केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने पारेषण संपत्तियों से धन जुटाने को लेकर राज्य सरकारों की ओर से उठाई गई चिंता को दूर करने की कोशिश की है। इसमें राजस्व और भुगतान सुरक्षा से संबंधित मसले भी शामिल हैं।
पिछले सप्ताह मंत्रालय के साथ हुई एक बैठक में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने मॉनिटाइज्ड रेगुलेटेड टैरिफ मैकेनिज्म (आरटीएम) परिसंपत्तियों के लिए राजस्व सुनिश्चित होने, धन जुटाने की प्रक्रिया पर स्पष्टता और एक राज्य से दूसरे राज्य में पारेषण पर शुल्क के मामले में भुगतान सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई थी।
इस बैठक में नैशनल इन्वेस्टमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ), पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड (पीएफसीसीएल) और पावर ग्रिड इनविट के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। मंत्रालय ने अब कहा है कि परियोजनाओं के लिए शुल्क इस तरह से निर्धारित किया जाएगा, जो निवेशकों के लिए उचित राजस्व निश्चितता और नकदी की आवक सुनिश्चित करे। मंत्रालय ने पारेषण परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए कर के लिए सबसे अनुकूल मॉडल के रूप में डीमर्जर मॉडल की भी पहचान की है।
सरकार ने अक्टूबर 2022 में अधिग्रहण, संचालन, रखरखाव और हस्तांतरण (एओएमटी) आधारित सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से पारेषण से जुड़ी संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत जारी किए थे।
मॉडल में परिसंपत्तियों का सीमित अवधि के लिए हस्तांतरण शामिल है। इसमें परिसंपत्तियों की पहचान, एक अलग एसपीवी में उनका डीमर्जर, राज्य विद्युत नियामक आयोग (एसईआरसी) से लाइसेंस प्राप्त करना, तकनीकी और वित्तीय औपचारिकताएं, बोली प्रक्रिया समन्वयकों की नियुक्ति, शुल्क की तैयारी, बोली और मूल्यांकन शामिल हैं। एक राज्य से दूसरे राज्य में पारेषण की परियोजनाओं में ज्यादातर आरटीएम परिसंपत्तियां शामिल हैं। मानदंडों के आधार पर विद्युत नियामक 5 साल की नियंत्रण अवधि के लिए उनका शुल्क तय करता है। प्रत्येक नियंत्रण अवधि के लिए मानदंड बदलते हैं, इसलिए मुद्रीकृत परिसंपत्तियों के नकदी की आवक का अनुमान लगाने में बोलीदाता को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मंत्रालय ने अब अन्य प्रमुख मुद्रीकरण योजनाओं और निजी भागीदारी कार्यक्रमों में पालन की जाने वाली शुल्क नियत की जाने वाली प्रक्रियाओं की जांच के आधार पर एक परिसंपत्ति हस्तांतरण और शुल्क तय करने के दृष्टिकोण की परिकल्पना की है। इस दृष्टिकोण से मुद्रीकृत पारेषण परिसंपत्तियों के लिए शुल्क का निर्धारण करने में मदद मिलने की उम्मीद है, ताकि बोली के समय निवेशकों को राजस्व के बारे में कुछ सटीक जानकारी रहे।
बिजली मंत्रालय ने डीमर्जर या कंसेशन अवार्ड के समय मुद्रीकरण प्रक्रिया माध्यम से संभावित कर देनदारी पर चर्चा और उसका विश्लेषण किया है।
विश्लेषण के आधार पर यह देखा गया कि डीमर्जर मॉडल पारेषण परिसंपत्तियों से धन जुटाने का सबसे प्रभावी मॉडल है। साथ ही कर की देनदारी अलग-अलग मामलों और राज्यों के नियमों व विनियमों के आधार पर अलग हो सकती है, ऐसे में राज्य पारेषण इकाई एक लेन देन सलाहकार नियुक्त करने पर विचार कर सकती है।
मंत्रालय ने कहा है कि वितरण कंपनियों द्वारा एक राज्य से दूसरे राज्य में पारेषण की स्थिति में पारेषण कंपनियों के बकाये का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत ढांचा मौजूद है। यह भुगतान सुरक्षा को लेकर राज्यों की चिंता का ध्यान रखेगा।