Budget 2026-27: आगामी यूनियन बजट 2026, जो रविवार, 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा, उससे भारतीय शेयर बाजार किसी बड़े सुधारात्मक कदम की उम्मीद फिलहाल नहीं कर रहा है। बाजार संकेत दे रहे हैं कि इस बार बजट का फोकस बड़े लोकलुभावन ऐलानों के बजाय वित्तीय अनुशासन (Fiscal Discipline) पर रहेगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार पहले ही प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव (पिछले बजट में, जो इस वर्ष से लागू हुए हैं) और जीएसटी के जरिए अप्रत्यक्ष कर सुधार (सितंबर 2025 से प्रभावी) कर चुकी है। ऐसे में बजट 2026-27 में करों को लेकर बड़े ऐलान की गुंजाइश सीमित मानी जा रही है।
हालांकि, विश्लेषकों को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) बढ़ाने पर जोर दे सकती है, खासकर सनराइज और गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में। इनमें डिफेंस, रक्षा से जुड़े उद्योग, आधुनिक तकनीक और नई औद्योगिक क्षमताएं प्रमुख रह सकती हैं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी. के. विजयकुमार के अनुसार, “कर राजस्व की वृद्धि सीमित रहने के कारण सरकार डिसइन्वेस्टमेंट के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की रणनीति अपना सकती है। इसके साथ ही बजट में डिफेंस, रेलवे और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वित्तीय समेकन के रास्ते पर कायम रह सकती है और राजकोषीय घाटे को जीडीपी के करीब 4.2% तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, बाजार की नजर एक स्थिर, संतुलित और विकास-केंद्रित बजट पर है, जिसमें बड़े झटके या चौंकाने वाले फैसलों की बजाय लॉन्ग टर्म आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दी जाएगी।
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केंद्र सरकार द्वारा पेश होने वाले Budget 2026 को लेकर देश की वित्तीय और शेयर बाजारों में उम्मीदों का सैलाब है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी Nomura का मानना है कि सरकार की प्राथमिकता मैक्रो इकॉनमी की स्थिरता बनी रहेगी। बजट में बड़े खर्च की बजाय सुधार और विकास पर ध्यान दिया जा सकता है। संभावित कदमों में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (PLI) का विस्तार, एमएसएमई और निर्यातकों को सहयोग, नियामक सुधार, कुछ खास सेक्टरों के लिए तेजी से मूल्यह्रास (accelerated depreciation), रक्षा क्षेत्र में बढ़ा हुआ पूंजीगत खर्च, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मज़बूत करना और कस्टम ड्यूटी स्लैब का पुनर्संतुलन शामिल हो सकते हैं।
आर्थिक मोर्चे पर Nomura का अनुमान है कि सरकार बजट 2026 में कुल ऋण स्तर (debt level) को FY27 में लगभग 55% जीडीपी तक सीमित करने पर ध्यान देगी, जो FY26 में 56% था। यह कदम 4.2% जीडीपी के राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के अनुरूप होगा। पूंजीगत व्यय (capex) भी लगभग 3.2% जीडीपी पर बनाए रखने की उम्मीद है। वहीं, कुल उधारी ₹17.5 लाख करोड़ के आसपास रहने की संभावना है, जो FY26 में ₹14.8 लाख करोड़ थी।
दूसरी ओर, वैश्विक ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley का मानना है कि बजट में मुख्य ध्यान पूंजीगत व्यय और सामाजिक आधारभूत संरचना (social infrastructure) पर रहेगा। इसके तहत रक्षा क्षेत्र में 12-15% की बढ़ोतरी और कोर इंफ्रास्ट्रक्चर में 8-10% की वृद्धि की संभावना जताई गई है।
Morgan Stanley का कहना है कि निवेशक इस बजट में राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation), पूंजीगत व्यय और सेक्टर विशेष सुधारों पर विशेष ध्यान देंगे। पूंजी बाजार सुधारों के जरिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा, वित्तीय, उपभोक्ता डिस्क्रेशनेरी और औद्योगिक क्षेत्र में अच्छे रिटर्न की संभावना है।
आर्थिक अनुमान के अनुसार, FY27 में राजकोषीय घाटा 4.2% जीडीपी पर रहने की उम्मीद है, जो FY26 में 4.4% था। Morgan Stanley का कहना है कि यह FY23 के बाद सबसे धीमी दर से राजकोषीय समेकन होगा।
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज के अनुसार, केंद्र सरकार अपने मध्यकालीन राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने की राह पर है। वित्त मंत्रालय ने 2021 में तय किया था कि राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.5 प्रतिशत से कम रखा जाएगा, और FY27 से सरकार ‘कर्ज स्थिरता’ (Debt Sustainability) के ढांचे की ओर कदम बढ़ाएगी।
BofA के विश्लेषण के मुताबिक, इस बजट (Budget 2026) में केंद्र सरकार केंद्रीय कर्ज को जीडीपी के 55 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य रख सकती है, जो FY26 में अनुमानित 56.1 प्रतिशत था। इससे न केवल वित्तीय स्थिति संतुलित रहेगी, बल्कि सरकारी खर्च को nominal growth के अनुरूप बनाए रखने में मदद मिलेगी, जिससे अर्थव्यवस्था पर भार नहीं पड़ेगा।
