आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संग्यान लेते हुए केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव तथा उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे नोटिस में गंगा प्रदूषण मामले में चार हफ्ते में रिपोर्ट तलब किया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि गंगा की सफाई तथा और प्रदूषित नहीं होने देने के लिये कौन-कौन से कदम उठाये गये हैं।
आयोग ने नोटिस में कहा है कि स्वच्छ पर्यावरण प्रमुख मानवाधिकारों में शामिल है और ना सिर्फ मौजूदा बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिये पर्यावरण को बचाना बहुत जरूरी है।
पूर्व प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन की अगुवाई में मानवाधिकार आयोग के एक दल ने यहां कल और आज अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों की समस्याओं को सुनने के लिये जनसुनवाई की थी।