भारत के ऑफिस बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) और बड़ी कंपनियों द्वारा बिल्ट-टु-सूट (बीटीएस) विकास और प्री-कंस्ट्रक्शन लीजिंग में बढ़ोतरी देखी जा रही है ताकि ग्रेड ए ऑफिस आपूर्ति में कमी के बीच बढ़त बनी रहे। प्रमुख शहरों में मांग तीन बड़ी श्रेणियों में केंद्रित हो रही है- वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी), डेटा सेंटर और बड़े फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर।
प्रॉपस्टैक के सह-संस्थापक राजा सीताराम ने कहा, ‘मुंबई में जेपी मॉर्गन का विस्तार और बेंगलूरु में गूगल के बड़े कैंपस कमिटमेंट जैसे अहम सौदों से जाहिर होता है कि कैसे जीसीसी पूरा होने से बहुत पहले ही भविष्य के लिए तैयार, ग्रेड ए कैंपस को बुक कर ले रहे हैं। इसी तरह, प्रिंसटन डिजिटल ग्रुप की डील तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर सेगमेंट के खास, बिल्ट-टु-सूट नेचर को दिखाती है।’ उनके अनुसार प्री-कमिटमेंट गतिविधियों में स्पष्ट रूप से बड़ा बदलाव आ रहा है।
पूरे बाजार में उबर, टीसीएस, बैंक ऑफ अमेरिका, अमेरिकन एक्सप्रेस, ऑपम, डीएक्ससी टेक्नॉलजी, ईटॉन और डेलॉइट जैसी कंपनियों ने 2025 में लीजिंग में बढ़त बनाने के लिए बड़े ऑफिस ब्लॉक पहले से ही लीज पर ले लिए हैं।
एनारॉक ग्रुप के कमर्शियल लीजिंग ऐंड एडवाइजरी के प्रबंध निदेशक पीयूष जैन ने कहा, ‘जमीन की कमी या मंजूरी की धीमी प्रक्रिया की वजह से प्रमुख लोकेशन पर बड़े, रेडी-टु-मूव ग्रेड ए ऑफिस स्पेस की कमी को ध्यान में रखते हुए बड़ी कंपनियां सही बीटीएस स्पेस की तलाश पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
इसके अलावा, डेवलपर पिछले वर्षों की तरह ऑफिस स्पेस की अधिक आपूर्ति और बढ़ती फाइनैंसिंग लागत को लेकर सतर्क हैं। साथ ही, जीसीसी, आईटी/ इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी-इनेबल्ड सर्विसेज (आईटीईएस), बैंकिंग वित्तीय सेवा एवं बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र की मांग लगातार बढ़ रही है। इस तरह के बीटीएस प्रोजेक्ट्स काम आते हैं क्योंकि इन कंपनियों को कस्टमाइज्ड लेआउट, मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिक्योरिटी और स्केलेबिलिटी की जरूरत होती है।’
कुशमैन एंड वेकफील्ड में टेनेंट रिप्रेजेंटेशन के कार्यकारी एमडी वीरा बाबू इस रुझान को अस्थायी तेजी के बजाय मजबूत बदलाव बताते हैं।