उन्होंने कहा, वास्तव में भारत की वास्तविकता को प्रस्तुत करने में योजना आयोग अक्षम रहा है और इससे यह तथ्य उभरकर आता है कि उसने दो डिब्बे में से एक डिब्बे के सभी भारतीयों को एपीएल और बीपीएल में वर्गीकृत कर दिया है। उसमें आप या तो बीपीएल है, जिसका मतलब है कि आप गरीबी रेखा के नीचे हैं या आप एपील हैं जिसका तात्पर्य है कि आप गरीबी रेखा से उपर है।
एलायंस फार इंटेग्रिटी-चिजलिंग द वे फारवर्ड पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन संयुक्त रूप से उद्योग मंडल फिक्की तथा जर्मनी के जीआईजेड ने किया था।
योजना आयोग ने जुलाई में कहा था कि गांवों तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में कमी आयी है।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार जो लोग शहरों में अपने उपर रोजाना 33.33 रपये से अधिक तथा गांवों में 27.20 रपये प्रतिदिन से अधिक व्यय करते हैं, वे गरीब नहीं हैं।
जारी भाषा