rules) का विरोध कर रहे हैं लेकिन वास्तव में ये मानक न केवल बैंकों के लिए बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक हैं। बता रहे हैं टीटी राम मोहन जेपी मॉर्गन चेज के मुख्य कार्याधिकारी जेमी डिमॉन उन गिनेचुने बैंकरों में से एक हैं जो नियामकों और कानून […]

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