भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सर्वे से पता चलता है कि भारत में डिजिटल भुगतानों में वृद्धि के बावजूद परिवारों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के बीच नकदी के इस्तेमाल को लेकर प्राथमिकता बनी हुई है।
रिजर्व बैंक की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंक ने व्यक्तियों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के बीच घरों के भुगतान व्यवहार पर एक सर्वे आयोजित किया, ताकि नकद और डिजिटल भुगतान विधियों के उपयोग और प्राथमिकता को समझा जा सके। वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सर्वे के परिणाम से पता चलता है कि नकदी का उपयोग प्राथमिकता पर बनी हुई है।’
वित्त वर्ष 2026 में चलन में मौजूद नोटों की मजबूत बढ़त से भी यह नजर आता है। मार्च 2026 के आखिर तक चलन में मौजूद नोटों का मूल्य 11.9 प्रतिशत बढ़कर 41.23 अरब रुपये हो गया। संख्या के हिसाब से यह वृद्धि 10.5 प्रतिशत रही।
रिजर्व बैंक ने बताया कि डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ करेंसी-जीडीपी अनुपात भी थोड़ा बढ़कर लगभग 12 प्रतिशत हो गया। 2025-26 के दौरान खुदरा डिजिटल भुगतान की कीमत में 15.1 प्रतिशत और संख्या में 26.9 प्रतिशत की बढ़त हुई। मूल्य के लिहाज से 500 रुपये के नोट की कुल मूल्य में हिस्सेदारी 85.5 प्रतिशत हिस्सा थी।
यह पिछले वर्ष के 86 प्रतिशत से थोड़ा कम है। 10 रुपये और 20 रुपये के छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का 0.7-0.7 प्रतिशत हिस्सा था। संख्या के हिसाब से 500 रुपये के मूल्यवर्ग के बैंक नोटों का प्रचलन में कुल बैंक नोटों में सबसे बड़ा हिस्सा था। इसके बाद 10 रुपये के मूल्य वर्ग के बैंक नोटों का स्थान था। 2025-26 में सिक्योरिटी प्रिंटिंग पर खर्च 4,875.2 करोड़ रुपये आया है, जो इसके पहले के वर्ष में 6,373.8 करोड़ रुपये था।
यह कमी 2025-26 के दौरान बैंक नोटों की मांग में कमी के कारण हुई। वित्त वर्ष 2026 के लिए मांग 2,81,000 लाख (28.1 अरब) पीस थी, जबकि इसके पहले के वर्ष यह 3,03,000 लाख (30.3 अरब) पीस थी।