धोनी ने दूसरे वनडे में 39 गेंद शेष रहते हुए 360 रन के लक्ष्य को हासिल करने के बाद कहा, मैं समझता हूं कि यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक था। नियमों में बदलाव, क्षेत्ररक्षण की पाबंदियों और पिच कुछ भी हो तब भी 360 रन का लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होता है।
उन्होंने कहा, मैं जानता था कि हम लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। एक बार हमने 414 रन : राजकोट 2009 : बनाये लेकिन श्रीलंका 411 रन बनाकर उसे हासिल करने के करीब पहुंच गया था। इसलिए मैंने खिलाडि़यों से कहा कि वे लक्ष्य पर ध्यान नहीं दें और केवल अपना खेल खेलें। शिखर ने बेहतरीन बल्लेबाजी की। कोहली की पारी अद्भुत थी तो रोहित बड़ी पारी खेलने में सफल रहा।
धोनी ने कहा कि उनके बल्लेबाजों की खासियत यह रही कि उन्होंने नियंत्रित आक्रामकता दिखायी।
उन्होंने कहा, यह आदर्श पिच थी। आउटफील्ड तेज थी और आपको वास्तव में बल्लेबाज की तरह खेलने की जरूरत थी और हमने ऐसा अच्छी तरह से किया। हमारे अधिकतर बल्लेबाजों के पास युवराज सिंह जैसा अनुभव नहीं है जिन्होंने 250 से अधिक मैच खेले हैं। आक्रामक बनना जरूरी था लेकिन यह भी महत्वपूर्ण था कि हम जोखिम भरे शाट नहीं खेलें।