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टेलीकॉम कंपनियां टावर लगाने के लिए कर सकेंगी रेलवे की जमीन का इस्तेमाल

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Last Updated- December 26, 2022 | 12:06 PM IST
Railways

सरकार ने दूरसंचार कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए रेलवे को सेवाएं प्रदान करने का रास्ता साफ कर दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के अनुसार रेल मंत्रालय ने निजी कंपनियों के लिए अपनी दूरसंचार सेवाओं का दरवाजा खोलते हुए उन्हें रेलवे की जमीन पर दूरसंचार टावर स्थापित करने की भी अनुमति दे दी है। अब तक यह अ​धिकार रेलवे की दूरसंचार इकाई- रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास ही था।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए रेलवे भूमि के लाइसेंस शुल्क (एलएलएफ) मानदंडों में ढील दिए जाने के कुछ महीने बाद यह पहल की गई है। नई एलएलएफ नीति के अनुसार मोबाइल टावरों के लिए 7 फीसदी राजस्व हिस्सेदारी की मौजूदा दरें खत्म कर दी गई हैं। इसके बजाय अब भूमि के बाजार मूल्य का 1.5 फीसदी वार्षिक भूमि उपयोग शुल्क लागू किया जाएगा।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने नीति का दस्तावेज देखा है, जिसके मुताबिक यह पहल देश में 5जी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए की गई है। रेलवे के क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि अनुमति देते समय रेलवे की भविष्य की नेटवर्क जरूरतों पर प्रमुखता से गौर किया जाए।
मामले की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ अ​धिकारियों ने कहा कि इस पहल से रेलवे में बड़ी निजी भागीदारी का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा, ‘अब तक हमारी दूरसंचार जरूरतें केवल रेलटेल के लिए खुली थीं। अब हमारी निविदाएं उन निजी कंपनियों के लिए भी खुलेंगी, जो दूरसंचार टावर स्थापित करती हैं। चूंकि वे उन टावरों का उपयोग वा​णि​ज्यिक तौर पर भी करेंगी, इसलिए रेलवे प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण प्रक्रिया के तहत उस बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करेगा।’

वर्ष 2016 में मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर रेलटेल को छोड़कर किसी भी अन्य कंपनी को रेलवे की जमीन पर टावर खड़ा करने से रोक दिया था। मगर अब यह आदेश वापस ले लिया गया है। नई नीति में रेलवे के 70 मंडलों के रेलवे कार्यालयों एवं स्टेशन परिसरों में खंभों (पोल) पर उपकरण एवं छोटे सेल लगाने की अनुमति दी गई है।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले ही खबर दी थी कि अपने तंत्र की 5जी सेवाओं तक पहुंच अपनी सुनिश्चित करने के लिए रेल मंत्रालय निजी दूरसंचार कंपनियों के साथ चर्चा कर रहा है।

दूरसंचार क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने कहा कि निजी इकाइयों को रेलवे की जमीन पर दूरसंचार टावर लगाने की अनुमति मिलने से खर्च कम होगा, क्षमता बढ़ेगी और बेहतर ग्रिड प्लानिंग में भी मदद मिलेगी। प्रतिनिधियों ने कहा कि खंभों पर दूरसंचार उपकरण एवं सेल लगाने की अनुमति मिलने से व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचा विकसित करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मसले अभी निपटाने होंगे। नवीनतम दिशानिर्देशों में कहा गया है कि टावर लगाने वाली कंपनियों को इनका इस्तेमाल विज्ञापन के लिए करने की अनुमति नहीं होगी। मगर रेलवे ने टावरों का इस्तेमाल अपने विज्ञापनों के लिए करने का अधिकार
सुरक्षित रखा है।

इस बारे में टावर लगाने वाली एक कंपनी के अधिकारी ने कहा,’अगर निजी कंपनियां टावर लगाती और संभालती हैं तो उन्हें आय के एक स्रोत के रूप में टावर का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसमें किसी तरह की परेशानी मुझे नजर नहीं आती है।’

इतना ही नहीं, रेलवे जब चाहे दो महीने का अग्रिम नोटिस देकर अपनी जमीन वापस ले सकता है। 2016 में रेलटेल के मामले में भी यह प्रावधान लागू किया गया था।

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First Published - December 26, 2022 | 11:49 AM IST

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