अजंता फार्मा के संयुक्त प्रबंध निदेशक राजेश अग्रवाल ने कहा है कि कंपनी चुनिंदा चिकित्सा क्षेत्रों में कमियां दूर करने की तैयारी कर रही है। उसने अधिग्रहण के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी भारत और उभरते बाजारों पर बढ़ोतरी पर जोर दे रही है।
अधिग्रहण कोष का इस्तेमाल विनिर्माण परिसंपत्तियों के बजाय बड़े पैमाने पर ब्रांड और पोर्टफोलियो अधिग्रहण के लिए किया जाएगा। इनमें त्वचाविज्ञान, दर्द निवारण, नेफ्रोलॉजी और स्त्री रोग प्रमुख क्षेत्र रहेंगे। अग्रवाल ने कहा, ‘हम अधिग्रहण के मौके देख रहे हैं। मगर हम हड़बड़ी नहीं हैं। यह बड़े पैमाने पर चिकित्सा के उन क्षेत्रों में प्रवेश या उन पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए होगा जहां कमियां हैं।’
अजंता ने हाल में नेफ्रोलॉजी और स्त्री रोग खंड में प्रवेश किया है। मगर विनिर्माण संबंधी अधिग्रहण की कोई योजना नहीं है।
मोतीलाल ओसवाल रिसर्च के अनुसार, अजंता की बही मजबूत है और अधिग्रहण के लिए पर्याप्त गुंजाइश है। कंपनी के पास शुद्ध नकदी है और लगातार मजबूत परिचालन नकदी कमा रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 25 में 1259 करोड़ रुपये के एबिटा के साथ 4648 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही का 327 करोड़ रुपये के एबिटा के साथ शुद्ध राजस्व 1353 करोड़ रुपये था। नवंबर 2025 में लाभांश में 350 करोड़ रुपये के भुगतान के बाद खातों में शुद्ध नकदी लगभग 400 करोड़ रुपये है।
अजंता की रणनीति के मूल में भारत, एशिया और अफ्रीका में फैला ब्रांडेड जेनेरिक कारोबार है। कंपनी भारत और उभरते बाजारों में सालाना लगभग 150 से 200 उत्पादों का पंजीकरण कराती है।