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₹57,000 करोड़ के बाजार पर असर! बिहार के नए कानून से हिले स्मॉल फाइनेंस बैंकों के शेयरपेट्रोल से 43% सस्ती CNG का फायदा किसे? महानगर गैस या IGL… ब्रोकरेज के टारगेट जान लेंGaudium IVF IPO की बाजार में सकारात्मक शुरुआत, 5% प्रीमियम के साथ ₹83 पर लिस्ट हुए शेयरGold Silver Price Today: एमसीएक्स पर सोना ₹1.60 लाख और चांदी 2.66 लाख रुपये के करीब, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजीडिजिटल युग का असर? भारतीय युवाओं की मानसिक सेहत पर बढ़ रहा दबावहवाई यात्रियों को बड़ी राहत, 48 घंटे तक फ्री कैंसलेशन; रिफंड की समयसीमा भी तयभारत-इजरायल ने 16 समझौतों पर किए हस्ताक्षर, AI-रक्षा समेत कई क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाईसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंटेंट की जिम्मेदारी लें: अश्विनी वैष्णवअमेरिकी आयात का भारत के पशु आहार बाजार पर असर अभी नहीं: रविंदर बलैनE20 petrol: 1 अप्रैल से बड़ा बदलाव! अब मिलेगा E20 पेट्रोल- जानिए नियम

लेखक : आदिति फडणीस

आज का अखबार, लेख

सियासी हलचल: बिहार में शराबबंदी फिर बन रहा चुनावी मुद्दा

कुछ लोग इसे कभी भरपाई न होने वाली आपदा बताते हैं। कुछ लोग इसकी समीक्षा और इसमें सुधार चाहते हैं। कम संख्या में ही सही, कुछ लोगों का मानना है कि इसे पूरी तरह हटा लेना चाहिए क्योंकि यह कारगर नहीं है। मगर सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) का कहना है कि राज्य में चुनाव हो […]

आज का अखबार, लेख

सियासी हलचल: चिराग की दावेदारी और उनके सामने विकल्प

गृह मंत्री अमित शाह ऐलान कर चुके हैं कि इस साल अक्टूबर-नवंबर में संभावित बिहार विधान सभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विजयी होने पर मुख्यमंत्री की कमान नीतीश कुमार के पास ही रहेगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बिहार इकाई के प्रमुख दिलीप जायसवाल ने भी शाह के सुर में सुर मिलाया […]

आज का अखबार, लेख

संघर्ष के क्षण में एकजुट रहे हैं पक्ष-विपक्ष

भारत की पश्चिमी सीमा पर गोलाबारी चल रही है। परंतु संसद में खामोशी है। विपक्ष ने मांग की थी कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद खुफिया और सुरक्षा नाकामी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने के लिए संसद का संयुक्त सत्र आयोजित किया जाए। ऐसा लगता है कि वह मांग ठंडे बस्ते में […]

आज का अखबार, लेख

क्या जल बदल पाएगा पाकिस्तान का व्यवहार?

वर्ष 2020 में चीन के साथ सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद भारत ने वहां की कंपनियों के लिए देश में कारोबार करना काफी मुश्किल बना दिया था। भारत ने चीन को झुकाने के लिए टिकटॉक सहित कई मोबाइल ऐप्लिकेशन (ऐप) पर भी प्रतिबंध लगा दिए थे। बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्कार में पूर्व विदेश […]

आज का अखबार, उद्योग, बिहार व झारखण्ड

Patna Metro: पटना की नई मेट्रो लाइन: छोटे शहरों के लिए भविष्य की बड़ी उम्मीद

पटना इस समय उत्साह से लबरेज है। शहर को एक नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मिल रहा है, जिसका उद्घाटन इसी 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके अलावा एक एलिवेटेड रोड भी बन कर तैयार है। इसी साल 15 अगस्त तक बिहार की पहली मेट्रो भी यहां दौड़ने लगेगी। पहले चरण में पांच स्टेशनों […]

आज का अखबार, राजनीति, लेख

एम ए बेबी के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी 

यह बात मई 1996 की है जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार संसद में विश्वास मत हासिल न कर पाने की वजह से 13 दिन में गिर गई थी। वाजपेयी सरकार गिरने के बाद देश में कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास का एक अहम पन्ना पलटने की तैयारी शुरू हो गई थी। उस समय पश्चिम बंगाल के […]

आज का अखबार, राजनीति, लेख

केरल में कमल खिला पाएंगे राजीव चंद्रशेखर!

मलयालम पर उनकी खास पकड़ नहीं है। कई मशहूर और दिग्गज वक्ताओं वाले राज्य केरल में उन्हें प्रभावशाली वक्ता भी नहीं माना जाता। केरल में उन्होंने ज्यादा वक्त भी नहीं बिताया है। लेकिन राजीव चंद्रशेखर को हाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई का प्रमुख नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति यह सोचकर […]

आज का अखबार, लेख

सियासत में अहमियत के लिए जूझते ज्ञानेंद्र

नेपाल में हर साल 19 फरवरी को लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1950-51 की क्रांति की याद दिलाता है जब राणाओं का तख्तापलट हुआ था और देश में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित पहली सरकार बनी थी। लेकिन राजा महेंद्र ने 1960 में संसद भंग कर दी और पंचायत व्यवस्था लागू कर दी, जिसमें […]

भारत, राजनीति

हारी है, मुकाबले से बाहर नहीं हुई है ‘आप’

दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव में Aam Aadmi Party (आप) को हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय राजधानी में 10 वर्षों तक सत्ता में रही Arvind Kejriwal के नेतृत्व वाली आप पिछले चुनाव में मिली 62 सीटों से सीधे 22 पर आ गिरी। इस करारी ​शिकस्त के बावजूद पार्टी इस […]

आज का अखबार, लेख

प्रवासियों की वापसी और सियासत की चुप्पी

भारत और अमेरिका के रिश्तों पर देसी राजनीति में हमेशा से ही गरमागरम बहस होती रही है। अमेरिका ने 1956 में भारत की गुटनिरपेक्षता को ‘अनैतिक और बेवकूफाना’ बताया था, जिसके बाद पूरी संसद पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ खड़ी हो गई थी। इंदिरा गांधी ने 1971 में तत्कालीन सोवियत संघ के साथ शांति, मैत्री […]

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