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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: चुनावों के साथ बढ़ता राजनीतिक दलों के वादों का दायरा

चुनावी राज्यों में राजनीतिक दलों के वादों की प्रकृति और उनका दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आगे चलकर राजकोष पर इनका विपरीत प्रभाव होगा। उदाहरण के लिए छत्तीसगढ़ में किए गए वादों का विश्लेषण बताता है कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों के रवैये में कोई खास अंतर नहीं है। राज्य […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: महानगरों की निर्माण योजना

दशकों तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली और आसपास के गुड़गांव तथा नोएडा जैसे शहर) देश की निर्माण राजधानी भी रहा है। बीते 15 वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्‌डों में से एक का चरणबद्ध विकास हुआ है और मेट्रो नेटवर्क का भी। आसपास के उपनगरों में आवासीय और कार्यालयों वाले टावर बनाए गए […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: वैश्विक अस्थिरता से नई चुनौतियां संभव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल के दिनों में बाह्य मोर्चे पर अस्थिरता का उचित प्रबंधन किया है। यह अस्थिरता मुख्य रूप से बाहरी झटकों से उत्पन्न हुई थी। इसके परिणामस्वरूप ऐसे समय में भी रुपये का बाहरी मूल्य स्थिर रहा है जब कुछ विकसित देशों में काफी अस्थिरता नजर आई। इस संदर्भ में रिजर्व […]

आज का अखबार, संपादकीय

बीमा नियामक की पहल: ग्रामीण भारत में बीमा की पहुंच बढ़ाने का अवसर

भारतीय बी​मा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के चेयरमैन देवाशिष पांडा ने घोषणा की है कि बीमा नियामक, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) जैसा एक निकाय गठित करने पर विचार कर रहा है। यह बड़ी तादाद में भारतीयों को बीमा उद्योग के दायरे में लाने की दिशा में एक उपयोगी कदम हो सकता है। एसएलबीसी […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: भारतीय शेयर बाजारों पर भूराजनीतिक जोखिम

भारतीय शेयर बाजारों में पिछड़े पखवाड़े गिरावट का सिलसिला रहा और शुक्रवार को बेंचमार्क निफ्टी50 की वापसी के पहले छह सत्रों में गिरावट देखने को मिली। इसकी अनुमानित वजह इजरायल और हमास के बीच छिड़ी लड़ाई है जिसकी वजह से ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आशंका उत्पन्न हो गई। कच्चे तेल और गैस की कीमतें […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था..

केंद्र सरकार का थिंक टैंक नीति आयोग भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 25 वर्ष की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इस समाचार पत्र में सोमवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक इसका लक्ष्य भारत को 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है। इसके दृष्टिपत्र में अनुमान जताया गया है कि भारत 2030 तक 6.69 लाख […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट और रोड पहल के दस वर्ष पूरे

चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट और रोड पहल (BRI) को इस महीने एक दशक पूरा हो गया है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पूरी दुनिया को अपने दायरे में लेने वाली इस परियोजना में सौजन्यता का तत्त्व डालने की कोशिश की है। ऐसा इसलिए कि इसे दुनिया भर में चीन की शक्ति के प्रदर्शन के रूप में […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: क्या मुद्रास्फीति को लक्षित करना वास्तव में काम करता है?

सर्वाधिक विकसित देशों में मुद्रास्फीति का लक्ष्य दो फीसदी का है। परंतु अमेरिका में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 3.7 फीसदी है, यूरो क्षेत्र में यह 5.6 फीसदी, ब्रिटेन में 6.8 फीसदी और जापान में 2.9 फीसदी है। शून्य वृद्धि से जूझ रहे जर्मनी में यह 4.3 फीसदी है। भारत में जहां मुद्रास्फीति की दर इन विकसित […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

भारत में महिलाओं के लिए नौकरी पाना अभी भी चुनौतीपूर्ण

भारत में महिलाओं की कम श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) को भारतीय समाज में व्याप्त पितृ सत्तात्मक सोच और भारतीय कारोबारी जगत के पूर्वग्रह का उदाहरण माना जाता है। यह बात हालिया सर्वेक्षणों पर भी लागू होती है जो इशारा करते हैं कि पुरुषों द्वारा परिवार पालने के लिए कमाना ही प्रतिमान है, वहीं महिलाओं […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: पश्चिम एशिया में भूराजनीतिक तनाव, आर्थिक और नीतिगत जोखिम बढ़ा

पश्चिम एशिया में नए सिरे से उत्पन्न भूराजनीतिक तनाव ने आर्थिक और नीतिगत जोखिम बढ़ा दिए हैं। हालांकि इस संकट से निपटने की कोशिश की गई है लेकिन इजरायल और फिलिस्तीन (Israel-Palestine War) के बीच छिड़े मौजूदा संघर्ष में अन्य क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के शामिल होने की आशंका से जोखिम इतना बढ़ सकता है, […]

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