दुनिया की प्रमुख सोशल मीडिया कंपनी Meta Platforms अपने खर्च को नियंत्रित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश के दबाव को संतुलित करने के लिए बड़े स्तर पर कर्मचारियों की संख्या घटाने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी संभावित रूप से अपने वैश्विक कार्यबल का लगभग 20 प्रतिशत तक कम कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो करीब 16 हजार कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
कंपनी के नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 दिसंबर तक मेटा में लगभग 79 हजार कर्मचारी कार्यरत थे। मेटा दुनिया के लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook, Instagram और WhatsApp का संचालन करती है।
Also Read: पश्चिम एशिया युद्ध का असर: गैस संकट से जूझ रहीं भारतीय फैक्टरियां, 30% तक घटा उत्पादन
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी अपने भविष्य को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के साथ जोड़कर देख रही है। मेटा का मानना है कि एआई आधारित टूल्स आने वाले समय में कर्मचारियों की उत्पादकता को काफी बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही कई कार्यों में कम कर्मचारियों की आवश्यकता रह जाएगी।
इसी वजह से कंपनी अपनी संचालन व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि अभी तक इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही इसके लिए कोई समयसीमा तय की गई है।
सूत्रों के मुताबिक मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में कंपनी के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ संभावित छंटनी के विषय पर चर्चा की है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने विभागों में कामकाज को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उपाय तलाशें।
इस बीच मेटा के प्रवक्ता Andy Stone ने इन खबरों को लेकर कहा कि यह केवल संभावित रणनीतियों से जुड़ी अटकलें हैं। उन्होंने इसे सैद्धांतिक स्तर की रिपोर्टिंग बताया और कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
यदि मेटा इस स्तर पर कर्मचारियों की संख्या कम करने का निर्णय लेती है तो यह कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक होगी। इससे पहले कंपनी ने 2022 और 2023 के दौरान बड़े पैमाने पर पुनर्गठन किया था।
उस समय मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Mark Zuckerberg ने उस अवधि को कंपनी का “ईयर ऑफ एफिशिएंसी” बताया था। नवंबर 2022 में कंपनी ने लगभग 11 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसके बाद 2023 की शुरुआत में करीब 10 हजार और कर्मचारियों की छंटनी की गई थी।
कंपनी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार यह कदम उस समय विचाराधीन है जब कंपनी तेजी से जेनेरेटिव एआई के क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही है। पिछले एक वर्ष में एआई तकनीक कंपनी की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
दरअसल, कंपनी के प्रमुख Mark Zuckerberg ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में एआई को मजबूत करने के लिए भारी निवेश किया जाएगा। इसी योजना के तहत मेटा ने वर्ष 2028 तक अत्याधुनिक डाटा सेंटर बनाने के लिए लगभग 600 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना बनाई है। इन डाटा सेंटरों का उद्देश्य बड़े एआई मॉडल को ट्रेन करने और उन्हें संचालित करने के लिए मजबूत कंप्यूटिंग ढांचा तैयार करना है।
एआई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कंपनी केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं बना रही है, बल्कि शीर्ष स्तर के विशेषज्ञों की भर्ती भी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक मेटा ने एआई क्षेत्र के प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को आकर्षित करने के लिए बेहद बड़े वेतन पैकेज की पेशकश की है। कुछ मामलों में चार साल की अवधि के लिए सैकड़ों मिलियन डॉलर तक के पैकेज दिए जा रहे हैं। इन विशेषज्ञों को एक विशेष “सुपरइंटेलिजेंस” टीम में शामिल किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य एआई विकास की गति को और तेज करना है।
भर्ती के अलावा कंपनी अधिग्रहण और साझेदारी के माध्यम से भी एआई क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। हाल ही में मेटा ने एआई एजेंटों के लिए विकसित किए गए सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म मोल्टबुक का अधिग्रहण किया है। इसके साथ ही कंपनी कम से कम 2 अरब डॉलर खर्च कर चीनी एआई स्टार्टअप मैनस को खरीदने की प्रक्रिया में भी है।
दुनिया भर की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेज विस्तार के साथ अपने कार्यबल की संरचना में बड़े बदलाव कर रही हैं। इस बदलाव का मकसद एक ओर लागत को नियंत्रित करना है, वहीं दूसरी ओर एआई आधारित नई तकनीकों के विकास में निवेश को बढ़ाना भी है। हाल के महीनों में कई प्रमुख टेक कंपनियों के फैसले यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में तकनीकी क्षेत्र की नौकरियों की प्रकृति तेजी से बदल सकती है।
सोशल मीडिया दिग्गज कंपनी मेटा ने हाल ही में अपने संगठनात्मक ढांचे में कई बदलाव किए हैं। कंपनी अब एआई तकनीक के विकास को अपनी रणनीति के केंद्र में रख रही है। इसके लिए वह अपने संसाधनों और कर्मचारियों की प्राथमिकताओं को भी नए सिरे से व्यवस्थित कर रही है।
दरअसल, एआई के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में कंपनियां पारंपरिक कार्य क्षेत्रों में कर्मचारियों की संख्या घटाकर एआई रिसर्च, मशीन लर्निंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं।
यह बदलाव केवल मेटा तक सीमित नहीं है। ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने जनवरी में लगभग 16 हजार कर्मचारियों की छंटनी की पुष्टि की थी। कंपनी का कहना है कि वह अपने संचालन को अधिक कुशल बनाने और एआई तकनीकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए यह कदम उठा रही है।
इसी तरह फिनटेक कंपनी ब्लॉक, जिसका नेतृत्व जैक डोर्सी कर रहे हैं, ने भी हाल ही में अपने कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती की है। कंपनी ने लगभग आधे कार्यबल को कम कर दिया। इसके पीछे मुख्य कारण एआई प्रणालियों की बढ़ती क्षमता को बताया गया है। कंपनी का मानना है कि कई कार्य अब एआई की मदद से अधिक तेजी और कम लागत में पूरे किए जा सकते हैं।
मेटा के लिए एआई का सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा है। कंपनी के लामा 4 मॉडल के शुरुआती संस्करणों को लेकर उसे कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। विशेष रूप से बेंचमार्क परिणामों को लेकर सवाल उठे थे, जिससे कंपनी की एआई क्षमताओं पर चर्चा तेज हो गई थी।
इन चुनौतियों के चलते मेटा ने अपने सबसे बड़े प्रस्तावित एआई मॉडल “बेहेमथ” को लॉन्च करने की योजना भी रद्द कर दी। यह मॉडल कंपनी के एआई पोर्टफोलियो का सबसे शक्तिशाली संस्करण माना जा रहा था।
फिलहाल मेटा की एआई रिसर्च टीम एक नए मॉडल “एवोकाडो” पर काम कर रही है। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार अभी इस मॉडल का प्रदर्शन कंपनी की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं पहुंच पाया है। इसके बावजूद कंपनी एआई के क्षेत्र में अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।