स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने स्वीकार किया कि 2010 से स्थानीय नागरिकों पर ड्रग के परीक्षण के बिना करीब 26 नये ड्रग को मंजूरी दी गयी है।
देश के शीर्ष दवा नियामक केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन :सीडीएससीओ: ने पिछले साल आठ नये ड्रग को मंजूरी दी थी। इस साल अब तक दो दवाओं को बिक्री की मंजूरी दी जा चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि नये ड्रग्स को क्लीनिकल परीक्षण किये बिना पर्याप्त सावधानी के साथ मंजूरी प्रदान की गयी है।
अधिकारियों के मुताबिक ये वे दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल आपातकालीन स्थिति में किया जाता है और देश में इस तरह की बीमारियों के मामले दुर्लभ होने तथा रोगियों की संख्या कम होने के कारण यहां ट्रायल संभव नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि विशेषग्यों की राय के बाद ही इन दवाओं को मंजूरी प्रदान की जा रही है।
संसदीय समिति ने भारत में इस्तेमाल के लिए बिना परीक्षण के दवाओं को मंजूरी देने पर दवा नियंत्रक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि इनमें से कई ड्रग मेडिकल आपात स्थिति की श्रेणी में नहीं आते।
स्वास्थ्य मंत्रालय एक नये ड्रग और कॉस्मेटिक कानून के मसौदे के साथ तैयार है जिसमें एक अलग अध्याय में क्लीनिकल ट्रायल के लिहाज से नियम हैं।