facebookmetapixel
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच SME मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स बढ़ा, बजट से मिलेगा और सहाराEPFO 3.0 के साथ PF सिस्टम में बड़ा बदलाव: नया पोर्टल, कोर बैंकिंग और AI से सेवाएं होंगी आसानGold Jewellery Sales: कीमतों में तेजी के बावजूद सोने की चमक बरकरार, दिसंबर में ज्वेलरी बिक्री 12% बढ़ीSBI MF ने उतारा क्वालिटी फंड, ₹5,000 से निवेश शुरू; किसे लगाना चाहिए पैसा?मर्सिडीज, BMW, ऑडी जैसी प्रीमियम कारें होंगी सस्ती! India-EU FTA का घरेलू ऑटो सेक्टर पर कैसे होगा असर₹2 लाख से ₹12 लाख तक: 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इनकम टैक्स में अब तक क्या बदला?Budget 2026: क्या म्युचुअल फंड पर घटेगा टैक्स?Budget 2026 की इनसाइड स्टोरी: वित्त मंत्री की टीम में शामिल ये 7 ब्यूरोक्रेट्स बनाते हैं ‘ब्लूप्रिंट’Edelweiss MF ने उतारा नया फंड, ₹100 की SIP से फाइनेंशियल कंपनियों में निवेश का मौकाRealty Stock में बन सकता है 65% मुनाफा! Q3 नतीजों के बाद ब्रोकरेज सुपर बुलिश; कर्ज फ्री हुई कंपनी

इलेक्ट्रिक दोपहिया विनिर्माता चाह रहे GST में सुधार

उद्योग की कंपनियां ईवी के प्रमुख पुर्जों पर जीएसटी दरों में कटौती की मांग कर रही हैं ताकि उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों पर अंतिम बिक्री कर के अनुरूप किया जा सके।

Last Updated- March 31, 2024 | 11:30 PM IST
ई-दोपहिया पर स​ब्सिडी जारी रखने की मांग, Demand to continue subsidy on e-two-wheeler

इलेक्ट्रिक दोपहिया विनिर्माता जीएसटी संरचना में सुधार चाह रहे हैं, क्योंकि वे इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर कम आउटपुट जीएसटी (पांच प्रतिशत) की तुलना में कलपुर्जों पर अ​धिक इनपुट जीएसटी (18 से 28 प्रतिशत) का दावा करते हैं। इससे उलट शुल्क संरचना बनती है, जिससे विनिर्माताओं की पूंजी फंस जाती है।

उद्योग का मानना है कि उद्योग के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है, खास तौर पर स्टार्टअप कंपनियों के लिए क्योंकि इससे लागत बढ़ जाती है और कार्यशील पूंजी का प्रबंधन करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने जीएसटी अनुपालन सुनिश्चित करने और संभावित रूप से इनपुट कर दर कम करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों, सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं तथा तीव्र रिफंड की आवश्यकता पर जोर दिया है।

इस असमानता से ‘उलट शुल्क संरचना’ बनती है जहां इनपुट पर भुगतान किया गया कर बिक्री पर एकत्रित किए गए कर से अधिक होता है। इस स्थिति से विनिर्माताओं की कार्यशील पूंजी अटक जाती है क्योंकि उन्हें पुर्जों पर भुगतान किए गए अतिरिक्त कर पर रिफंड का इंतजार करना पड़ता है। इस कर संरचना से ईवी की विनिर्माण लागत भी बढ़ जाती है।

उद्योग की कंपनियां ईवी के प्रमुख पुर्जों पर जीएसटी दरों में कटौती की मांग कर रही हैं ताकि उन्हें इलेक्ट्रिक वाहनों पर अंतिम बिक्री कर के अनुरूप किया जा सके। इस कदम से ईवी विनिर्माताओं पर वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा जिनमें से कई सीमित संसाधनों वाली स्टार्टअप कंपनियां हैं।

ओबेन इलेक्ट्रिक की संस्थापक और मुख्य कार्या​धिकारी मधुमिता अग्रवाल ने कहा, ‘हमारे जैसे ओईएम के लिए जीएसटी की सपाट संरचना, जहां पुर्जों पर कर दर तैयार वाहनों पर कर दर के समान हो, एक बड़ी राहत होगी।’

First Published - March 31, 2024 | 11:30 PM IST

संबंधित पोस्ट