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सात तिमाहियों में पहली बार शेयरों में घटा देसी कंपनियों का स्वामित्व

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हिस्सदारी जून तिमाही में बढ़कर 18.94 फीसदी हो गई, जो इससे पिछली तिमाही में 18.87 फीसदी रही थी।

Last Updated- August 07, 2023 | 10:15 PM IST
FPI Trend: Continuous selling by foreign investors stopped, buyers became buyers after two months, pumped Rs 15,446 crore into the market विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दौर थमा, दो महीने बाद बने खरीदार, बाजार में झोंके 15,446 करोड़ रुपये

विदेशी फंडों की तरफ से निवेश में बढ़ोतरी के बीच देसी निवेशकों (वैयक्तिक व संस्थागत) का स्वामित्व एनएसई में सूचीबद्ध‍ कंपनियों में सात तिमाहियों में पहली बार घटा है। जून 2023 की तिमाही में यह 25.50 फीसदी रहा, जो मार्च 2023 में 25.73 फीसदी रहा था। प्राइम डेटाबेस से यह जानकारी मिली।
प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, बाजारों के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के कारण एलआईसी, म्युचुअल फंडों, खुदरा व धनाढ्य निवशकों की तरफ से मुनाफावसूली के कारण देसी स्वामित्व में गिरावट आई है। देसी संस्थागत निवेशकों की तरफ से शुद्ध‍ निवेश तिमाही के दौरान महज 3,368 करोड़ रुपये रहा।
इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हिस्सदारी जून तिमाही में बढ़कर 18.94 फीसदी हो गई, जो इससे पिछली तिमाही में 18.87 फीसदी रही थी। एफपीआई की शेयरधारिता में इजाफा जून तिमाही में उनकी तरफ से हुए 1.02 लाख करोड़ रुपये के निवेश के कारण हुआ। जून तिमाही 2015 के बाद रुख में थोड़ा परिवर्तन दिखाती है जब देसी निवेशकों की पकड़ बढ़ी थी और विदेशी फंडों की पकड़ कम हो रही थी।
देसी म्युचुअल फंडों की हिस्सेदारी जून तिमाही में घटककर 8.64 फीसदी रह गई, जो लगातार सात तिमाहियों तक बढ़ती रही थी। देसी म्युचुअल फंडों की तरफ से शुद्ध‍ निवेश तिमाही के दौरान 2,979 करोड़ रुपये रहा।
बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी जून तिमाही में घटकर 5.67 फीसदी रह गई, जो मार्च तिमाही में 5.87 फीसदी रही थी। बीमा कंपनियों की बात करें तो इक्विटी में निवेश में एलआईसी की हिस्सेदारी उच्चस्तर पर बनी हुई है। एलआईसी का हिस्सा 11.16 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 68 फीसदी रहा। एलआईसी का निवेश 273 कंपनियों में है और उनमें हिस्सेदारी एक फीसदी से ज्यादा है। हालांकि जून तिमाही में यह घटकर 3.85 फीसदी पर आ गया, जो मार्च में 3.99 फीसदी रहा था।
देसी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी जून तिमाही में घटककर 16.07 फीसदी रह गई, जो मार्च तिमाही में 16.36 फीसदी रही थी और लगातार छह तिमाहियों में इनमें इजाफा होता रहा था।
खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी जून तिमाही में 7.49 फीसदी पर स्थिर
प्राइम डेटाबेस ने अपनी विज्ञप्ति में कहा, एफपीआई और देसी संस्थागत निवेशकों के निवेश का अंतर इस तिमाही में बढ़ा है और देसी संस्थागत निवेशकों का निवेश 15.19 फीसदी है, जो एफपीआई के मुकाबले कम है।
खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी जून तिमाही में 7.49 फीसदी पर स्थिर बनी रही। उधर, इस अवधि में एचएनआई की हिस्सदारी 1.8 फीसदी से बढ़कर 1.94 फीसदी पर पहुंच गई। खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी अपरिवर्तित रही जबकि वे 25,497 करोड़ रुपये के शुद्ध‍ बिकवाल रहे।
जून में खुदरा व एचएनआई की संयुक्त हिस्सेदारी 9.43 फीसदी रही, जो मार्च तिमाही में 9.37 फीसदी रही थी।
कंपनियों में निजी प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 41.97 फीसदी से बढ़कर 42.17 फीसदी पर पहुंच गई। प्राइम डेटाबेस ने कहा कि निजी प्रवर्तकों की हिस्सेदारी जून 2009 के 33.60 फीसदी से लगातार बढ़ रही है। निजी क्षेत्र के भारतीय प्रवतकों की हिस्सेदारी इस अवधि में 26.44 फीसदी से बढ़कर 34.16 फीसदी पर पहुंच गई और विदेशी प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 7.16 फीसदी से बढ़कर 8.01 फीसदी हो गई।
सरकार की हिस्सेदारी भी जून तिमाही में मामूली बढ़कर 7.78 फीसदी हो गई, जो मार्च में 7.75 फीसदी रही थी। सरकार का स्वामित्व लगातार घट रहा है, जो जून 2009 में 22.48 फीसदी रहा था। सरकार के विनिवेश कार्यक्रम, अपर्याप्त नई सूचीबद्ध‍ता और कई सीपीएसई का प्रदर्शन निजी कंपनियों के मुकाबले सुस्त रहने के कारण ऐसा हुआ है।

First Published - August 7, 2023 | 10:15 PM IST

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