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लेखक : लवीश भंडारी

आज का अखबार, लेख

गुणवत्ता नियंत्रण और समझ-बूझ भरी नीति

भारत अपने बाजारों को लगातार खोलता जा रहा है, जिसके साथ अधिक विश्वास भरी, कम प्रतिक्रिया वाली तथा ज्यादा सक्रिय आयात नीति व्यवस्था की शुरुआत हो रही है। यह बदलाव पिछले वर्ष किसी समय आरंभ हो गया था लेकिन पिछले बजट के बाद इसने गति पकड़ी और अब मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की संभावना ने […]

आज का अखबार, लेख

ट्रंप टैरिफ में भारत के लिए छिपा है अवसर

अमेरिका ने आखिरकार वह टैरिफ लागू कर दिया है जिसकी धमकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप दे रहे थे। सभी उत्पादों पर 10 फीसदी टैरिफ और व्यापार साझेदारों द्वारा लगाए जा रहे शुल्क के बराबर का टैरिफ लागू होने पर अमेरिका को निर्यात होने वाला हमारा काफी सामान पहले से महंगा हो जाएगा। भारत उन देशों में […]

आज का अखबार, लेख, विविध

अनिश्चित जलवायु का कैसे हो नियमन

मानवता की सारी ऊर्जा इन दिनों खुद पर ही लगी हुई है और जलवायु का एजेंडा अब उसकी शीर्ष प्राथमिकताओं में नहीं है। पश्चिम के लोकतंत्रों के पास विकासशील देशों को देने के लिए धन नहीं है, विकासशील देश भी वृद्धि तथा दूसरी प्राथमिकताओं पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं और बाकी कुछ मायने […]

आज का अखबार, लेख

विकसित भविष्य के लिए जरूरी हैं प्लेटफॉर्म

भारत को 2047 तक विकसित बनाने का लक्ष्य मुझे आकर्षित तो करता है मगर अपनी बिरादरी के दूसरे लोगों की तुलना में मुझे संदेह भी अधिक होता है। यह लक्ष्य बेहद करीब नजर आता है, जिसकी वजह से और भी लुभाता है। अगर हम बीते जमाने के मॉडल और सबक आजमाते हैं तो इस लक्ष्य […]

आज का अखबार, लेख

खेल प्रशासन में है सुधार की जरूरत

भारत की पुरुष क्रिकेट टीम का प्रदर्शन इन दिनों घर-घर में चर्चा और विश्लेषण का विषय है। हार के बाद अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। खिलाड़ियों, अंपायरों, मैदान और कई बार तो बेचारे कोच और मैनेजरों को भी घर में बैठकर आलोचना करने वाले ऐसे लोगों का सामना करना पड़ता है। इन […]

आज का अखबार, लेख

जलवायु परिवर्तन से सही ढंग से निपटना जरूरी

कॉप 29 बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकसित देश अपने पापों की भरपाई नहीं करेंगे। इसके परिणामस्वरूप भारत तथा अन्य विकासशील देशों को न तो समुचित सहायता मिलेगी और न ही सब्सिडी वाला ऋण मिलेगा। वहां जो कुछ हुआ वह कम से कम मेरे लिए पूरी तरह अपेक्षित था। जिस पैमाने पर […]

आज का अखबार, लेख

भारत का ऊर्जा भविष्य और छोटे परमाणु संयंत्र

स्मॉल मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर या एसएमआर में भारत की ऊर्जा की तस्वीर बदल देने की क्षमता है। लेकिन अभी की स्थिति में भारत में एसएमआर से बिजली बनाने का व्यापक कार्यक्रम शुरू करने से पहले काफी कुछ किया जाना है। मगर यह अहम क्यों है? क्योंकि आगे चलकर भारत को हर आठ से 10 वर्ष […]

आज का अखबार, लेख

Opinion | विकसित भारत के लिए तय करें प्राथमिकताएं

वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने का लक्ष्य हासिल करना सरल नहीं है। किंतु ऐसे अनेक अवसर हैं जिनकी मदद से हम यह लक्ष्य हासिल करने की दिशा में बढ़ सकते हैं। बता रहे हैं लवीश भंडारी क्या 2047 तक देश को विकसित बनाना संभव है? वर्ष 2022 में 2,390 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति […]

आज का अखबार, लेख

शोध और विकास में क्यों पिछड़ जाता है निजी क्षेत्र

संरक्षित बाजार और मजबूत वृद्धि के अनुमानों की वजह से शोध एवं विकास में इजाफा करने को समुचित प्रोत्साहन नहीं मिल पाता। बता रहे हैं लवीश भंडारी भारत में इस बात पर लगभग आम सहमति है कि देश को शोध एवं विकास के क्षेत्र में बहुत अधिक काम करने की आवश्यकता है ताकि हम तेज […]

आज का अखबार, लेख

चुकानी पड़ती है न्यायिक विलंब की आर्थिक कीमत

देश के मुख्य न्यायाधीश ने अदालती मामलों के हल में देर को न्याय न मिलने के रूप में स्वीकार करके अच्छा किया है। न्यायिक विलंब अन्य देशों में भी समस्या है लेकिन दुनिया भर में इसकी सबसे बुरी स्थिति शायद भारत में ही है। विश्व बैंक के डूइंग बिजनेस सर्वे के अनुसार देश में अदालतों […]

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