मादक पदार्थों के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि अधिकारियों द्वारा जब्त किये गये ऐसे पदार्थों को नष्ट किया जाना चाहिए ताकि इन्हें फिर से बाजार में पहुंचने से रोका जा सके।
न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति ग्यान सुधा मिश्रा की पीठ ने सभी राज्य सरकारों से कहा है कि अधिकारियों द्वारा इस तरह की सामग्रियों के जब्त किये जाने, रखने और नष्ट करने संबंधी व्यापक रिपोर्ट जमा की जाएं।
पीठ ने कहा, समस्या व्यापक और भयावह है। देश में मुश्किल से ही आज कोई प्रदेश होगा जो बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों के उत्पादन, आवाजाही, बाजार में पहुंचने और इनके दुरुपयोग से प्रभावित नहीं होगा।
पीठ ने कहा कि एनडीपीएस :मादक पदार्थ और मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले तत्वों: के उत्पादन, बिक्री और परिवहन के खिलाफ लड़ाई जारी प्रक्रिया है, वहीं यह सुनिश्चित करना भी उतना ही अहम है कि पुलिस तथा अन्य एजेंसियों द्वारा जब्त ऐसे पदार्थ लापरवाही या उदासीनता से फिर से लोगों के हाथों में नहीं पहुंचेंं।
पीठ ने इस संबंध में सरकारी अधिकारियों के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली भी जारी की।
अदालत ने कहा, अध्ययन बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवा नशीले पदार्थों के शिकार हैं और दुखदाई प्रभावों को झेल रहे हैं। इसलिए हालात काबू से बाहर होने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने जरूरी हैं। इसलिए हम राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से प्रत्येक राज्य के पुलिस प्रमुख से सूचना एकत्रित करना जरूरी समझते हैं।
पीठ ने केंद्र की इस दलील पर सहमति जताई कि राज्य जब्त नशीले पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया नहीं अपना रहे हैं।