उन्हांेने फैसले के तुरंत बाद बोर्ड के बाहर संवाददाताओं से कहा, हम चाहते हैं कि उसे फांसी पर लटकाया जाए। हमारे साथ घृणित खेल खेला गया। हम अपील करेंगे।
पीडि़त की मां ने कहा, मैं फैसले से खुश नहीं हूं। इससे गलत संदेश जाएगा कि जघन्य अपराध करके भी किशोर छूट सकता है।
उन्होंने किशोर आरोपी को कठोरतम सजा देने की मांग की।
पीडि़त के पिता ने कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ उपरी अदालत में जाएंगे क्योंकि किशोर न्याय बोर्ड के फैसले ने कड़ी सजा दिलाने की उनकी आशाओं को झटका दिया।
निराश दिख रहे पीडि़त के पिता ने कहा कि भारत में लड़की के रूप में जन्म लेना अपराध है।
उन्होंने कहा, इसके बाद, मैं कह सकता हूं कि कन्या भू्रणहत्या सही है क्योंकि जो ऐसा करते हैं, उन्हें हमारे जैसे दर्द का अनुभव नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि बोर्ड ने उसे केवल तीन साल के कारावास की सजा दी लेकिन मैं एक चीज के बारे में आपको आश्वासन दे सकता हूं कि वह अपराधी बनेगा और इस बारे में समय बताएगा।
पीडि़त लड़की के छोटे भाई ने नाबालिग आरोपी को कम सजा पर निराशा जताई और कहा, मैंने उसका चेहरा देखा था, उसे कोई पश्चाताप या कोई शर्म नहीं है और उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था।
उन्हांेने कहा कि उसे केवल तीन साल की सजा देना गलत है जबकि वह बलात्कार, लूटपाट और हत्या का दोषी है।
उन्होंने कहा कि 16 साल से अधिक के बच्चों को समझ होती है और वे जानते हैं कि क्या गलत है और क्या सही। वह किशोर सुधार गृह में भी हिंसक था। खबर है कि उसने अन्य कैदियों पर ब्लेड से हमला किया। मैं अपनी बहन को हर मिनट, हर सेकेंड मरते देखा है। मैं उपरी अदालत में गुहार लगाउंगा।