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‘डिजिटल पेमेंट में एजेंटिक AI के लिए बने मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क’, NPCI प्रमुख दिलीप आसबे का बड़ा बयान

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एनपीसीआई प्रमुख दिलीप आसबे ने एआई-आधारित 'एजेंटिक' डिजिटल भुगतान के लिए एक सुरक्षित नियामक ढांचे और नए तकनीकी प्रयोगों को बढ़ावा देने की वकालत की है

Last Updated- May 30, 2026 | 10:32 AM IST
National Payments Corporation of India (NPCI) chief Dilip Asbe
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के प्रमुख दिलीप आसबे | फाइल फोटो

भारत के डिजिटल भुगतान और वित्तीय प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को एजेंटिक दुनिया के लिए एक नियामक ढांचे की आवश्यकता है ताकि संबंधित उपयोग मामलों का सुव्यवस्थित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। यह बात भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के प्रमुख दिलीप आसबे ने शुक्रवार को मुंबई टेकवीक में कही।

उन्होंने देश में  आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों के साथ प्रयोग करने की गुंजाइश बनाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेन-देन को अधिकृत करने और शिकायतों का निवारण करने के लिए शासन ढांचे सुनिश्चित किए जाएं।

उन्होंने कहा, ‘हमारे पास एजेंटिक के लिए एक नियामक ढांचा होना चाहिए और जब यह मौजूद होगा तब हम उपयोग के मामलों के सुव्यवस्थित क्रियान्वयन पर ध्यान दे सकते हैं। एक देश के रूप में हमें खुले दिमाग से काम करना चाहिए और कुछ प्रयोगों की अनुमति देनी चाहिए, एजेंटिक (प्रौद्योगिकियों) का उपयोग करके उपयोग मामलों का निर्माण करना चाहिए क्योंकि यह उपयोगकर्ता और व्यापारी दोनों के लिए लाभ उत्पन्न करता है।’

एनपीसीआई देश की रियल टाइम भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का संचालन करती है।

फ्लैगशिप मॉडल

उनका नियामक ढांचे का आह्वान ऐसे समय में आया है जब एनपीसीआई एजेंटिक उपयोग मामलों पर काम कर रहा है। जिनमें बैंकों और शीर्ष खुदरा भुगतान संस्था के बीच एजेंट-से-एजेंट संचार और भारत के लिए उसका फ्लैगशिप फाइनैंस मॉडल फॉर इंडिया (फिमि) शामिल है। 

उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जोखिमों को अच्छी तरह सुरक्षित और इंगित किया जाए। इस प्रक्रिया में यह तय होना चाहिए कि लेन-देन की राशि क्या हो सकती है, कौन-से लेन-देन हैं जहां उपयोगकर्ता एजेंट को निर्देश वापस दे रहा है और शासन के दृष्टिकोण से यह कैसे दर्ज किया जाता है। क्या यह ‘ह्यूमन-नॉट-इन-अ-लूप’ है, एक सहमति देने वाला इंसान है या लेन-देन को अधिकृत करने वाला व्यक्ति है।’

संचालन ढांचे यह संकेत दे सकते हैं कि लेन-देन से पहले नीतियां कैसे दर्ज और सत्यापित की जाती हैं और उपयोगकर्ता शिकायतों के समाधान के लिए साक्ष्य कैसे उत्पन्न किए जाते हैं।

फिमि के बारे में आसबे ने कहा कि छोटा भाषा मॉडल इन-हाउस बनाया गया है और हर महीने 10 लाख उपयोगकर्ताओं को दर्ज करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में यह प्रतिदिन 10 लाख उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सकता है जो यूपीआई उपयोगकर्ताओं द्वारा तेजी से अपनाने का संकेत है।

फिमि को इस वर्ष एनपीसीआई यूपीआई हेल्प असिस्टेंट के रूप में पेश किया गया है जो एक एआई-संचालित संवादात्मक सहायता प्रणाली है। यह सहायक हिंदी, तेलुगु और बांग्ला सहित अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है।

वॉइस और यूपीआई

एनपीसीआई वर्तमान में यह सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है कि उसके वॉइस-आधारित भुगतान फीचर हेलो यूपीआई की सटीकता मौजूदा स्तरों से बढ़े, भले ही इसे अपनाना अभी शुरू नहीं हुआ है।

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First Published - May 30, 2026 | 10:32 AM IST

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