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अमेरिकी बुखार से पस्त बाजार, दुनिया भर के बाजारों में आई गिरावट

फिच के कदम से निवेशकों को 2011 की याद आ गई, जब एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने ऋण सीमा संकट के बीच रेटिंग घटाकर एए+ कर दी थी।

Last Updated- August 02, 2023 | 11:18 PM IST
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रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch ratings) ने अमेरिकी सरकार के कर्ज की साख घटा दी, जिससे पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में आज अफरातफरी मच गई। भारतीय बाजार को भी इसका झटका लगा और बेंचमार्क सूचकांक 1.5 फीसदी तक लुढ़क गए।

कारोबार के दौरान बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 1,027 अंक तक फिसल गया मगर बाद में नुकसान की कुछ भरपाई करते हुए यह 676 अंक गिरावट के साथ 65,783 पर बंद हुआ। निफ्टी भी दिन में 300 अंक तक टूटा और आखिर में 207 अंक नीचे 19,526 पर बंद हुआ।

फिच रेटिंग्स ने बुधवार को अमेरिका के सॉवरिन ऋण की रेटिंग ‘एएए’ से घटाकर ‘एए+’ कर दी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कर में कटौती, ज्यादा खर्च और आर्थिक अड़चनों की वजह से अगले तीन साल में अमेरिका की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।

फिच के कदम से निवेशकों को 2011 की याद आई

फिच के कदम से निवेशकों को 2011 की याद आ गई, जब एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने ऋण सीमा संकट के बीच रेटिंग घटाकर एए+ कर दी थी। उस समय भी बॉन्ड और शेयरों में जोरदार बिकवाली देखी गई थी।

हालांकि इस बार रेटिंग घटाए जाने से शेयरों में बिकवाली बढ़ी मगर बॉन्ड बाजार अपेक्षाकृत शांत रहा, जिससे निवेशकों की घबराहट कम करने में मदद मिली।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘रेटिंग में कटौती मामूली बात है। इससे हौसला कम होता है और तुरंत कुछ प्रतिक्रिया होगी। 12 साल पहले जब एसऐंडपी ने रेटिंग घटाई थी तब भी देसी बाजार पर बहुत कम असर हुआ था।’

बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि भारत और विदेश से कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बीच पिछले कुछ दिनों से चिंता बढ़ी हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश में कॉरपोरेट कर संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 14 फीसदी कम होकर 1.38 लाख करोड़ रुपये रहा।

भट्ट ने कहा, ‘इससे पता चलता है कि कंपनियों की मुनाफा कमाने की क्षमता शायद घटी है। हालांकि वस्तु एवं सेवा कर संग्रह में सुधार हुआ है लेकिन मार्जिन घटा है।’ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में आर्थिक आंकड़े कमजोर रहने के कारण वहां प्रोत्साहन उपाय किए जाने की उम्मीद है।

देसी संस्थागत निवेशकों ने भी थोड़ी बिकवाली की

चीन में जुलाई में विनिर्माण पीएमआई जून के 49.0 से मामूली बढ़कर 49.3 रहा लेकिन यह 50 से नीचे है जो संकुचन का संकेत देता है।
विश्लेषकों ने कहा कि चीन में प्रोत्साहन की उम्मीद से विदेशी फंडों ने और बिकवाली कर डाली। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,877 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे और देसी संस्थागत निवेशकों ने भी थोड़ी बिकवाली की।

अवेंडस कैपिटल अल्टरनेट स्ट्रैटजीज के मुख्य कार्याधिकारी ऐंड्रयू हॉलैंड ने कहा, ‘चीन में और प्रोत्साहन पैकेज से वहां की अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर पड़ सकता था। लेकिन इससे जिंसों की कीमतों में तेजी भी आ सकती है। इससे भारत को तेल के दाम में कमी का फायदा गंवाना पड़ सकता है। फिच के इस कदम से जोखिम वाली संपत्तियों में बिकवाली को बढ़ावा मिल सकता है।’

पहले से तय थी विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली 

हॉलैंड ने कहा कि भारत का बाजार तेजी से बढ़ रहा है मगर विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली पहले से तय थी। उन्होंने कहा, ‘सितंबर के दूसरे पखवाड़े से बाजार को नई रफ्तार मिल सकती है, जो सरकारी खर्च और निजी पूंजीगत व्यय के कारण आएगी। निकट भविष्य में जिंसों और कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ने के अलावा कोई जोखिम नहीं है।’

बाजार में 2,428 शेयर नुकसान में और 1,176 बढ़त पर बंद हुए। बीएसई पर सूचीबद्ध फर्मों के कुल बाजार पूंजीकरण में 3.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। एचडीएफसी बैंक 1.25 फीसदी की गिरावट पर बंद हुआ और सेंसेक्स की गिरावट में इसका सबसे ज्यादा योगदान रहा।

First Published - August 2, 2023 | 11:18 PM IST

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