खाड़ी देशों में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत झेल रहे देश के लिए दो बड़े गैस टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रास्ता पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। करीब दो हफ्तों से बंद पड़े ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) से इन जहाजों को निकालने के लिए भारत और ईरान के बीच एक विशेष समझौता हुआ है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
ब्लूमबर्ग के सूत्रों के मुताबिक, इस संवेदनशील मामले पर नई दिल्ली और तेहरान के बीच हुई बातचीत के बाद ही इन जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया गया है। ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ दोनों ही सरकारी कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज हैं, जिन्हें इंडियन ऑयल (IOC) ने चार्टर किया है।
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शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, शिवालिक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ‘ को पार कर चुका है, जबकि नंदा देवी रास्ते में है। हालांकि, युद्ध क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक दखलंदाजी के कारण इनकी सटीक लोकेशन ट्रैक करने में थोड़ी मुश्किल आ रही है, लेकिन दोनों जहाजों ने अपने सिस्टम पर खुद को ‘भारतीय सरकारी जहाज’ बताया है।
भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी LPG पश्चिम एशियाई देशों से ही आयात करता है। खाड़ी में छिड़ी जंग की वजह से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे भारत में रसोई गैस के साथ-साथ प्लास्टिक बनाने वाली पेट्रोकेमिकल यूनिट्स और औद्योगिक इकाइयों में ईंधन का संकट खड़ा हो गया था। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है, इसलिए यह संकट सीधा आम आदमी की रसोई और अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।
कतर के रास लफ्फान से निकले ये दोनों टैंकर अगले हफ्ते तक भारतीय तटों पर पहुंच सकते हैं। हालांकि, विदेश मंत्रालय और इंडियन ऑयल ने अभी इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि इस सफल शुरुआत के बाद अब कई और एलपीजी जहाज भी इसी रास्ते से आने की कतार में हैं। भारत लगातार ईरान के संपर्क में है ताकि कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सके।