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राजस्व के मोर्चे पर, BofA का मानना है कि सरकार का कुल राजस्व वृद्धि दर 10.7 प्रतिशत साल-दर-साल (Y-o-Y) रह सकता है। इसमें प्रत्यक्ष करों में उचित बढ़ोतरी, GST में हल्की रिकवरी, RBI से अनुमानित ₹2.9 ट्रिलियन के डिविडेंड और विनिवेश (Divestment) से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ शामिल होंगे। इस तरह, कुल राजस्व का जीडीपी में हिस्सा FY27 में 9.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जो FY26 में 9.5 प्रतिशत था।
BofA के अनुसार, FY27 में पूंजीगत व्यय (Capex) का लक्ष्य ₹12.5 ट्रिलियन यानी जीडीपी का 3.2 प्रतिशत रखा जा सकता है। इसका बड़ा हिस्सा रक्षा, रेलवे (सुरक्षा, सिग्नलिंग और रोलिंग स्टॉक), और शिपबिल्डिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में खर्च होगा। वहीं, सड़क, अन्य रेलवे सेक्टर और आवास पर आवंटन अपेक्षाकृत कम रह सकता है।
पिछले 12-18 महीनों में सरकार और RBI ने उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित योजनाओं या किसी भी नए प्रोत्साहन से उपभोक्ता वस्तुएं और डिस्क्रेशनरी सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं।
ऑटो क्षेत्र में बड़े ऐलान की संभावना कम है। हेल्थकेयर सेक्टर उच्च-मूल्य वाली चिकित्सा उपकरणों के आयात पर कस्टम ड्यूटी में कटौती और R&D में निवेश को बढ़ावा देने वाले उपायों की प्रतीक्षा कर रहा है। वहीं, पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से OMCs पर दबाव पड़ सकता है।
BofA का अनुमान है कि सरकार आगामी बजट में कस्टम ड्यूटी स्लैब और टैरिफ संरचना में सुधार कर सकती है। इसमें महत्वपूर्ण इनपुट्स जैसे सेमीकंडक्टर, EV बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर आयात शुल्क कम किया जा सकता है। साथ ही, ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी मामूली बढ़ाई जा सकती है, लेकिन पंप कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है।
FY27 में सरकार का विनिवेश लक्ष्य बढ़कर ₹80,000 करोड़ तक जा सकता है, जो FY26 के ₹40,000 करोड़ का दोगुना है। यह गैर-कर और गैर-कर्ज आधारित राजस्व बढ़ाने की दिशा में कदम होगा।
साथ ही, RBI FY27 में FY26 जैसी उच्च डिविडेंड राशि सरकार को ट्रांसफर कर सकता है। FY26 के लिए RBI से अनुमानित ₹2.9 ट्रिलियन का डिविडेंड मई 2026 में सरकार को मिलेगा, जो गैर-कर राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी का संकेत है।
इस प्रकार, Budget 2026 में सरकार की प्राथमिकता वित्तीय स्थिरता के साथ निवेश और उपभोक्ता खर्च को संतुलित करना रहेगा।
वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट सीमित खर्च और विकासोन्मुखी योजनाओं पर फोकस कर सकता है। ICICI Securities के अनुसार, इस बजट में स्थानीय विनिर्माण और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। साथ ही, ‘ऋण से जीडीपी अनुपात’ में कमी लाकर निजी क्षेत्र में निवेश और क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देने की उम्मीद है।
विशेष रूप से, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत उच्च मूल्य वर्धित क्षेत्रों जैसे ऑटोमोबाइल, अंतरिक्ष, ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर, R&D, फार्मा, रसायन और इलेक्ट्रॉनिक्स में निवेश को बढ़ावा देने की संभावना है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए PLI योजना को या तो बढ़ाया जा सकता है या इसका नया संस्करण पेश किया जा सकता है।
इसके अलावा, टेक्सटाइल और ज्वैलरी जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को, जो अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव से प्रभावित हैं, निरंतर समर्थन मिल सकता है। सरकारी बॉन्ड की उच्च आपूर्ति के कारण ब्याज दरें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं, लेकिन यदि बजट में ऋण/जीडीपी और फिस्कल डेफिसिट को कम करने में कोई सकारात्मक कदम उठाया जाता है, तो इससे ब्याज दरों में नरमी और निजी निवेश में बढ़ोतरी हो सकती है।
Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) के अनुसार, FY27 का बजट 10.1% की नाममात्र जीडीपी वृद्धि को आधार मानकर तैयार किया जा सकता है। बजट में पूंजीगत व्यय (Capex) को 3.1% जीडीपी के लक्ष्य के साथ ₹12.4 ट्रिलियन रखने का अनुमान है। इसमें रक्षा, अवसंरचना, फार्मा, पावर, न्यूक्लियर, इलेक्ट्रॉनिक्स और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।
कुल खर्च में सालाना 7% वृद्धि की उम्मीद है। पूंजीगत व्यय में 10.3% की वृद्धि और राजस्व व्यय में 6% की वृद्धि अनुमानित है। MOFSL ने FY27 के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 4.3% और केंद्र की सकल उधारी ₹16.5 ट्रिलियन रखने का अनुमान लगाया है।
हालांकि, 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की ब्याज दरों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। बॉन्ड की मांग और आपूर्ति के असंतुलन, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इस पर असर डाल सकती हैं।