पिछले कुछ समय से लगातार चढ़ाई करने वाला सोना अब जैसे ठहर गया है। बाजार में हल्की गिरावट और सुस्ती ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर सोने की तेजी को ब्रेक क्यों लग गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं। आइए जानते हैं उन कारणों को-
केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक बड़े कमोडिटी एक्सचेंजों पर मार्जिन बढ़ा दिए गए हैं। इसका सीधा असर यह हुआ कि सोने में ट्रेडिंग करना पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ने से सट्टा निवेश घटा है और बाजार में नई खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
दुनिया भर में बढ़ते भूराजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंकाओं ने शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ा दिया है। कई निवेशक शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सोना और चांदी बेच रहे हैं। इस वजह से बुलियन बाजार पर फिलहाल बिकवाली का दबाव दिखाई दे रहा है।
सोने में पहले तेज़ बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन अब निवेशकों की खरीदारी थोड़ी धीमी पड़ गई है। बड़े निवेशक अभी भी सोने को लेकर भरोसे में हैं, लेकिन फिलहाल नई बड़ी खरीदारी कम हो रही है। इसी वजह से सोने की कीमतें अभी एक सीमित दायरे में ही घूम रही हैं।
हालांकि भारत में सोने की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। त्योहारों और शादी के सीजन के करीब आने से आभूषणों की खरीद बढ़ने की उम्मीद है। यही मांग कीमतों को नीचे गिरने से बचा सकती है।
इसी बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती ने भी सोने की तेजी को रोक दिया है। आम तौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोने की वैश्विक मांग घट जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने को करीब 5000 डॉलर के आसपास मजबूत सहारा मिल रहा है, जबकि 5400 डॉलर के आसपास बड़ी रुकावट दिखाई दे रही है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और नहीं बढ़ता, तो सोना फिलहाल इसी दायरे में रह सकता है।
घरेलू बाजार की बात करें तो रुपये की कमजोरी से सोने को कुछ सहारा मिल रहा है। हालांकि बाजार का रुख थोड़ा कमजोर बना हुआ है और निकट अवधि में सोना 1,55,000 रुपये से 1,65,000 रुपये के बीच कारोबार कर सकता है।
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों का ट्रेंड साइडवेज है। सुरक्षित निवेश की मांग कीमतों को सहारा दे रही है, लेकिन मजबूत डॉलर तेजी को सीमित कर रहा है।
उन्होंने कहा कि युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता के कारण भारत और यूएई में सोने के आभूषणों की मांग थोड़ी धीमी पड़ी है और निवेशक फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं।
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हालांकि लंबी अवधि की तस्वीर अब भी चमकदार दिख रही है। अनुज गुप्ता के मुताबिक दिवाली 2026 तक सोना 5500 से 5600 डॉलर और चांदी 100 से 110 डॉलर तक पहुंच सकती है।
यानी फिलहाल बाजार शांत जरूर है, लेकिन आगे फिर से बड़ी चाल देखने को मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय एक्सपर्ट की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।