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बिजली क्षेत्र में 35 साल के सुधारों से बदली तस्वीर, कमी से अधिशेष तक पहुंचा भारतचार्ल्स श्वाब ने भारत में शुरू किया पहला टेक्नोलॉजी सेंटर, हैदराबाद बना नया ठिकानाभारतीय दोपहिया वाहनों की विदेशों में बढ़ी मांग, लगातार तीसरे साल निर्यात बढ़ने की उम्मीदस्पाइसजेट को बड़ी राहत, विमान लीज कंपनी ने वापस ली दिवाला याचिकाभारत के एंटरटेनमेंट सेक्टर पर KKR का भरोसा, बुकमाईशो में खरीदेगी अल्पांश हिस्सेदारीप्रतिस्पर्धा आयोग का बड़ा बदलाव, प्रतिबद्धता मामलों की कुल समय-सीमा 180 दिन हुईएक दशक बाद चीनी आयात की तैयारी, 10 लाख टन से कीमतों पर लगाम की कोशिशमहिलाओं को समान संसाधन मिलें तो बढ़ेगी खेती की पैदावार, रिपोर्ट में बड़ा दावाक्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर पर सेबी की बड़ी कार्रवाई, कॉपटॉल और मानसी ब्रोकिंग पर लगाई रोकजापानी निवेशकों पर योगी का दांव, 75 हजार एकड़ भूमि बैंक और बेहतर कनेक्टिविटी का दिया हवाला

लेखक : लवीश भंडारी

आज का अखबार, लेख

भारत के छोटे कारोबार को फलने-फूलने के लिए थोड़ी कानूनी जगह दें

भारत के डीएनए में मैकाले अलग-अलग तरह से नजर आते हैं। वह केवल भाषा में ही नहीं दिखते बल्कि भारत जिस तरह खुद के लिए ‘आधुनिक’ दृष्टि की रचना करना चाह रहा है, उसमें भी इसे देखा जा सकता है। औपनिवेशिक भारत में जब ब्रिटिशों ने शहरों को डिजाइन किया तो उनका प्राथमिक लक्ष्य था […]

आज का अखबार, लेख

सिर्फ सुरक्षा नहीं, भू-अर्थशास्त्र के नए दौर में भारत को चाहिए स्पष्ट आर्थिक सुरक्षा रणनीति

लंबे समय से, आर्थिक नीति दुनिया भर में ज्यादा मूल्य तैयार करने और लोगों की भलाई को बढ़ावा देने का एक जरिया रही है। लेकिन अब सरकारों को विवश होकर आर्थिक नीति को सुरक्षा या यहां तक कि प्रभुत्व हासिल करने के साधन के रूप में इस्तेमाल करना पड़ रहा है। भू-राजनीतिक दबावों ने यह […]

आज का अखबार, लेख

पिछली तारीख से कर वसूली पर बहस: निवेश माहौल के लिए कितना बड़ा खतरा?

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्मों के विरुद्ध सरकार के साथ माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की गणना को लेकर चल रहे विवाद में दिए गए निर्णय को पिछली तारीखों से लागू किया है। दूसरे शब्दों में, इन प्लेटफॉर्मों को अपने पिछले लेनदेन पर अधिक जीएसटी चुकाना होगा, जिसकी राशि कथित रूप […]

आज का अखबार, लेख

देश के श्रम कानूनों को मिले पुरातन समझौतों से मुक्ति

कर्नाटक ने वर्ष 2023 में जब अपने कारखाना अधिनियम में संशोधन कर स्वीकृत कारखाना श्रमिकों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति दी तब ट्रेड यूनियनों ने जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में तर्क दिया गया कि यह बदलाव भारत की उस प्रतिबद्धता का उल्लंघन करता है जो […]

आज का अखबार, लेख

भारतीय शहरों की सूरत बदलने के लिए ‘जवाबदेह सिटी CEO’ मॉडल होगा सबसे कारगर समाधान

देश में 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए आवंटन बढ़ाकर लगभग 8 लाख करोड़ रुपये करने का बिल्कुल सही कदम उठाया है जिसका वितरण पांच वर्षों के दौरान किया जाएगा। इसमें से 41 फीसदी राशि विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के लिए निर्धारित की गई है। इसके अलावा, वित्त आयोग […]

आज का अखबार, लेख

तकनीकी बदलाव के दौर में श्रम व्यवस्था में व्यापक सुधार जरूरी, यूनियनें तैयार नहीं

देश की 10 बड़े ट्रेड यूनियनों ने मिलकर एक समूह बनाया है और उन्होंने पिछले सप्ताह एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया। उनकी धमकी एकदम स्पष्ट थी: हाल ही में अधिसूचित चार श्रम संहिताओं (वेतन, औद्योगिक संबंधों, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित) को वापस लिया जाए और तकरीबन 29 कानूनों वाली पुरानी व्यवस्था […]

आज का अखबार, लेख

भारत की हवा को साफ करना संभव है, लेकिन इसके लिए समन्वित कार्रवाई जरूरी

कुछ समस्याएं आसान होती हैं, कुछ जटिल होती हैं और कुछ ऐसी होती हैं जिन्हें ‘विकट समस्याएं’ कहा जा सकता है। सबसे आसान समस्याएं वे होती हैं जहां हमें पता होता है कि दिक्कत क्या है। हमें समस्या का हल भी पता होता है और जवाबदेही तय करना भी आसान होता है। सबसे विकट समस्याएं […]

आज का अखबार, लेख

सरकार को टिकाऊ सुधारों के लिए श्रम संहिता तुरंत लागू करनी चाहिए

भारत में वेतन वृद्धि उतनी अधिक क्यों नहीं है जितनी होनी चाहिए? चाहे किसी संगठित क्षेत्र के औद्योगिक प्रतिष्ठान में काम करने वाला कामगार हो या असंगठित क्षेत्र का मजदूर, वेतन मुश्किल से इतना बढ़ता है कि महंगाई के साथ तालमेल बना सके। दुर्भाग्यवश, कुछ ही शोधकर्ताओं ने इस मुद्दे को गहराई से समझने की […]

आज का अखबार, लेख

सरकार को घरेलू विनिर्माण को स्वार्थी ताकतों से बचाना चाहिए

सरकार ने हाल ही में यह घोषणा की है कि वह स्टील से लेकर मोबाइल कवर तक विभिन्न उत्पादों के विरुद्ध एंटी-डंपिंग जांच करेगी। भारत में एंटी-डंपिंग का इस्तेमाल संरक्षणवादी उपाय के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है। इसके साथ-साथ उच्च शुल्क दरें, मात्रात्मक प्रतिबंध, नकारात्मक आयात सूची और अन्य उपाय भी अपनाए […]

आज का अखबार, लेख

उच्च विनिर्माण लागत सुधारों और व्यापार समझौतों से भारत के लाभ को कम कर सकती है

शुल्क वृद्धि की चुनौती से निपटने के लिए हमें क्या करना चाहिए? यह दिक्कत कहीं अधिक गहरी समस्या के संकेतों को रेखांकित करती है: हमारे खेत और हमारी कंपनियां पर्याप्त उत्पादक नहीं हैं और कारोबार की लागत भी इतनी कम नहीं है जो वैश्विक बाजारों के लिए उपयुक्त हो। इस समस्या को हल करने से […]

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