इसे देश में माओ त्सेतुग का दौर खत्म होने के बाद 1978 में घोषित पहले सुधार पैकेज के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि चीन की आर्थिक वृद्धि दर कुछ साल पहले तक दस प्रतिशत से उपर चल रही थी जो घटते घटते कर पिछले दो साल में 7 प्रतिशत के करीब आ गयी है।
376 सदस्यीय केंद्रीय समिति की बैठक के बाद जारी आधिकारिक विग्यप्ति के अनुसार सुधारों का मकसद चीनी विशिष्टताओं के साथ समाजवाद के विकास को आगे बढाना तथा देश के राजकाज तथा क्षमताओं में सुधार लापना है।
हालांकि चीन पिछले तीन दशक में खुली अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है लेकिन सीपीसी :चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी : अब भी समाजवाद की कसमे खाती है। सीपीसी कहा कि उसका लक्ष्य इस धुर यथार्थ के साथ आगे बढना है कि चीन अब भी समाजवाद के प्राथमिक चरण में है और अभी लम्बे समय तक इस दौर में रहेगा।
चार दिन की बैठक के बाद जारी विग्यप्ति में कहा गया है, आर्थिक सुधार महत्वपूर्ण है और इसका समाधान सरकार तथा बाजार के बीच उपयुक्त संबंध है, बाजार को संसाधनों के आवंटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये छोड़ दिया जाए।
चीन में जमीन का अधिकार निजी मालिकों के लिये अभी पूरी तरह नहीं खुला है। फिलहाल, सभी जमीन सरकार के पास है लेकिन उसे खरीदारों को दीर्घकालीन पट्टे पर बेचा जाता है।
भाषा