facebookmetapixel
Advertisement
LIC Share Crash: सरकार ने शुरू किया OFS, 8% टूटे शेयर; खरीदने का मौका या बढ़ेगा जोखिम?Dhoot Transmission IPO: 10 अगस्त से लगा सकेंगे पैसा, जानें क्या है कंपनी की पूरी तैयारीAegeus Technologies IPO: आज खुला ₹23.71 करोड़ का इश्यू , क्या मिलेगा लिस्टिंग गेन? निवेश से पहले जान लें हर जरूरी बातबाल झड़ने से विटिलिगो तक, Sun Pharma के लिए खुल रहे अरबों डॉलर के बाजारRBI MPC Meeting: क्या फिर नहीं बदलेगी ब्याज दर? महंगाई के बीच रीपो रेट पर टिकी बाजार की नजरGold Silver Price Today: हॉर्मुज स्ट्रेट दुबारा खुलने की संभावना से सोना ₹644 तेज, चांदी ₹1,397 चढ़ीट्रंप के टैरिफ के खिलाफ 25 राज्य अदालत पहुंचे, सेक्शन 301 पर क्यों बढ़ा विवाद?Pricol क्यों कर रही है डीमर्जर? कंपनी ने बताया आगे का बड़ा प्लान8% से कम ब्याज पर लोन नहीं! बड़े बिल्डरों को मना कर रही LIC Housing Finance, जानिए क्यों बदली रणनीतिBajaj Finserv Direct के ब्रेक-ईवन का समय तय, कंपनी ने दी नई समयसीमा

बीमा क्षेत्र को 50,000 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी की जरूरत

Advertisement

देश में बीमा की पहुंच दोगुनी करने के लिए मौजूदा बीमा कंपनियों की ओर से हर साल 50,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त पूंजी लगाने की जरूरत है।

Last Updated- January 21, 2023 | 9:46 AM IST
Insurance

देश में बीमा की पहुंच दोगुनी करने के लिए मौजूदा बीमा कंपनियों की ओर से हर साल 50,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त पूंजी लगाने की जरूरत है। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के चेयरमैन देवाशिष पांडा ने शुक्रवार को कहा कि यह मुनाफे के इस्तेमाल व नए निवेश दोनों तरीकों से हो सकता है।

बीमा से जुड़े सीआईआई के एक कार्यक्रम में पांडा ने कहा, ‘मार्च के बाद मैं सभी बीमा कंपनियों के चेयरपर्सन से मुलाकात करूंगा, जिससे वे इस दिशा में काम कर सकें और ज्यादा पूंजी लगाने की योजना बना सकें। मुझे खुशी है कि कुछ कंपनियों ने पहले ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।’

पांडा ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), महंगाई दर और इस अवधि के दौरान विश्व की जीडीपी में वृद्धि के अनुमान के मुताबिक आया है। उन्होंने कहा, ‘हम बीमा की पहुंच दोगुना करना चाहते हैं। इसके लिए जरूरी है कि इस सेक्टर में पूंजी आए। हमने अनुमान लगाया है कि जीडीपी कितनी बढ़ेगी और इस दौरान महंगाई दर की क्या स्थिति रहेगी और वैश्विक जीडीपी की क्या स्थिति रहेगी। इसके आधार पर कुछ मॉडल बनाए गए हैं और मोटे तौर पर इस तथ्य पर पहुंचे हैं कि अगर इस सेक्टर में साल में 50,000 करोड़ रुपये निवेश होता है तो हम 5-7 साल में बीमा की पहुंच दोगुनी करने में सफल होंगे।’

भारत में बीमा की पहुंच 2021-22 में भी 2020-21 के स्तर 4.2 प्रतिशत पर बनी रही। जीवन बीमाकर्ताओं की पहुंच 3.2 प्रतिशत और गैर जीवन की 1 प्रतिशत रही है। लेकिन बीमा घनत्व 2020-21 के 78 डॉलर से बढ़कर 2021-22 में 91 डॉलर पर पहुंच गया है। बीमा की पहुंच का मापन जीडीपी के प्रतिशत में बीमा प्रीमियम के हिसाब से मापा जाता है, जबकि बीमा के घनत्व की गणना जनसंख्या और प्रीमियम के अनुपात (प्रति व्यक्ति प्रीमियम) में की जाती है। पांडा ने बीमा के क्षेत्र में देश के समूह और व्यक्तिगत निवेशकों के निवेश की भी वकालत की। उन्होंने कहा, ‘मैं देश में मौजूद कंपनियों के समूह तक पहुंचना चाहता हूं और साथ ही उन व्यक्तिगत निवेशकों तक पहुंचना चाहता हूं, जो अपने धन के निवेश को इच्छुक हैं।’

अगर आप बीमाकर्ताओं के इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) देखें तो शीर्ष 5 बीमाकर्ताओं का आरओई करीब 20 प्रतिशत है। गैर जीवन और जीवन बीमा क्षेत्र का आरओई क्रमशः 16 प्रतिशत और 14 प्रतिशत है। पांडा ने कहा कि इस वक्त में मौजूद फंड को बीमा क्षेत्र में जोड़ने की जरूरत है।

Advertisement
First Published - January 21, 2023 | 9:46 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement