यूनेस्को द्वारा पश्चिमी घाटों के 39 जैव विविधता स्थलों को वैश्विक धरोहर का दर्जा देने पर विभिन्न राज्यों की प्रतिक्रिया बंटी हुयी है।
कुछ राज्य यूनेस्को के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं वही कुछ इसका विरोध जता रहे हैं।
साथ ही पर्यावरणविदों ने इस फैसले का स्वागत करते हुये कहा कि भारत सरकार हिमालय से भी प्राचीन 16000 किलोमीटर तक फैले इन पर्वतों का संरक्षण करने के लिये जिम्मेदार है।
केरल के 20 स्थलों को धरोहरों की सूची में शामिल किया गया है। केरल ने इस फैसले का स्वागत किया है। राज्य के वन मंत्री के बी गणेश कुमार ने पीटीआई से कहा, हम फैसले का स्वागत करते हैं। पश्चिमी घाटों के विभिन्न स्थलों का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।
हालंाकि कर्नाटक ने इस फैसले के विरोध में अपना स्वर तेज कर दिया है।
राज्य के वन मंत्री सी पी योगेेश्वर के अनुसार इन स्थानों के वैश्विक धरोहर घोषित होने से इस क्षेत्र में विकास कार्यक्रम प्रभावित होेंगे।
भाषा