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कौड़ियों के भाव बिक रहा प्याज! लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान, सरकारी दाम पर मचा घमासान

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बेमौसम बारिश और निर्यात में रुकावट से महाराष्ट्र में प्याज के दाम भारी गिर गए हैं, जिससे नाराज किसान सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं

Last Updated- May 18, 2026 | 6:52 PM IST
Onion
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

महाराष्ट्र के प्याज किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बेमौसम बारिश, घरेलू मांग में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात में आ रही बाधाओं के कारण हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब प्याज के खरीदार ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं। किसानों के इसी गहरे संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद कीमत 12.35 रुपये प्रति किलोग्राम तय की है।

हालांकि, सरकार की इस नई कीमत से किसान बिल्कुल भी खुश नहीं हैं, क्योंकि यह उनकी भारी लागत के मुकाबले बेहद कम है। दूसरी तरफ, मंडियों में प्याज के औंधे मुंह गिरे दामों को लेकर अब सूबे में राजनीति भी गरमाने लगी है और विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

देश की सबसे बड़ी मंडी में 1 रुपये किलो तक गिरे दाम

देश में प्याज की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव APMC में भी हालात इस समय बेहद गंभीर बने हुए हैं। मंडी में प्याज के भाव कहने को तो 400 रुपये से लेकर 1,600 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं, लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि करीब 80 प्रतिशत प्याज 800 रुपये प्रति क्विंटल (यानी 8 रुपये प्रति किलो) से भी कम कीमत पर बिक रहा है। मंडी में प्याज का औसत दाम महज 1,050 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है।

किसानों के लिए सबसे बड़ा दर्द यह है कि भाड़ा और मंडी का पूरा खर्च काटने के बाद उनके हाथ में मुश्किल से 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल ही बच पा रहे हैं। जबकि, एक क्विंटल प्याज उगाने में किसान की अपनी जेब से लागत 1,800 रुपये से ऊपर आ रही है।

दाम गिरने की मुख्य वजहें:

  • भारी आवक और कम मांग: थोक मंडियों में अचानक प्याज की आवक बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जबकि घरेलू बाजार में इसकी मांग काफी कम है।

  • अंतरराष्ट्रीय तनाव: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशों में प्याज का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग घट गई है।

  • बेमौसम बारिश का कहर: 19 से 21 मार्च के बीच हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी। जैसे ही नासिक जिले में गर्मियों की प्याज की कटाई शुरू हुई, जोरदार बारिश से तैयार फसल खराब हो गई। इसके बाद भंडारण के दौरान प्याज सड़ने लगा, जिससे थोक मंडियों में प्याज की कीमत गिरकर एक रुपये प्रति किलोग्राम तक लुढ़क गई।

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सरकारी खरीद कीमत से नाखुश क्यों हैं किसान?

किसानों की बदहाली को देखते हुए पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने 12.35 रुपये प्रति किलो की खरीद दर तय करके NAFED को तुरंत खरीद शुरू करने का निर्देश दिया था। लेकिन जमीन पर किसान इस कीमत से पूरी तरह नाखुश हैं। किसानों का साफ कहना है कि यह सरकारी कीमत उनकी असल पैदावार लागत का केवल 62 से 69 प्रतिशत हिस्सा ही कवर कर पाती है।

किसानों के मुताबिक, उन्हें एक किलो प्याज उगाने में 18 से 20 रुपये तक का भारी खर्च उठाना पड़ता है। नासिक के किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद की प्रक्रिया में देरी होने के कारण बिचौलियों और दलालों को फायदा मिल रहा है, जबकि राज्य की कई मंडियों में बेबस किसानों को महज 50 पैसे प्रति किलो के भाव पर अपना प्याज बेचना पड़ रहा है।

30 रुपये किलो खरीद और मुआवजे की मांग

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने अब सरकार के खिलाफ अपनी मांगें तेज कर दी हैं। संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि जब प्याज की उत्पादन लागत ही 18 रुपये प्रति किलो है, तब किसानों का ज्यादातर प्याज मंडियों में 4 से 8 रुपये प्रति किलो के औने-पौने भाव पर बिक रहा है।

संगठन और किसानों की मुख्य मांगें:

  • प्याज का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर तुरंत 3,000 रुपये प्रति क्विंटल (30 रुपये प्रति किलो) किया जाए।
  • जिन किसानों को मजबूरी में अपना प्याज बेहद सस्ते दामों पर बेचना पड़ा है, उन्हें सरकार अलग से आर्थिक सब्सिडी दे।

किसानों ने सरकार को याद दिलाया कि पिछले साल प्याज की खरीद कीमत 2,833 रुपये प्रति क्विंटल थी और उससे पिछले साल यह 2,410 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही थी। इस बार सरकार ने राहत देने के बजाय प्याज खरीद का लक्ष्य भी पिछले साल के 3 लाख टन से घटाकर सिर्फ 2 लाख टन कर दिया है, जिसने किसानों की मुसीबत को और बढ़ा दिया है।

प्याज के संकट पर सूबे में राजनीति तेज

प्याज के गिरते दामों और कम सरकारी खरीद दर को लेकर विपक्ष अब सड़कों पर उतर आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने प्याज किसानों के समर्थन में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर चक्काजाम कर दिया।

शिवसेना (उबाठा) के नेता अंबादास दानवे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “अधिकारियों ने हमारे आंदोलन को दबाने की कोशिश की और अनुमति नहीं दी, लेकिन हम किसानों के हक के लिए यहां आए हैं। हमारी एकमात्र मांग है कि सरकार फसल को सही दाम पर खरीदे। मंडियों में प्याज 25 से 50 पैसे प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है, जो किसानों के साथ सरासर अन्याय है। इसी तंगी के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। केंद्र ने 12.35 रुपये की दर घोषित जरूर की है, लेकिन उस रेट पर भी कोई खरीद नहीं हो रही है।”

दूसरी तरफ, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार भी सोमवार को किसानों के इस बड़े आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने नासिक की लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में किसानों के साथ मिलकर एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली और शक्ति प्रदर्शन किया। रोहित पवार ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए मांग की कि सरकार तुरंत 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की खरीद शुरू करे और संकट में फंसे किसानों को फसल का भारी मुआवजा दे।

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First Published - May 18, 2026 | 6:49 PM IST

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