स्कोडा ऑटो इंडिया सीएनजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) जैसी स्वच्छ ईंधन तकनीकों पर अपना ध्यान बढ़ा रही है, जबकि कॉम्पैक्ट एसयूवी काइलैक इस ब्रांड के प्रमुख विकास इंजन के तौर पर उभर रही है। देश की सबसे प्रतिस्पर्धी श्रेणी में शामिल यह गाड़ी बिक्री और ग्राहक आधार दोनों ही बढ़ा रही है। हालांकि ईवी लाना स्कोडा की दीर्घकालिक कार्य योजना का हिस्सा बना हुआ है। लेकिन कंपनी सीएनजी को लेकर ज्यादा आगे चल रही है।
अभी कॉम्पैक्ट एसयूवी श्रेणी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा सीएनजी पर चल रहा है। स्कोडा ऑटो इंडिया के ब्रांड निदेशक आशिष गुप्ता ने कहा कि कंपनी काइलैक के मामले में फैक्टरी से ही मिलने वाले सीएनजी मॉडल पर सक्रियता से काम कर रही है। गुप्ता ने कहा, ‘यह स्पष्ट मौका है।’
उन्हों कहा कि आंतरिक और समूह स्तर पर समाधान सहित कई तकनीकी तरीकों का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि स्कोडा थर्ड-पार्टी रेट्रोफिट (मॉजूदा मॉडल में बाद में अतिरिक्त सुधार या फेरबदल) पर विचार नहीं कर रही है। जब भी कोई सीएनजी पेशकश होगी, वह फैक्टरी में ही तैयार होगी। हालांकि उन्होंने समय-सीमा नहीं बताई है, लेकिन संकेत दिया कि सीएनजी जल्द ही आ सकती है।
ईवी के संबंध में गुप्ता का रुख ज्यादा सतर्क दिखा। उन्होंने कहा, ‘अगर आप भारत में कोई अहम भागीदार बनना चाहते हैं, तो आपके पास ईवी होना ही चाहिए।’ उन्होंने पुष्टि की कि बातचीत चल रही है और भारतीय बाजार के लिए भारत में बनी ईवी पर ध्यान केंद्रित है, जिसमें निर्यात का विकल्प भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय ईवी का कम संख्या में आयात करना रणनीतिक रूप से समझदारी नहीं है।
स्वच्छ तकनीक की दिशा में यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब काइलैक ने भारतीय बाजार में स्कोडा की स्थिति को पूरी तरह से बदल दिया है और आने वाले कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (कैफे) के तीसरे चरण के मानदंड वाहन बेड़े के स्तर पर उत्सर्जन लक्ष्य को काफी सख्त कर देंगे, जिससे सीएनजी, ईवी में विस्तार अब कोई पसंद नहीं, बल्कि व्यापाक बाजार वाली श्रेणियों में बिक्री बढ़ने पर उत्सर्जन संतुलित करने के लिए क्रियान्वयन की जरूरत बन जाएगा।
कॉम्पैक्ट एसयूवी का स्कोडा ऑटो इंडिया की बिक्री में 60 प्रतिशत से ज्यादा और स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया में समूह की समूची बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत योगदान है। गुप्ता ने कहा, ‘आज काइलैक की हमारी कुल बिक्री में लगभग 60 प्रतिशत की हिस्सेदार है।’
साल 2025 की शुरुआत में पेश किए गए काइलैक मॉडल की एक साल में 50,000 से ज्यादा गाड़ियां बेची गईं। गुप्ता ने कहा कि साल 2026 में भी यह दर बरकरार रहेगी। जीएसटी में बदलाव के बाद इस श्रेणी की वृद्धि और पिछले साल जोड़े गए 77 नए टच पॉइंट से इस दर को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘मैं कोई निश्चित आंकड़े नहीं दूंगा, लेकिन रुख साफ तौर पर इजाफे की ओर है।’