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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: बेपटरी वित्तीय व्यवस्था

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को रेल मंत्रालय के 32,512 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की जो देश के विभिन्न हिस्सों में रेल नेटवर्क का विस्तार करने से संबंधित थे। मंजूर किए गए धन का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा में किया जाएगा। क्षमता बढ़ाने में किया जाने वाला निवेश हाल […]

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Editorial: अदूरदर्शी नियमन

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नियमन के मुताबिक चिकित्सकों को केवल जनेरिक औषधियां लिखनी होंगी और ऐसा न कर पाने की स्थिति में वे दंड के भागीदार होंगे। यह नियम एक पुरानी समस्या का गलत निदान सुझाता है। जनेरिक औषधियां लिखने का प्रावधान सन 2002 से है और इसका अक्सर उल्लंघन होते देखकर एनएमसी ने […]

आज का अखबार, लेख

G20 की गांधीनगर बैठक से उपजा सुधार का खाका

वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक में विभिन्न कामों के जो नतीजे सामने आए वे विकसित व विकासशील देशों के नजरिये सामने रखते हैं। बता रहे हैं वी अनंत नागेश्वरन और अनूपा नायर जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की तीसरी बैठक 17-18 जुलाई को गांधीनगर में संपन्न […]

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Editorial: व्यापक मशविरा जरूरी

संसद के हालिया सत्र के आखिरी कुछ घंटों में सरकार ने तीन नए विधेयक पेश किए जो अगर पारित हो गए तो देश के नागरिकों के शासन पर दूरगामी प्रभाव डालेंगे। नए विधेयक देश में आपराधिक न्याय और निगरानी संबंधी पुरानी संहिताओं का स्थान लेंगे। उन्हें भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस कहा जाएगा और ये […]

आज का अखबार, लेख

Editorial: अधूरी तैयारी!

राजनीति सही मायनों में जनता के बीच ही होती है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी संसद के मॉनसून सत्र के एक दिन बाद वहीं थे यानी वायनाड में अपने मतदाताओं के बीच। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की बदौलत उनकी लोकसभा सदस्यता बहाल होने के बाद वह पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र में […]

आज का अखबार, लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने दोबारा छेड़ी सुरक्षा की बहस

हमें प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने यह अवसर दिया है कि हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी बहस के सबसे पुराने प्रश्नों में से एक को उठाएं या खंगालें। वह यह कि आजाद भारत के इतिहास का सबसे खतरनाक दशक कौन था? पिछले दिनों संसद में अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: सतर्क ठहराव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की गुरुवार को हुई बैठक में सभी जरूरी कदम उठाए गए। जैसी कि व्यापक तौर पर उम्मीद भी थी, छह सदस्यीय समिति ने नीतिगत रीपो दर को 6.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रहने दिया। ऐसा जुलाई और अगस्त महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: न्यायिक सुधार पर ठोस सलाह

देश के हालिया संवैधानिक इतिहास में सरकार की तीनों शाखाओं के बीच एक असहज करने वाला रिश्ता नजर आया है। खासतौर पर कार्यपालिका और विधायिका ने अक्सर न्यायपालिका को सीमित करने का प्रयास किया है। ऐसे में उच्च न्यायपालिका के कुछ लोगों समेत पर्यवेक्षकों के लिए यह स्वाभाविक ही था कि वे विधायिका द्वारा देश […]

अर्थव्यवस्था, आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: बढ़ सकता है नीतिगत जो​खिम

भारतीय रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस सप्ताह मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगी। यह समीक्षा तब की जा रही है जब अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दर जुलाई में तय दायरे के ऊपरी स्तर को पार कर चुकी है। जून में यह दर 4.8 फीसदी थी। उपभोक्ता […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: स्वायत्तता पर असर

गत सप्ताह लोकसभा ने भारतीय प्रबंध संस्थान (संशोधन) विधेयक 2023 को पारित कर दिया। इस विधेयक में कई महत्त्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है जो भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) की स्वायत्तता को सीमित करेंगे और इस दिशा में सरकार की नीति को पलटेंगे। मौजूदा कानून के मुताबिक संचालन मंडल आईआईएम के निदेशक का चयन […]

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