बिजनेस स?टैंडर?ड - जांच-परख से गति को मिलेगी शक्ति
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जांच-परख से गति को मिलेगी शक्ति

श्रेया नंदी / नई दिल्ली May 11, 2022

सरकारी विभागों और मंत्रालयों को अब 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजटीय परिव्यय वाली सभी सार्वजनिक वित्त पोषित परियोजनाओं की जांच-परख करनी होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने से पहले ऐसी परियोजनाओं में लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े घटक हों।

वित्त मंत्रालय ने हाल ही के निर्देश, जिसे बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी देखा है, में कहा है कि सभी सार्वजनिक वित्त पोषित परियोजनाओं की जांच-परख एक अंतर-मंत्रालयी निकाय, पीएम गतिशक्ति के तहत - नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप द्वारा की जाएगी और देखा जाएगा कि क्या सभी सरकारी विभाग किसी परियोजना की अवधारणा वाले चरण में एक दूसरे के साथ मिलकर समन्वय और कार्य

कर रहे हैं।  यह निर्देश वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा सभी मंत्रालयों के सचिवों, रेलवे बोर्ड और सरकार की नीति के थिंक टैंक नीति आयोग को पिछले महीने के आखिर में भेजा गया था और यह पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के तहत परियोजना कार्यान्वयन पर दिए जा रहे ध्यान के ही अनुरूप है।

आम तौर पर बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं में देरी हो जाती है, क्योंकि मंत्रालय अलग-थलग होकर काम करते हैं या परियोजना कार्य शुरू होने के बाद वन्य, खनन या तटीय विनियमन क्षेत्र की मंजूरी संबंधी बाधाओं को झेलना पड़ता है। कई बार सरकारी विभागों को इस बात का एहसास होता है कि किसी आर्थिक क्षेत्र के किसी खास हिस्से में ऑप्टिकल फाइबर नहीं बिछाया जा सकता है। इस तरह की घटनाओं से परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी होती है, खास तौर पर बुनियादी ढांचे से संबंधित।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि परियोजना की अवधारणा वाले चरण में सरकारी विभागों के साथ एकीकरण से सुनिश्चित होगा कि बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं में देरी न हो, क्योंकि अब सरकार परियोजना के कार्यान्वयन से पहले रुकावट का पूर्वानुमान लगा सकेगी।

इस निर्देश के अनुसार इस नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी), जिसमें बुनियादी ढांच वाले संबंधित मंत्रालयों के नेटवर्क प्लानिंग विंग के प्रमुख शामिल हैं, को अपने व्यावहारिक अध्ययन वाले चरण में संयोजन और एकीकरण के लिए प्रस्तावित परियोजना की जांच करनी होगी।

निर्देश में कहा गया है कि इसके बाद एनपीजी की सिफारिशों को सार्वजनिक निवेश बोर्ड को सौंपना होगा। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि यह परियोजना पीएम गतिशक्ति के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रही है।

सार्वजनिक निवेश बोर्ड 500 करोड़ रुपये से अधिक वाली प्रत्येक निवेश परियोजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजे जाने से पहले उसका मूल्यांकन करता है।

अधिकारी ने कहा 'वित्त मंत्रालय के नवीनतम निर्देश से प्रधानमंत्री के गतिशक्ति कार्यक्रम का प्रभाव दिखाई देगा।'

Keyword: जांच-परख, लॉजिस्टिक, बुनियादी ढांचा, पीएम गतिशक्ति, सार्वजनिक वित्त पोषित परियोजना,
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